आर्यिका संगममति माताजी के सान्निध्य में भक्तिमय हुआ जैन बगीची प्रांगण, णमोकार महामंत्र की मंगल ध्वनि से गूंजा अम्बाह
35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान में प्रतिदिन उमड़ रहे श्रद्धालु, आदिनाथ जिनालय से निकली आरती यात्रा; कपरिया परिवार को मिला आरती का पुण्यार्जन
संवाददाता: मनोज जैन नायक
मुरैना/अम्बाह। नगर के जैन बगीची प्रांगण में इन दिनों धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक साधना की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। आचार्यश्री सिद्धांत सागर महाराज की शिष्या परम पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में आयोजित 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। अनुष्ठान के चलते पूरे क्षेत्र में धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
मंगलवार को भी जैन बगीची प्रांगण में सामूहिक णमोकार महामंत्र जाप का आयोजन किया गया। करीब एक घंटे तक श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर अनुशासन और भक्तिभाव के साथ महामंत्र का जाप किया। इस दौरान बच्चों और युवाओं से लेकर महिलाओं एवं बुजुर्गों तक जैन समाज के सभी आयु वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
णमोकार महामंत्र की मंगल ध्वनि से गूंजा प्रांगण

सामूहिक जाप के दौरान जैन बगीची प्रांगण णमोकार महामंत्र की मंगल ध्वनि से गूंजता रहा। बड़ी संख्या में एक साथ बैठे श्रद्धालुओं द्वारा किए गए मंत्र जाप से पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया।
श्रद्धालुओं ने अनुशासन और एकाग्रता के साथ महामंत्र का जाप किया। समाजजनों का कहना है कि सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
35 दिवसीय अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन आयोजित हो रहे धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
श्री आदिनाथ जिनालय से निकली भव्य आरती यात्रा
अनुष्ठान के अंतर्गत मंगलवार को णमोकार महामंत्र की आरती यात्रा का भी आयोजन किया गया। आरती का शुभारंभ श्री आदिनाथ जिनालय से हुआ। श्रद्धालु सुसज्जित आरती की थाल लेकर भक्तिभाव के साथ यात्रा में शामिल हुए।
आरती यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकली। श्री आदिनाथ जिनालय से प्रारंभ होकर यात्रा जश्ववर रोड, नगर पालिका, सदर बाजार, दाऊ कोठी और परेड चौराहा होते हुए जैन बगीची प्रांगण पहुंची।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए धार्मिक जयघोष से नगर का वातावरण धर्ममय हो गया। रास्तेभर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला और बड़ी संख्या में समाजजन आरती यात्रा में शामिल हुए।
जैन बगीची में भक्तिभाव से हुई श्रीजी की आरती
आरती यात्रा के जैन बगीची प्रांगण पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ श्रीजी की आरती की। आरती के दौरान पूरा परिसर धार्मिक आस्था और भक्ति के रंग में रंग गया।
इसके बाद श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र जाप अनुष्ठान में सहभागिता की। करीब एक घंटे तक चले जाप में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूर्ण एकाग्रता के साथ मंत्र आराधना की।
आरती और मंत्र जाप के संयुक्त आयोजन ने जैन बगीची के धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
कपरिया परिवार को मिला आरती का पुण्यार्जन

मंगलवार को आयोजित णमोकार महामंत्र आरती के पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य वीरेंद्र कुमार जैन, श्रीमती मीना जैन, पंकज जैन, श्रीमती रानी जैन, सनी जैन, गर्वित जैन, प्रेक्षा जैन एवं समस्त कपरिया परिवार को प्राप्त हुआ।
पुण्यार्जक परिवार के सदस्यों ने समाजजनों के साथ श्रद्धा एवं भक्तिभाव से आरती में सहभागिता की। इस दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक आयोजन का लाभ लिया।
बच्चों से बुजुर्गों तक सभी की सहभागिता
35 दिवसीय अनुष्ठान की विशेषता यह है कि इसमें समाज के सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। बच्चों और युवाओं की भागीदारी भी आयोजन में देखने को मिल रही है। इसके साथ ही महिलाएं और वरिष्ठजन भी नियमित रूप से जाप एवं आरती में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
समाजजनों का मानना है कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का अवसर मिलता है। सामूहिक आराधना के माध्यम से बच्चों को भी जैन धर्म के सिद्धांतों, मंत्रों और धार्मिक परंपराओं को समझने का अवसर प्राप्त होता है।
गुरु मां संगममति माताजी के सान्निध्य में चल रहा अनुष्ठान
परम पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में आयोजित यह 35 दिवसीय अनुष्ठान समाज के लिए विशेष धार्मिक अवसर बना हुआ है।
गुरु मां के सान्निध्य में प्रतिदिन णमोकार महामंत्र जाप, आरती और विभिन्न धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। श्रद्धालु नियमित रूप से जैन बगीची पहुंचकर आराधना में शामिल हो रहे हैं।
णमोकार महामंत्र का जैन धर्म में विशेष महत्व
जैन धर्म में णमोकार महामंत्र को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण महामंत्र माना गया है। यह किसी एक व्यक्ति विशेष की स्तुति के बजाय पंच परमेष्ठी को नमन करने का महामंत्र है। जैन समाज में धार्मिक अनुष्ठानों और साधना के दौरान इसका विशेष रूप से जाप किया जाता है।
35 दिवसीय सामूहिक जाप अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालु आध्यात्मिक साधना के साथ धर्म आराधना कर रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति आयोजन के प्रति समाज की श्रद्धा और उत्साह को प्रदर्शित कर रही है।
प्रतिदिन उमड़ रहे श्रद्धालु
जैन बगीची प्रांगण में चल रहे इस अनुष्ठान को लेकर अम्बाह सहित आसपास के क्षेत्रों के समाजजनों में उत्साह बना हुआ है। प्रतिदिन आयोजित होने वाले जाप, आरती और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
गुरु मां संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य और णमोकार महामंत्र की मंगल ध्वनि से इन दिनों जैन बगीची प्रांगण पूरी तरह धर्ममय बना हुआ है। श्रद्धालु 35 दिवसीय अनुष्ठान में शामिल होकर आत्मशांति, आध्यात्मिक साधना और धर्म आराधना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
