सिंधिया के संसदीय क्षेत्र का हाल बेहाल
संवाददाता : राहुल जैन
भ्रष्टाचार का महागठबंधन मुंगावली जनपद पंचायत में दो उपयंत्रियों का दशकराज सांसद सिंधिया के सुशासन के दावों पर फेरा पानी
स्वराज बाणी संवाददाता अशोकनगर। लोकतंत्र में जब व्यवस्था रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो विकास की परिभाषा फाइलों में दफन हो जाती है। कुछ ऐसा ही स्याह मंजर केंद्रीय दूरसंचार मंत्री और अशोकनगर के क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मुंगावली जनपद पंचायत में देखने को मिल रहा है। यहां सुशासन और विकास के तमाम दावों को ठेंगा दिखाते हुए दो उपयंत्री जिनमें सनन यादव और दिलीप राठौर है जिन्होंने भ्रष्टाचार का ऐसा ताना-बाना बुन चुके हैं, जिसे भेद पाना आम जनता तो दूर, प्रशासनिक अमले के लिए भी चुनौती बन गया है। हैरानी और घोर लापरवाही की बात यह है कि इन दोनों ही उपयंत्रियों के पास मुंगावली की कुल 60 ग्राम पंचायतों का प्रभार है। यानी आधे से ज्यादा जनपद इन दो चेहरों की उंगलियों पर नाच रही है। ये दोनों साहबान पिछले 10 सालों से एक ही जनपद पंचायत में अंगद की तरह पैर जमाए बैठे हैं। नियम-कायदों को ताक पर रखकर एक ही जगह पर एक दशक का कार्यकाल पूरा कर लेना बिना किसी ऊंचे रसूख या ‘तगड़ी सेटिंग’ के मुमकिन नहीं है।
सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के वादों पर फिर रहा पानी-
यह पूरा मामला इसलिए और अधिक गंभीर हो जाता है क्योंकि मुंगावली, केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है। सिंधिया मंचों से लगातार जीरो टॉलरेंस और क्षेत्र के कायाकल्प की बातें करते हैं। वे जनता से वादा करते हैं कि उनके क्षेत्र में एक-एक पैसे का सही इस्तेमाल होगा। लेकिन, धरातल की हकीकत यह है कि उनके ही नाक के नीचे बैठे ये दो उपयंत्री सांसद महोदय के तमाम दावों और वादों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यह स्थिति सिंधिया की राजनीतिक साख पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करती है। क्या केंद्रीय मंत्री को इस बात की भनक नहीं है कि उनके अपने क्षेत्र में दो सरकारी मुलाजिम पूरे सिस्टम को बंधक बनाकर बैठे हैं? या फिर इन भ्रष्ट अधिकारियों को किसी अदृश्य राजनैतिक संरक्षण का कवच प्राप्त है।
10 साल, 60 पंचायतें और भ्रष्टाचार का अंतहीन खेल-
मुंगावली जनपद में यह चर्चा आम है कि सनन यादव और दिलीप राठौर की जोड़ी ने विकास कार्यों को अपनी जागीर बना लिया है। 60 ग्राम पंचायतों में होने वाले हर छोटे-बड़े निर्माण कार्य चाहे वह मनरेगा के तहत बनने वाली सड़कें हों, पंचायती भवन हों, सुदूर सड़क योजना हो या फिर स्वच्छता अभियान के तहत होने वाले निर्माण इन सब में भ्रष्टाचार का ऐसा दीमक लगा है कि जनता बूंद-बूंद विकास को तरस रही है। पंचायतों में कागजों पर तो सड़कें बन जाती हैं, लेकिन जमीन पर सिर्फ धूल और गड्ढे नजर आते हैं।

कलेक्टर से शिकायत पीडब्लूडी और पीआईयू से जांच की मांग-
जिला अशोकनगर कलेक्टर साकेत मालवीय को एक विस्तृत शिकायत सौंपी गई है। इस शिकायत में न केवल इन दोनों उपयंत्रियों के एक ही स्थान पर 10 साल से जमे रहने पर आपत्ति जताई गई है, बल्कि इनके कार्यकाल में हुए तमाम निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी जांच कराने की पुरजोर मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि जनपद स्तर के अधिकारियों से इसकी जांच कराई गई, तो मामले को दबा दिया जाएगा। इसीलिए इन 60 पंचायतों में बनी सभी ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता की जांच पीडब्लूडी की तकनीकी टीम से कराई जाए और पंचायतों में निर्मित हुए भवनों, सामुदायिक केंद्रों और अन्य ढांचागत निर्माणों की जांच पीआईयू के अधिकारियों से कराई जाए। मुंगावली जनपद पंचायत का यह मामला मप्र के प्रशासनिक ढर्रे का एक जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण है। यदि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वास्तव में जनता के प्रति जवाबदेह हैं तो उन्हें खुद संज्ञान लेकर इन दोनों उपयंत्रियों पर कार्यवाही करना चाहिए।
इनका कहना है-
आप दो दिन का समय दे दें, अभी सिंधिया जी के कार्यक्रम में व्यस्त हैं, इसके बाद कार्यवाही करेंगे ।
माधुरी शर्मा
एसीईओ, जिला पंचायत अशोकनगर अपने लेटर पैड पर लिखकर सांसद जी को दे दूंगा और अगर ट्रांसफर की बात है तो मैं और विधायक जी बैठकर चर्चा कर लेंगे।
पुष्पेंद्र सिंह दांगी
सांसद प्रतिनिधि , विधानसभा मुंगावली

