NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में आलीराजपुर में उग्र प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
आलीराजपुर | दैनिक स्वराज वाणी | रिपोर्टर: खलील मंसूरी
आलीराजपुर जिला मुख्यालय पर शनिवार को नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग तथा आंदोलनरत छात्रों पर दिल्ली में हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, युवाओं और विद्यार्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता महेश पटेल के नेतृत्व में निकाली गई इस रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बस स्टैंड से कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और हाथों में तख्तियां लेकर छात्रों को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया, जिसमें नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा आंदोलनरत छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई की जांच कर न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई।
बस स्टैंड से कलेक्टर कार्यालय तक निकाली गई विरोध रैली
शनिवार को सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, कांग्रेस कार्यकर्ता और आदिवासी विकास परिषद के पदाधिकारी बस स्टैंड पर एकत्रित हुए। यहां से सभी ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला। पूरे मार्ग में प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के अधिकारों की रक्षा और कथित परीक्षा घोटालों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर नारे लगाए।
रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी प्रकार की लापरवाही या कथित अनियमितताओं की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया गया, जिसके लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी।
महेश पटेल बोले— लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता महेश पटेल ने कहा कि नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का आधार होती है। छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं, कोचिंग लेते हैं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब, आदिवासी और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कई बार मजदूरी करते हैं, कर्ज लेते हैं और अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी तक खर्च कर देते हैं। ऐसे परिवारों के लिए शिक्षा ही भविष्य बदलने का सबसे बड़ा माध्यम होती है। यदि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां होती हैं तो सबसे अधिक नुकसान उन्हीं मेहनती छात्रों का होता है जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी की होती है।
महेश पटेल ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
आंदोलनरत छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा
महेश पटेल ने अपने संबोधन में दिल्ली में आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार को उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवाद और समाधान की आवश्यकता है, न कि टकराव की।
नीट परीक्षा की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने मांग की कि नीट परीक्षा में सामने आए सभी कथित आरोपों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों, इसके लिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास कायम रह सके।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की उठी मांग

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था युवाओं के भविष्य की नींव है। यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं तो इससे लाखों विद्यार्थियों का मनोबल प्रभावित होता है।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे प्रत्येक छात्र को समान अवसर मिले और किसी भी प्रकार की कथित धांधली या अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके। छात्रों का विश्वास बनाए रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
विरोध प्रदर्शन के समापन पर प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख रूप से निम्न मांगें रखी गईं—
- नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।
- यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- आंदोलनरत छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
- शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों का विश्वास कायम रखने के लिए प्रभावी सुधार किए जाएं।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
महेश पटेल ने कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने जिले के युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए इस जनआंदोलन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
युवाओं ने तख्तियां लेकर लगाए नारे
प्रदर्शन के दौरान छात्र-छात्राओं और युवाओं ने विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां हाथों में लेकर रैली निकाली। बस स्टैंड से कलेक्टर कार्यालय तक पूरे मार्ग में प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों को न्याय और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर नारे लगाए। रैली में शामिल युवाओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित
प्रदर्शन में आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष अंगर सिंह चौहान, खुर्शीद अली दीवान, जनपद सदस्य विक्रम, सुरेश सारडा, संजय चौहान, विक्रम (JYS), खारकुआ सरपंच, मालसिंह (JYS) सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, युवा एवं आमजन उपस्थित रहे।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में बढ़ रही चिंता
प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच आलीराजपुर में हुआ यह प्रदर्शन युवाओं की चिंता और अपेक्षाओं को सामने लाने वाला माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना देश के भविष्य के लिए आवश्यक है। इसी उद्देश्य से उन्होंने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग की है।
