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अम्बाह में आर्यिका संगममति माताजी के चातुर्मास मंगल कलश की भव्य स्थापना, श्रद्धा और धर्मभाव से गूंजा पूरा नगर

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Published On: 30 July 2026
Devotees participating in the grand Chaturmas Kalash Installation Ceremony under the guidance of Aryika Sangammati Mataji in Ambah, with religious rituals, flag hoisting, and ceremonial Kalash worship
— Devotees participating in the grand Chaturmas Kalash Installation Ceremony under the guidance of Aryika Sangammati Mataji in Ambah, with religious rituals, flag hoisting, and ceremonial Kalash worship

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अम्बाह में आर्यिका संगममति माताजी के चातुर्मास मंगल कलश की भव्य स्थापना, श्रद्धा और धर्मभाव से गूंजा पूरा नगर

विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ समाज ने की सहयोग राशि की घोषणा, चातुर्मास में होंगे अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम

रिपोर्टर:  मनोज जैन नायक

मुरैना जिले के अम्बाह नगर में जैन समाज के लिए आध्यात्मिक आस्था, श्रद्धा और धर्म प्रभावना का एक ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय अवसर उस समय उपस्थित हुआ, जब वर्षायोग हेतु विराजमान परम पूज्य आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। नगर की जैन बगीची में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में अम्बाह सहित आसपास के अनेक नगरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु, समाजजन, दानदाता एवं अतिथि उपस्थित हुए।

पूरे आयोजन स्थल पर धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। जिनवाणी के पवित्र वचनों, मंत्रोच्चार, मंगल गीतों और भक्ति संगीत से संपूर्ण परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने आर्यिका माताजी के दर्शन एवं वंदना कर अपने जीवन को धन्य माना तथा धर्म प्रभावना के इस महापर्व में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

जैनाचार्य सिद्धांतसागर महाराज की पावन शिष्य परंपरा का गौरवपूर्ण आयोजन

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यह चातुर्मास आयोजन जैनाचार्य श्री 108 सिद्धांतसागर महाराज की पावन शिष्य परंपरा में विराजमान आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी के सान्निध्य में संपन्न हुआ। उनके साथ आर्यिका संयोगमति माताजी, क्षुल्लिका संपर्कमति माताजी, क्षुल्लिका सान्निध्यमति माताजी तथा क्षुल्लिका समर्पितमति माताजी की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे समारोह को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

चातुर्मास जैन धर्म में आत्मचिंतन, स्वाध्याय, संयम, तप एवं साधना का विशेष काल माना जाता है। वर्षा ऋतु के दौरान साधु-साध्वी एक स्थान पर विराजमान होकर धर्म प्रचार, प्रवचन, स्वाध्याय और समाज में नैतिक मूल्यों के संवर्धन का कार्य करते हैं। इसी कारण चातुर्मास का जैन समाज में अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है।

ध्वजारोहण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

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कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं के अनुरूप किया गया। अम्बाह नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेश कुमार महेंद्र कुमार जैन परिवार द्वारा धर्म ध्वजा फहराकर समारोह का शुभारंभ किया गया।

इसके पश्चात भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष समाज के वरिष्ठजनों एवं अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर धर्मसभा का शुभारंभ किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही समूचा वातावरण मंगलमय बन गया।

कार्यक्रम में वीतराग शासन बालिका मंडल द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बालिकाओं की मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमुदाय को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री ने कराया संपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान

समारोह के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन प्रतिष्ठाचार्य संजय शास्त्री (सिहोनिया) द्वारा किया गया। उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी, गहन धार्मिक ज्ञान एवं प्रभावशाली शैली से संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन करते हुए जैन एवं वैदिक परंपराओं के अनुरूप मंत्रोच्चारण के साथ सभी धार्मिक विधियों को संपन्न कराया।

उन्होंने चातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, सदाचार और आत्मकल्याण का श्रेष्ठ अवसर है। इस अवधि में व्यक्ति यदि धर्म, स्वाध्याय और आत्मचिंतन को अपने जीवन में अपनाता है तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है।

भक्ति संगीत ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ प्रसिद्ध भजन गायक एवं संगीतकार सौरभ जैन एंड पार्टी द्वारा जिनेंद्र भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की शानदार प्रस्तुति दी गई।

भक्ति गीतों की मधुर स्वर लहरियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर भगवान एवं गुरुओं की आराधना में लीन दिखाई दिए। कई श्रद्धालु भजनों के साथ भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।

आर्यिका माताजी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने आर्यिका श्री संगममति माताजी एवं ससंघ के दर्शन, वंदना और आशीर्वाद प्राप्त किए। बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने माताजी से धर्मोपदेश प्राप्त कर अपने जीवन में सदाचार, संयम और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से समाज में धार्मिक चेतना जागृत होती है और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं जैन दर्शन से जुड़ने का अवसर मिलता है।

चातुर्मास के सफल संचालन के लिए समाज ने बढ़-चढ़कर किया सहयोग

कार्यक्रम के दौरान चातुर्मास अवधि में आयोजित होने वाले धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए समाज के दानदाताओं ने खुले मन से आर्थिक सहयोग की घोषणाएं कीं।

समाज के प्रमुख श्रावक श्रेष्ठी नरेश जैन ‘काका’ ने आहारदान हेतु विशेष सहयोग राशि समर्पित करने की घोषणा की। उनकी इस घोषणा का उपस्थित समाजजनों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

समाज के अन्य दानदाताओं ने भी धर्म प्रभावना के लिए उदारतापूर्वक सहयोग का संकल्प व्यक्त किया। इस अवसर पर समाज में सेवा, समर्पण और परस्पर सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

बोलियों में उत्साहपूर्वक हुई सहभागिता

चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक बोलियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्म प्रभावना में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।

इस अवसर पर प्रथम कलश प्राप्त करने का सौभाग्य सुरेशचंद जैन राठी एवं गिरीश कुमार जैन राठी परिवार, अम्बाह को प्राप्त हुआ।

इसी प्रकार—

  • सम्यक दर्शन कलश का सौभाग्य रामकुमार अमित जैन (सीमेंट वाले), अम्बाह को प्राप्त हुआ।
  • सम्यक ज्ञान कलश मुकेश कुमार एवं शौर्य कुमार जैन ने प्राप्त किया।
  • सम्यक चारित्र कलश का सौभाग्य श्रीमती मैना जैन (सागोद वाले), राकेशचंद जैन, नीरज जैन, टीना जैन, एंजेल जैन एवं स्वीटी जैन सेठिया को प्राप्त हुआ।
  • गुरु कलश की बोली अमन जैन, मुस्कान जैन एवं सोनम जैन ने लेकर धर्म प्रभावना में उल्लेखनीय योगदान दिया।

इन सभी परिवारों का समाज ने अभिनंदन किया तथा उनके धार्मिक समर्पण की सराहना की।

पाद प्रक्षालन का सौभाग्य भी श्रद्धालुओं को मिला

समारोह में पाद प्रक्षालन का भी विशेष आयोजन किया गया।

इस दौरान प्रथम पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सोनम जैन एवं अजीत जैन (सूरत) को प्राप्त हुआ, जबकि दूसरा सौभाग्य मुस्कान जैन को मिला।

जैन धर्म में पाद प्रक्षालन को अत्यंत पुण्यदायी एवं श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया।

चातुर्मास में होंगे अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन

समारोह के दौरान जानकारी दी गई कि चातुर्मास अवधि में प्रतिदिन प्रवचन, स्वाध्याय, सामूहिक पूजन, अभिषेक, भक्ति संध्या, संस्कार शिविर, बाल एवं युवा धार्मिक प्रशिक्षण, महिला मंडल कार्यक्रम, तप-अनुष्ठान तथा विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

इन आयोजनों का उद्देश्य समाज में धार्मिक संस्कारों को मजबूत करना, युवाओं को धर्म से जोड़ना तथा परिवारों में नैतिक मूल्यों का विकास करना है।

समाज के सामूहिक सहयोग से सफल होगा चातुर्मास

कार्यक्रम के समापन अवसर पर समाज के पदाधिकारियों ने सभी दानदाताओं, अतिथियों, सहयोगकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक सदस्य के सहयोग, समर्पण और धार्मिक आस्था के कारण ही इतने भव्य आयोजन संभव हो पाते हैं। सभी समाजजन यदि इसी प्रकार एकजुट होकर धर्म कार्यों में सहयोग करते रहेंगे तो संपूर्ण चातुर्मास अत्यंत सफल, प्रेरणादायी और धर्म प्रभावना का माध्यम बनेगा।

मंगल आरती एवं धर्म प्रभावना के साथ हुआ समापन

भव्य धार्मिक आयोजन का समापन मंगल आरती, गुरुवंदना और धर्म प्रभावना के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान एवं गुरुओं के प्रति अपनी अटूट आस्था व्यक्त करते हुए समाज की सुख-समृद्धि, विश्व शांति और धर्म की उन्नति की मंगलकामना की।

अम्बाह में आयोजित यह चातुर्मास मंगल कलश स्थापना महोत्सव न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने समाज में एकता, सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना का भी प्रभावशाली संदेश दिया। पूरे नगर में इस आयोजन की भव्यता और धार्मिक गरिमा की व्यापक चर्चा रही तथा श्रद्धालु इसे लंबे समय तक याद रखने योग्य ऐतिहासिक आयोजन बताते नजर आए।

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