Dhar नापतौल विभाग में कथित अनियमितताओं के आरोप, मुख्य लिपिक जगदीश राठौड़ की जांच की मांग
रिपोर्ट नरेंद्र सिरवी
अवैध वसूली, रसीदों में गड़बड़ी और आय से अधिक संपत्ति की जांच को लेकर शिकायत
Dhar । जिले के नापतौल विभाग में पदस्थ मुख्य लिपिक (बाबू) जगदीश राठौड़ को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं ने जिला कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य लिपिक अपने निर्धारित कार्यालयीन दायित्वों के बजाय अधिकांश समय फील्ड में रहकर कार्रवाई और जांच के नाम पर कार्य करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी का पक्ष सामने आना बाकी है।
कार्यालयीन कार्यों की निगरानी पर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मुख्य लिपिक का प्रमुख दायित्व कार्यालय में बैठकर शासकीय अभिलेखों का संधारण, पत्राचार, रजिस्टरों का रखरखाव और विभागीय कार्यों का संचालन करना होता है।
आरोप है कि इसके विपरीत मुख्य लिपिक अधिकतर समय कार्यालय से बाहर रहते हैं, जिसके कारण विभागीय कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार कार्यालय में अधिकारी और मुख्य लिपिक की अनुपस्थिति के कारण आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए विभागीय रिकॉर्ड और अधिकारियों की प्रतिक्रिया आवश्यक होगी।
रसीदों और राजस्व रिकॉर्ड में अनियमितता का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप नापतौल विभाग द्वारा बाटों और माप उपकरणों की जांच एवं सील लगाने के बाद जारी की जाने वाली रसीदों को लेकर लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ रसीदों में तिथि अंकित नहीं होने, मोबाइल नंबर दर्ज नहीं किए जाने और डुप्लीकेट रसीद जारी किए जाने जैसी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
यदि जांच में इस प्रकार की गड़बड़ियां प्रमाणित होती हैं तो यह शासकीय राजस्व, रिकॉर्ड संधारण और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।
आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मुख्य लिपिक जगदीश राठौड़ की संपत्ति और आय के स्रोतों की भी जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी की संपत्ति उसकी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक पाई जाती है, तो सक्षम जांच एजेंसी द्वारा इसकी जांच की जानी चाहिए और तथ्य सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
शिकायत में विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारी आनंद मोहन वेरावत के पास धार के साथ-साथ अलीराजपुर जिले का भी अतिरिक्त प्रभार होने के कारण नियमित निगरानी प्रभावित हो रही है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रभावी निरीक्षण नहीं होने से कार्यालयीन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। समाचार लिखे जाने तक विभागीय अधिकारी से संपर्क नहीं हो पाया।
जांच होने पर सामने आएगी वास्तविक स्थिति
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच के माध्यम से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी वास्तविकता है।
मामले में संभावित जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हो सकते हैं—
- कार्यालयीन कार्यप्रणाली और उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच
- नापतौल विभाग की रसीदों और राजस्व अभिलेखों का विशेष ऑडिट
- वित्तीय लेन-देन और शासकीय आय का परीक्षण
- विभागीय नियमों के उल्लंघन की जांच
- संपत्ति और आय के स्रोतों का परीक्षण
निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन और विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
वहीं, विभाग और संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
— नरेंद्र सिरवी
रिपोर्ट, धार
