Congress सांसद गौरव गोगोई के आरोपों पर अमित शाह का जवाब, अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उठे विवाद
आज लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही सदन में गंभीर बहस और आरोपों का दौर शुरू हो गया। इस दौरान Congress सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। उनका तर्क था कि स्पीकर या डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति में यह स्पष्ट नहीं था कि आसन (चैयर) पर कौन बैठेगा। इस पर सदन में जोरदार बहस शुरू हो गई और कई सांसदों ने इस मसले पर अपनी राय व्यक्त की।
गौरव गोगोई का आरोप
Congress सांसद गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सदन में चल रही कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए नबाम रेबिया बनाम डिप्टी स्पीकर मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का हवाला दिया। गौरव गोगोई ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष, पारदर्शी और पक्षपातरहित होना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान यदि स्पीकर या डिप्टी स्पीकर उपस्थित नहीं हैं, तो आसन पर कौन बैठेगा, इसका निर्णय कैसे लिया गया? उनके अनुसार, इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हो रहा है और इसे गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
सांसद जगदंबिका पाल ने भी गौरव गोगोई को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो गृह मंत्री अमित शाह ने सीधे कार्रवाई करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।
अमित शाह का जवाब
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस सांसद नियमों की गलत व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान भी स्पीकर का कार्यकाल जारी रहता है। अमित शाह ने कहा कि संविधान के प्रावधानों में “प्रेसाइड” शब्द का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि स्पीकर का कार्यकाल समाप्त हो गया है। यह एक गलत व्याख्या है।
अमित शाह ने आगे कहा कि यदि सदन भंग हो भी जाता है या चुनाव के दौरान अस्थायी रूप से कोई कार्यवाही होती है, तब भी स्पीकर का पद बने रहता है। नए स्पीकर का चयन तब तक नहीं होता जब तक कि चुनाव संपन्न नहीं हो जाता। इसलिए, आसन पर कौन बैठता है, इसका निर्णय सदन की कार्यवाही और संविधान के प्रावधानों के अनुसार लिया जाता है।
95(2) के अनुसार
गृह मंत्री ने अनुच्छेद 95(2) का हवाला देते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव जैसी परिस्थितियों में सदन यह तय करता है कि कौन आसन पर बैठेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो फैसला लिया गया, वह स्पीकर की शक्ति और अधिकार का प्रयोग करके किया गया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री भी सदन को लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर बताते हैं, जो धर्म, जाति, लिंग या किसी अन्य भेदभाव से परे है। सदन सभी के लिए खुला है और इसका संचालन निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।
अमित शाह ने कहा कि सदन के संचालन में अध्यक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस सांसदों से अपील की कि वे नियमों की सही समझ के आधार पर बहस करें और राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय संविधान और नियमों के अनुसार चर्चा करें।
राजनीतिक और संवैधानिक महत्व
लोकसभा में स्पीकर या डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति में आसन पर बैठने की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से तय है। यह केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मर्यादा और सदन के सुचारु संचालन के लिए भी आवश्यक है। गौरव गोगोई के आरोपों ने संसद में लोकतांत्रिक कार्यवाही और नियमों की व्याख्या को लेकर बहस को उभारा। अमित शाह का जवाब यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखती है और नियमों के अनुसार कार्यवाही को सुनिश्चित करना चाहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्पीकर का कार्यकाल और आसन पर बैठने की प्रक्रिया पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अविश्वास प्रस्ताव जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में यह तय करता है कि सदन निष्पक्ष रूप से काम कर सके। यदि नियमों का पालन नहीं होता, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगा सकता है।
संसद में बहस की स्थिति
अवसर के दौरान संसद में तूल पकड़ चुकी बहस ने सभी की निगाहें आकर्षित कीं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसद लगातार यह तर्क देते रहे कि नियमों का सही पालन नहीं हो रहा है। वहीं, सरकार की ओर से अमित शाह के स्पष्ट और संवैधानिक जवाब ने बहस को संतुलित करने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि किसी भी प्रकार की गलत व्याख्या लोकतंत्र और सदन के संचालन के लिए हानिकारक है।
अमित शाह ने सदस्यों को याद दिलाया कि संविधान और नियमों के अनुसार प्रत्येक निर्णय लिया जाता है और सदन की मर्यादा का सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति में निर्णय लेना पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
निष्कर्ष
लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस ने एक बार फिर नियमों, संविधान और लोकतंत्र के महत्व को रेखांकित किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के आरोपों और अमित शाह के जवाब ने यह स्पष्ट किया कि अविश्वास प्रस्ताव जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में सदन की प्रक्रिया, स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का कार्यकाल और आसन पर बैठने की व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण होती है।
इस बहस से यह भी संदेश जाता है कि राजनीतिक आरोपों के बावजूद नियमों और संविधान के अनुसार निर्णय लेने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। अमित शाह के बयान ने यह सुनिश्चित किया कि सदन में सभी कार्यवाही संविधान और नियमों के अनुरूप हो और लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे।
