कलेक्टर के आदेश की अनदेखी? धामोरी में सरकारी कुएं से निजी खेत की सिंचाई का आरोप
कम बारिश के चलते जलस्रोतों से सिंचाई पर रोक के निर्देश; कुएं के उपयोग और सरपंच-सचिव की भूमिका की जांच की मांग
आठनेर। कम बारिश के कारण जलस्रोतों में उपलब्ध पानी को सुरक्षित रखने के लिए कलेक्टर ने सिंचाई में इनके उपयोग पर रोक के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद आठनेर विकासखंड की ग्राम पंचायत धामोरी में सरकारी कुएं के पानी से निजी खेत की सिंचाई किए जाने का आरोप सामने आया है। मामले में पंचायत के सरपंच और सचिव की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
स्थानीय स्तर पर उठे इस मुद्दे के अनुसार, सरकारी कुएं का उपयोग निजी खेत तक पानी पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ है, तो यह जांच का विषय होगा कि कुएं के पानी के उपयोग के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं और कलेक्टर के निर्देशों का पालन किया गया या नहीं। फिलहाल, संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।
कम बारिश में जलस्रोतों का पानी बचाने के निर्देश
इस वर्ष कम बारिश के कारण पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जा रही है। ऐसे में जलस्रोतों के पानी को सिंचाई में उपयोग करने के बजाय आवश्यक जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। कलेक्टर के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पानी का उपयोग तय प्राथमिकताओं और नियमों के अनुसार हो।
जलस्रोतों में उपलब्ध पानी पेयजल और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए किसी सरकारी कुएं से निजी खेत की सिंचाई किए जाने की शिकायत को गंभीरता से लेकर उसकी वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है। मौके का निरीक्षण कर यह पता लगाया जा सकता है कि कुएं से पानी किस उद्देश्य से निकाला जा रहा है और क्या उसका उपयोग प्रशासनिक निर्देशों के अनुरूप है।
सरकारी कुएं और विद्युत कनेक्शन को लेकर सवाल
शिकायत में यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि सरकारी कुएं से निजी खेत की सिंचाई बिना विद्युत कनेक्शन के की जा रही है। इस दावे की पुष्टि के लिए कुएं पर लगे पंप या मोटर, बिजली कनेक्शन और पानी खेत तक पहुंचाने की व्यवस्था की जांच की जरूरत है। संबंधित दस्तावेजों और मौके की स्थिति देखे बिना इस आरोप पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
यदि कुएं का उपयोग निजी खेत की सिंचाई के लिए हो रहा है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पानी निकालने की अनुमति किसने दी और इसका खर्च या बिजली व्यवस्था किसके नाम पर है। ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड, उपलब्ध कनेक्शन संबंधी जानकारी और मौके के निरीक्षण से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
सरपंच-सचिव की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में पंचायत के सरपंच और सचिव की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह आरोप है कि सरकारी कुएं के उपयोग की जानकारी पंचायत को हो सकती है। लेकिन उनकी जानकारी, अनुमति या किसी कार्रवाई के अभाव के बारे में आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी भूमिका तय करने से पहले संबंधित पक्षों का जवाब और पंचायत के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
मामले में प्रशासनिक जांच से यह भी स्पष्ट किया जा सकता है कि कुआं किस योजना या मद से बनाया गया था, उसके संचालन की जिम्मेदारी किसकी है और पानी के उपयोग के लिए पंचायत में कोई प्रस्ताव या अनुमति दर्ज है या नहीं।
मौके के निरीक्षण और निष्पक्ष जांच की मांग
अब ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की जा रही है कि वे धामोरी पहुंचकर सरकारी कुएं का निरीक्षण करें और कलेक्टर के निर्देशों के पालन की स्थिति स्पष्ट करें। जांच में कुएं के पानी के उपयोग, बिजली कनेक्शन और खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था से जुड़े तथ्यों को दर्ज किया जाना चाहिए।
यदि जांच में कलेक्टर के आदेश का उल्लंघन या सरकारी जलस्रोत का अनधिकृत निजी उपयोग पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप सही नहीं पाए जाते हैं, तो प्रशासन को तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। फिलहाल धामोरी में सरकारी कुएं के उपयोग को लेकर लगे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
