अमरपुरा आंगनबाड़ी केंद्र में औचक निरीक्षण के दौरान बिना यूनिफॉर्म मिली सहायिका, व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
ड्रेस कोड के पालन और बच्चों की उपस्थिति को लेकर सामने आई शिकायतें, विभागीय जांच की मांग
शमशाबाद। तहसील क्षेत्र के ग्राम अमरपुरा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं को लेकर उस समय सवाल खड़े हो गए, जब अखिल आर्यावर्त संघ अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद, मध्यभारत प्रांत के प्रांतीय अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र पर निर्धारित ड्रेस कोड के पालन, बच्चों की उपस्थिति तथा बच्चों को केंद्र तक लाने जैसी व्यवस्थाओं से जुड़े मुद्दे सामने आए।
बिना यूनिफॉर्म के मिली सहायिका
औचक निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी सहायिका बिना निर्धारित यूनिफॉर्म के ड्यूटी पर मिलीं। शासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य केंद्रों पर अनुशासन, पहचान और एकरूपता बनाए रखना है।
निरीक्षण के दौरान जब प्रांतीय अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने सहायिका से बिना यूनिफॉर्म आने के संबंध में सवाल किया, तो रिपोर्ट के अनुसार सहायिका ने बताया कि वह यूनिफॉर्म केवल फोटो खिंचवाने के समय पहनती हैं और फोटो के बाद उसे बदल देती हैं। इस जवाब के सामने आने के बाद निरीक्षणकर्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देने की बात कही।
बच्चों को केंद्र तक बुलाने को लेकर भी चर्चा
निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र में दर्ज बच्चों की संख्या और मौके पर मौजूद बच्चों की स्थिति को लेकर भी जानकारी ली गई। सहायिका श्रीमती सरोज शर्मा के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र में करीब 30 बच्चे दर्ज हैं, जबकि निरीक्षण के दौरान तीन बच्चे केंद्र में मौजूद थे।
बच्चों को उनके घरों से आंगनबाड़ी केंद्र तक बुलाने को लेकर भी सहायिका से जानकारी ली गई। रिपोर्ट के अनुसार सहायिका ने कहा कि वह बच्चों को घर से बुलाने के लिए नहीं जाएंगी। उन्होंने इसके पीछे अपने घर की केंद्र से दूरी का कारण बताया।
बताया गया कि सहायिका ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि वह इस पद पर काम नहीं करना चाहतीं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें नौकरी से हटा दिया जाए। हालांकि, इन बयानों और केंद्र की वास्तविक व्यवस्थाओं की पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड एवं जांच के आधार पर की जानी बाकी है।
सुपरवाइजर से हुई फोन पर बातचीत
निरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतों के बाद राजकुमार विश्वकर्मा ने क्षेत्र की सुपरवाइजर श्रीमती सीमा ओझा से टेलीफोन पर बातचीत कर मामले की जानकारी दी। बातचीत के दौरान सुपरवाइजर ने मामले को विभागीय स्तर पर रखने और आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया।
जानकारी के अनुसार सुपरवाइजर ने कहा कि इस संबंध में सोमवार को डीपीएम (DPM) को पत्र लिखा जाएगा। साथ ही पत्र की प्रतिलिपि उपलब्ध कराने की बात भी कही गई। मामले को लेकर संबंधित विभाग को लिखित आवेदन भी प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और बाल विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं। ऐसे में केंद्रों पर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति, निर्धारित नियमों का पालन और बच्चों की वास्तविक उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों से क्षेत्र के नौनिहालों का भविष्य जुड़ा हुआ है। इसलिए केंद्रों पर शासन द्वारा निर्धारित नियमों और जिम्मेदारियों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि निरीक्षण के दौरान सामने आई शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और संगठन के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मांग की गई है कि केंद्र के रिकॉर्ड, बच्चों की दर्ज संख्या, वास्तविक उपस्थिति, कर्मचारियों की उपस्थिति और शासन के निर्धारित ड्रेस कोड सहित अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर व्यवस्थाओं का आकलन करने के बजाय समय-समय पर जमीनी निरीक्षण भी किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच सके।
फिलहाल मामले में विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई का इंतजार है। निरीक्षण के दौरान सामने आए आरोपों की वास्तविकता संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है।
