आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सजगता और पोषण से स्नेहा ने जीती कुपोषण से जंग
बेहतर देखभाल और समय पर उपचार से गंभीर कुपोषण से निकलकर पहुंची सामान्य श्रेणी में
झाबुआ, प्रतिनिधि मनीष कुमट।
झाबुआ: महिला एवं बाल विकास विभाग की सतत निगरानी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की सक्रिय भूमिका और समय पर मिले उपचार व पोषण के समन्वित प्रयासों से परियोजना रामा के सेक्टर पिथनपुर-1 स्थित आंगनवाड़ी केंद्र पिथनपुर की बालिका स्नेहा ने कुपोषण को मात देकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाया है।
स्नेहा की कहानी यह साबित करती है कि सही समय पर पहचान, नियमित निगरानी, उचित पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी उपयोग से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है। आज स्नेहा कुपोषण से बाहर निकलकर सामान्य श्रेणी में पहुंच चुकी है।
जन्म के बाद पोषण की कमी से बिगड़ी स्थिति
स्नेहा, पिता कमलेश भूरिया, का जन्म 2 अक्टूबर 2025 को हुआ था। जन्म के समय उसका वजन 2.400 किलोग्राम था। जन्म के कुछ समय बाद ही उसके माता-पिता मजदूरी के लिए गुजरात चले गए।
मजदूरी के दौरान माता-पिता को मजबूरी में स्नेहा को पड़ोसियों के पास छोड़कर काम पर जाना पड़ता था। इस कारण बालिका को समय पर मां का दूध और आवश्यक पोषण नहीं मिल सका। धीरे-धीरे इसका असर उसके स्वास्थ्य पर पड़ा और वह गंभीर कुपोषण की श्रेणी में पहुंच गई।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने समय पर पहचानी समस्या
जब स्नेहा के माता-पिता वापस गांव लौटे, तब आंगनवाड़ी केंद्र पिथनपुर की कार्यकर्ता कु. नीलम भूरिया ने नियमित वजन और लंबाई मापन के दौरान बालिका की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया।
जांच में स्नेहा गंभीर कुपोषित पाई गई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने तत्काल स्थिति को गंभीरता से लेते हुए परिजनों को कुपोषण के दुष्परिणामों और बच्चों के लिए संतुलित पोषण के महत्व की जानकारी दी।
उन्होंने परिवार को समझाया कि समय पर उपचार और उचित देखभाल से स्नेहा के स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है। इसके बाद परिवार को बालिका की विशेष देखभाल के लिए प्रेरित किया गया।

स्वास्थ्य जांच और एनआरसी में मिला उपचार
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने स्नेहा का वीएचएसएनडी दिवस के अवसर पर एएनएम से स्वास्थ्य परीक्षण करवाया। जांच के बाद आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।
इसके साथ ही परिजनों को प्रेरित कर स्नेहा को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी), रामा में भर्ती कराया गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में बालिका की आवश्यक जांचें की गईं।
एनआरसी में स्नेहा को 14 दिनों तक विशेष उपचार और पोषण उपलब्ध कराया गया। इस दौरान उसके स्वास्थ्य और वजन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
निरंतर निगरानी से लौटी स्वास्थ्य की राह
एनआरसी से वापस आने के बाद भी स्नेहा की देखभाल में कोई कमी नहीं आने दी गई। आंगनवाड़ी केंद्र पर उसकी नियमित निगरानी की गई और उसे लगातार पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया गया।
निरंतर देखभाल, संतुलित पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर समन्वय के परिणामस्वरूप स्नेहा धीरे-धीरे स्वस्थ होती गई और अब वह कुपोषण से मुक्त होकर सामान्य श्रेणी में पहुंच चुकी है।
परिवार ने जताया आभार
स्नेहा के परिजनों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता कु. नीलम भूरिया और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर मिले मार्गदर्शन, उपचार और पोषण सहयोग से उनकी बेटी के स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव आया है।
परिवार ने बताया कि यदि समय पर स्नेहा की स्थिति की पहचान नहीं होती और उपचार नहीं मिलता, तो समस्या और गंभीर हो सकती थी।
कुपोषण के खिलाफ सामूहिक प्रयास की मिसाल
स्नेहा की सफलता यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन, नियमित निगरानी और समुदाय की भागीदारी से कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित पोषण संबंधी योजनाएं बच्चों के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और समर्पण से कई बच्चों को समय पर सहायता मिल रही है।
स्नेहा की कहानी उन सभी परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाती है। सही पोषण, समय पर उपचार और निरंतर देखभाल से हर बच्चा स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
