उदयगढ़ में स्ट्रीट लाइटें बंद, सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी, ग्रामीणों ने पंचायत पर लगाया उदासीनता का आरोप
दैनिक स्वराज वाणी | ब्यूरो रिपोर्ट – खलील मंसूरी | अलीराजपुर
उदयगढ़ (अलीराजपुर)। अलीराजपुर जिले के उदयगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत उदयगढ़ में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की उदासीनता के कारण स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद हैं, वहीं सार्वजनिक शौचालयों और नालियों की सफाई भी नियमित नहीं हो रही, जिससे आमजन परेशान हैं।
15-20 दिनों से अंधेरे में डूबी सड़कें
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में लगी स्ट्रीट लाइटें पिछले 15 से 20 दिनों से बंद पड़ी हैं। रात में सड़कों और गलियों में अंधेरा रहने से आवागमन में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि अंधेरे के कारण चोरी जैसी घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। उन्होंने पंचायत से स्ट्रीट लाइटें जल्द चालू कराने की मांग की है।
सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी और दुर्गंध
ग्रामीणों का आरोप है कि कई महीनों से सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हुई है। यहां गंदगी, कचरा और शराब की खाली बोतलें पड़ी रहती हैं। दुर्गंध के कारण इनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। उदयगढ़ आने वाले यात्रियों को भी पहले तो शौचालय तलाशने में दिक्कत होती है, और मिल जाने पर गंदगी व बदबू से परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि नियमित सफाई सुनिश्चित करना पंचायत की जिम्मेदारी है।
नालियों की सफाई और पेयजल पर भी सवाल
ग्रामीणों के अनुसार नालियों की नियमित सफाई न होने से जगह-जगह गंदगी जमा हो रही है और कई स्थानों पर नालियों के निर्माण व सफाई की समस्या बनी हुई है। नल-जल योजना के तहत पर्याप्त पेयजल न मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी बड़ी सुविधा की नहीं, बल्कि नाली सफाई, स्वच्छ पेयजल, शौचालयों की सफाई और रात में रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था पर सवाल
ग्रामीणों ने सफाई कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कर्मचारी समय पर सफाई नहीं करते और शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होता। ग्रामीणों के अनुसार कर्मचारियों को कथित तौर पर मात्र 3,000 से 4,000 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है, और उनकी नियुक्ति, कार्यकाल व जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था का अभाव है। उनका सुझाव है कि अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपकर नियमित निगरानी की जाए तो सफाई व्यवस्था सुधर सकती है।
कचरा संग्रहण की व्यवस्था भी अपर्याप्त
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कचरा संग्रहण के लिए अलग से व्यवस्थित वाहन नहीं है। फिलहाल कचरा ले जाने के लिए ट्रैक्टर का उपयोग होने की बात सामने आई है, जिसे ग्रामीण सरपंच से संबंधित बता रहे हैं। गीले-सूखे कचरे के अलग संग्रहण और निपटान की भी कोई प्रभावी व्यवस्था दिखाई नहीं देती, जिससे गांव में जगह-जगह गंदगी फैल रही है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि:
- बंद स्ट्रीट लाइटें तत्काल चालू कराई जाएं
- सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित हो
- नालियों की सफाई और आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाएं
- नल-जल योजना से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए
- सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर नियमित निगरानी हो
- गीले-सूखे कचरे के संग्रहण और निपटान की व्यवस्था बने
अब देखना होगा कि पंचायत के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी इन समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक ठोस कदम उठाते हैं।
