डेडरवासा शासकीय हाई स्कूल की व्यवस्थाओं पर सवाल, ग्रामीणों ने की औचक निरीक्षण की मांग
समय से पहले स्कूल बंद होने और शिक्षकों की अनुपस्थिति के आरोप, पढ़ाई प्रभावित होने की जताई आशंका
Alirajpur /उदयगढ़। विकासखंड उदयगढ़ के ग्राम डेडरवासा स्थित एकीकृत शासकीय हाई स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय निर्धारित समय के अनुसार नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा है। कई मौकों पर स्कूल समय से पहले बंद होने तथा शिक्षकों और प्राचार्य की नियमित उपस्थिति नहीं होने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की जांच कर स्कूल का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है।
निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय कई बार निर्धारित समय से पहले ही बंद कर दिया जाता है। उनका दावा है कि करीब 3:30 बजे के आसपास स्कूल बंद होने की स्थिति सामने आई है। इसके अलावा प्राचार्य भारतसिंह अजनार के नियमित रूप से विद्यालय में उपस्थित नहीं रहने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा विद्यालय के नियमित संचालन और शिक्षकों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। यदि स्कूल समय से पहले बंद होता है अथवा शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते हैं तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका रहती है।
नर्सरी से कक्षा 10वीं तक विद्यार्थी अध्ययनरत
डेडरवासा के इस एकीकृत शासकीय विद्यालय में नर्सरी से लेकर कक्षा 10वीं तक विद्यार्थी अध्ययनरत बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नर्सरी से कक्षा 5वीं तक कुल 93 विद्यार्थी दर्ज हैं, जिनके लिए एक नियमित शिक्षक और दो अतिथि शिक्षकों के कार्यरत होने की जानकारी दी गई है।
वहीं कक्षा 6वीं से 10वीं तक कुल 69 विद्यार्थी दर्ज बताए गए हैं। इनमें कक्षा 6वीं में 13, कक्षा 8वीं में 21, कक्षा 9वीं में 11 और कक्षा 10वीं में 13 विद्यार्थी बताए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए विद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और उनकी नियमित उपस्थिति की स्थिति की जांच जरूरी है।

शिक्षकों की उपस्थिति पर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार कक्षा 6वीं से 10वीं तक एक नियमित शिक्षक पदस्थ हैं, जो प्राचार्य के पद का दायित्व भी संभाल रहे हैं। इसके अलावा चार अतिथि शिक्षकों के कार्यरत होने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिक स्तर पर एक नियमित शिक्षक और दो अतिथि शिक्षक तथा मिडिल स्तर पर दो नियमित शिक्षक और एक अतिथि शिक्षक होने की बात कही गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए नियमित कक्षाएं संचालित होना आवश्यक है। इसके लिए शिक्षकों की समय पर उपस्थिति और अधिकारियों द्वारा प्रभावी निगरानी जरूरी है।
स्कूल परिसर की साफ-सफाई पर भी शिकायत
विद्यालय परिसर की साफ-सफाई को लेकर भी ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए, लेकिन स्कूल परिसर और ग्राउंड की साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में बीयर की बोतलें और खाली डिब्बे पड़े होने का दावा भी किया है। हालांकि इस संबंध में वास्तविक स्थिति विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मौके पर पहुंचकर परिसर का निरीक्षण करने की मांग की है।
निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार सीएससी स्तर पर पंकज बामनिया और आशीष राठौड़ के नाम सामने आते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि स्कूल का नियमित निरीक्षण प्रभावी तरीके से किया जाता तो समय से पहले स्कूल बंद होने, शिक्षकों की अनुपस्थिति और साफ-सफाई जैसी शिकायतों का समय रहते समाधान हो सकता था।
औचक निरीक्षण और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से डेडरवासा शासकीय हाई स्कूल का औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की उपस्थिति, स्कूल खुलने और बंद होने का समय, विद्यार्थियों की उपस्थिति, कक्षाओं का संचालन, साफ-सफाई, परिसर की सुरक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों की स्थिति की जांच की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल का नियमित संचालन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
फिलहाल ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब निगाहें शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर हैं कि वे शिकायतों का संज्ञान लेकर विद्यालय का निरीक्षण कब कराते हैं और जांच में कोई अनियमितता सामने आने पर क्या कार्रवाई की जाती है।
