नाबालिग के कथित अपहरण मामले में ग्रामीणों का आक्रोश, SP के नाम ASP को सौंपा ज्ञापन
सोंडवा पुलिस पर FIR में देरी और ₹50 हजार लेने के आरोप, निष्पक्ष जांच व बालिका की सकुशल बरामदगी की मांग; कार्रवाई नहीं होने पर थाने के घेराव की चेतावनी
दैनिक स्वराज वाणी | ब्यूरो चीफ खलील मंसूरी, अलीराजपुर
अलीराजपुर। सोंडवा थाना क्षेत्र के ग्राम ककड़वाल की 14 वर्षीय नाबालिग बालिका को कथित रूप से अगवा किए जाने के मामले को लेकर बुधवार को ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिला। ग्राम ककड़वाल सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष जिला मुख्यालय पहुंचे और आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्योति उमठ को दिया गया।
ग्रामीणों और बालिका के परिजनों ने मामले में सोंडवा थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि नाबालिग के कथित अपहरण की शिकायत किए जाने के बावजूद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। वहीं शिकायती आवेदन में थाना प्रभारी पर ₹50 हजार लेने का भी आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने नाबालिग की जल्द और सुरक्षित बरामदगी, कथित रूप से उसे ले जाने वाले लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
15 अगस्त की शाम बेटी को ले जाने का आरोप




नाबालिग के पिता झिमरिया उर्फ कैलाश, निवासी ग्राम ककड़वाल, ने पुलिस अधीक्षक के नाम दिए शिकायती आवेदन और शपथ-पत्र में घटना का विवरण दिया है। आवेदन के मुताबिक घटना 15 अगस्त 2026 की शाम करीब 4 बजे की बताई गई है।
पिता का कहना है कि वह अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ उमराली हाट बाजार से बस द्वारा लौटे थे और इसके बाद दोनों पैदल अपने घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए तीन लोगों ने कथित रूप से उनका रास्ता रोक लिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोगों ने पिता के साथ मारपीट और धक्का-मुक्की की तथा नाबालिग को उनसे अलग कर अपने साथ ले गए। पिता के अनुसार बालिका ने मदद के लिए आवाज भी लगाई, लेकिन उस समय आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था जो उनकी सहायता कर सके।
शिकायत करने पर धमकी देने का भी आरोप
पिता ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि नाबालिग को अपने साथ ले जाते समय संबंधित लोगों ने उन्हें धमकी दी। शिकायत के अनुसार उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि यदि वह लड़की को वापस लेने के लिए उनके गांव आए या पुलिस थाने में शिकायत की तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा।
परिजनों का कहना है कि इस घटना के बाद परिवार भय और चिंता में है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से मांग की कि बालिका की तलाश को प्राथमिकता देते हुए उसे जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद किया जाए।
नाबालिग से जुड़ा मामला होने के कारण कानून के अनुसार उसकी पहचान और अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।
पहले भी नाबालिग को ले जाने का लगाया आरोप
पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में पिता ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी संबंधित लोगों में से एक व्यक्ति उनकी बेटी को कथित रूप से अपने साथ ले गया था। उस समय परिवार और संबंधित पक्ष के बीच आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार आपसी स्तर पर समझौता होने की बात आवेदन में कही गई है।
पिता का दावा है कि समझौते के बाद उस समय दी गई शिकायत वापस ले ली गई थी। अब दोबारा इसी तरह की घटना सामने आने के बाद परिवार ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
शपथ-पत्र में पिता ने यह भी कहा कि वर्तमान घटना के बाद वह भय और सदमे में थे, जिसके कारण तत्काल पुलिस थाने नहीं पहुंच सके। बाद में ग्रामीणों द्वारा हौसला दिए जाने के बाद उन्होंने लिखित शिकायत देने का निर्णय लिया।
सोंडवा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
ज्ञापन सौंपने पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटना की शिकायत सामने आने के बाद सोंडवा पुलिस को तत्काल कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि नाबालिग से जुड़ा गंभीर मामला होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में कथित रूप से देरी की गई।
ज्ञापन में मांग की गई है कि पुलिस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करे और यह भी स्पष्ट करे कि शिकायत मिलने के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता बालिका की सुरक्षित बरामदगी है। इसके बाद घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
थाना प्रभारी पर ₹50 हजार लेने का आरोप
पिता की ओर से दिए गए शिकायती आवेदन में सोंडवा थाना प्रभारी आशा वामनिया को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन में दावा किया गया है कि उनसे ₹50 हजार की मांग की गई और कथित रूप से यह राशि दे भी दी गई।
परिवार का आरोप है कि राशि दिए जाने के बावजूद नाबालिग से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। हालांकि यह आरोप शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने इस आरोप की भी वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
महेश पटेल बोले—तत्काल दर्ज हो FIR
ज्ञापन सौंपने के दौरान आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि नाबालिग बालिका की सुरक्षित बरामदगी सबसे जरूरी है। इसके साथ कथित अपहरण के मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जानी चाहिए। पटेल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता को थाने में घंटों बैठाए रखने के बावजूद उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के किसी व्यक्ति के साथ अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले की जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
कार्रवाई नहीं हुई तो सोंडवा थाने के घेराव की चेतावनी
महेश पटेल ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों के साथ सोंडवा पुलिस थाने का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को नाबालिग की बरामदगी के लिए तत्काल प्रभाव से टीम गठित कर कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही शिकायत में लगाए गए रिश्वत संबंधी आरोपों की जांच वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने भी एक स्वर में बालिका की सुरक्षित वापसी की मांग की और कहा कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद

पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे। इस अवसर पर जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश राठौर, आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष अंगरसिंह चौहान, राजेंद्र टवली, सानी मकरानी और भाया भाई सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
ग्रामीणों की मांग है कि पुलिस प्रशासन मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए नाबालिग को जल्द सुरक्षित तलाश करे और शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए।
फिलहाल पूरे मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस प्रशासन की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही एफआईआर में देरी तथा ₹50 हजार लिए जाने संबंधी आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
