Indore Cyber Fraud: म्यूल खातों से विदेश भेजी जा रही ठगी की रकम, बैंककर्मियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
इंदौर। साइबर ठगी से प्राप्त रकम को म्यूल बैंक खातों में जमा कराने के बाद क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से विदेश भेजे जाने का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। इंदौर क्राइम ब्रांच और विभिन्न थाना पुलिस की जांच में पता चला है कि कथित साइबर ठग यूएसडीटी और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करके ठगी की रकम को विदेश तक पहुंचा रहे थे। मामले में कुछ बैंककर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत क्राइम ब्रांच के साथ सराफा, एमजी रोड, संयोगितागंज और कोतवाली थाना पुलिस ने बैंक खातों की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों की जांच शुरू की है। पुलिस के अनुसार पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम इंदौर में खोले गए बैंक खातों में जमा कराई गई थी।
जांच में ऐसे कई खातों की जानकारी मिली है, जिन्हें कुछ लोगों ने कमीशन या अन्य लाभ के बदले साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। ऐसे बैंक खातों को साइबर अपराध की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग अपराध से प्राप्त रकम को जमा करने, निकालने अथवा एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक कुछ रुपये या कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल सिम और नेट बैंकिंग की जानकारी दूसरे लोगों को दे देते हैं।
अपराधी इन खातों का इस्तेमाल करके ठगी की रकम को कई चरणों में स्थानांतरित करते हैं, जिससे पुलिस के लिए वास्तविक आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कुछ मामलों में खाताधारक को अपराध की जानकारी होती है, जबकि कई बार लोगों को नौकरी, लोन या निवेश का लालच देकर उनके दस्तावेजों से खाते खुलवाए जाते हैं।
बीकॉम स्नातक लक्की गिरफ्तार
डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के अनुसार पुलिस ने तिलक नगर निवासी लक्की को गिरफ्तार किया है। आरोपी बीकॉम स्नातक बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि उसने अपना बैंक खाता म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करने के लिए दूसरे लोगों को उपलब्ध कराया था।
इसके साथ ही आरोपी ने अपने नाम पर जारी मोबाइल सिम भी कथित रूप से दूसरे लोगों को सौंप दी थी। इस सिम पर बैंकिंग लेन-देन के दौरान आने वाले ओटीपी प्राप्त होते थे। खाते और सिम की सहायता से संगठित तरीके से कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था।
कई राज्यों की शिकायतों से जुड़ा मिला खाता
क्राइम ब्रांच ने राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और साइबर क्राइम पोर्टल से प्राप्त डेटा के आधार पर आरोपी के बैंक खाते की जांच की।
पुलिस के मुताबिक खाते का संबंध पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम, बिहार, दिल्ली, गोवा, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराध की शिकायतों से मिला है। पुलिस खाते में जमा हुई रकम, उसे आगे भेजे जाने के तरीके और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगा रही है।
बैंककर्मियों को जारी होंगे नोटिस
मामले की जांच के दौरान कुछ बैंककर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। पुलिस को आशंका है कि कुछ बैंक खातों को खोलने और संचालित करने में भारतीय रिजर्व बैंक के केवाईसी एवं अन्य नियमों का पालन नहीं किया गया।
पुलिस यह जांच रही है कि संदिग्ध खातों में बड़ी संख्या में लेन-देन होने के बावजूद बैंक स्तर पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। संबंधित बैंककर्मियों को नोटिस जारी कर पूछताछ की तैयारी की जा रही है। हालांकि, उनकी भूमिका और जवाबदेही जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
चार युवकों के खिलाफ दो प्रकरण दर्ज
संयोगितागंज थाना पुलिस ने सिरपुर की नट कॉलोनी निवासी आदित्य, मिथुन पंवार, संदीप और अंशुल पाटीदार के खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने एचडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए थे।
जांच में इन बैंक खातों में उत्तर प्रदेश में हुई साइबर ठगी की रकम स्थानांतरित होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब खातों की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री, मोबाइल नंबर, दस्तावेज और रकम निकालने वाले लोगों का विवरण जुटा रही है।
इंदौर के खाते में जमा हुई ओडिशा की ठगी की रकम
एमजी रोड थाना पुलिस ने साउथ गाडराखेड़ी, सदर बाजार निवासी अभिषेक पुरी के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक उसका खाता एमजी रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में है। इस खाते में ओडिशा में हुई कथित साइबर धोखाधड़ी की रकम जमा होने की जानकारी मिली है।
पुलिस यह पता लगा रही है कि खाताधारक ने जानबूझकर अपना खाता उपलब्ध कराया था या उसके दस्तावेजों और बैंक खाते का किसी अन्य व्यक्ति ने दुरुपयोग किया।
यूएसडीटी से विदेश भेजी गई रकम
जांच में सामने आया है कि म्यूल खातों में जमा रकम को आगे स्थानांतरित करने के बाद यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा रहा था। इसके बाद डिजिटल वॉलेट और अन्य माध्यमों से रकम विदेश भेजे जाने की आशंका है।
पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, क्रिप्टो वॉलेट, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। साइबर ठगी का दायरा कई राज्यों तक फैला होने के कारण अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय साइबर एजेंसियों से भी जानकारी साझा की जा सकती है।
