*11 साल में भी नहीं पूरे हुए आंगनवाड़ी के दरवाजे*
*5 लाख की लागत से बना भवन आज भी अधूरा, फर्श और मुख्य द्वार के बिना पढ़ने को मजबूर मासूम*
*कागजों में पूर्ण, जमीन पर अधूरा निर्माण? जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल*
*झकनावदा (मनीष कुमट)*
Jhabua जिले की पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत भेरूपाड़ा एक ओर जहां विभिन्न शासकीय योजनाओं और उपलब्धियों के लिए प्रशंसा प्राप्त करती रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत क्षेत्र के केसरपुरा में स्थित एक आंगनवाड़ी भवन प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही के अभाव की कहानी बयां कर रहा है।
वर्ष 2015 में लगभग 5 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत यह आंगनवाड़ी भवन आज वर्ष 2026 में भी अधूरा दिखाई दे रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि भवन का निर्माण कार्य कागजों में पूर्ण बताया जा चुका है, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि भवन में आज तक मुख्य दरवाजे नहीं लगाए गए हैं और फर्श का कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
*मासूम बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़*
ग्रामीणों का कहना है कि आंगनवाड़ी भवन में बच्चे नियमित रूप से आते हैं, लेकिन भवन में दरवाजे नहीं होने से उनकी सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है। बरसात, धूल और आवारा पशुओं के प्रवेश का भी डर बना रहता है। फर्श अधूरा होने के कारण छोटे बच्चों को बैठने और गतिविधियां संचालित करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि 11 वर्षों में न तो भवन पर रंग-रोगन किया गया और न ही आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। शासन द्वारा बच्चों के लिए बनाए गए भवन की यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
*ग्राम सभा में उठता रहा मुद्दा, लेकिन कार्रवाई शून्य*
ग्राम पंचायत के जागरूक युवा बबलू सिंगार ने बताया कि ग्राम सभाओं में कई बार इस अधूरे भवन का मुद्दा उठाया गया। सरपंच और सचिव को बार-बार अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। आज तक न तो कार्य पूरा हुआ और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
आखिर राशि कहां खर्च हुई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भवन का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ तो स्वीकृत राशि का उपयोग किस कार्य में किया गया? क्या निर्माण एजेंसी, पंचायत और संबंधित अधिकारियों ने बिना पूर्ण कार्य के भुगतान कर दिया? यदि ऐसा है तो यह वित्तीय अनियमितता और शासकीय धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।
*कलेक्टर साहब, क्या होगी कार्रवाई?*
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर यह पता लगाया जाए कि स्वीकृत राशि का उपयोग कहां और कैसे हुआ। साथ ही दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
*जनता पूछ रही है…*
जब भवन 2015 में बना था तो 2026 तक दरवाजे और फर्श क्यों नहीं लगे? क्या निर्माण कार्य बिना पूर्ण हुए ही पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी स्थल निरीक्षण किया?
आखिर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह बन सकता है।
