अलीराजपुर में ‘डाकन’ बताकर 68 वर्षीय महिला की हत्या का आरोप, शव बोरे में भरकर तालाब में फेंका; चार आरोपी गिरफ्तार
सोते समय सिर पर भारी वस्तु से हमला करने का आरोप, हत्या छिपाने के लिए कंबल में लपेटा शव; पोस्टमार्टम और गवाहों के बयान के आधार पर पुलिस ने दर्ज किया हत्या का केस
रिपोर्टर: खलील मंसूरी
अलीराजपुर जिले के चंद्रशेखर आजादनगर थाना क्षेत्र के ग्राम सेजावाड़ा में 68 वर्षीय महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार महिला को कथित रूप से ‘डाकन’ बताकर पहले विवाद और मारपीट की गई थी। इसके बाद सोते समय उसके सिर पर भारी और भोथरी वस्तु से हमला कर हत्या करने का आरोप है। वारदात को छिपाने के उद्देश्य से शव को कंबल में लपेटकर बोरे में रखा गया और टेम्पो से ले जाकर सेजावाड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित तालाब में फेंक दिया गया।
पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर रघुवंश सिंह भदौरिया के अनुसार मामले में जांच के बाद चार आरोपियों को 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विवेचना कर रही है।
तालाब में कंबल में लिपटा मिला महिला का शव
पुलिस के अनुसार 15 अगस्त 2026 को मृतका के परिजनों को जानकारी मिली कि ग्राम सेजावाड़ा के औद्योगिक क्षेत्र स्थित तालाब के पानी में नीले रंग के कंबल में लिपटी एक पोटली दिखाई दे रही है। पोटली में शव होने की आशंका जताई गई।
सूचना मिलने के बाद परिजन मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से पोटली को तालाब से बाहर निकाला गया। कंबल खोलने पर उसमें 68 वर्षीय कालीबहन पति मक्का भाई डामोर, निवासी सेजावाड़ा चौकी फलिया का शव मिला।
घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। इसके बाद चंद्रशेखर आजादनगर थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की।
BNSS की धारा 194 के तहत शुरू हुई थी जांच
महिला का शव मिलने के बाद थाना चंद्रशेखर आजादनगर में मर्ग क्रमांक 68/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत जांच प्रारंभ की।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जोबट आशुतोष ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद थाना प्रभारी चंद्रशेखर आजादनगर निरीक्षक शिवराम तरोले को मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए।
पुलिस ने शव की स्थिति, घटनास्थल और आसपास से मिलने वाले साक्ष्यों को जांच में शामिल किया। साथ ही मृतका के परिजनों और संबंधित लोगों के बयान लिए गए।
मृतका की बेटी के बयान से जांच को मिली अहम दिशा
मर्ग जांच के दौरान पुलिस ने मृतका की बेटी रमीला पति मुकेश संगाडिया, उम्र 32 वर्ष, निवासी दाहोद, गुजरात के बयान दर्ज किए।
पुलिस के अनुसार रमीला ने अपने बयान में बताया कि घटना से कुछ दिन पहले उसकी मां ने उसे फोन किया था। बातचीत के दौरान कालीबहन ने कथित तौर पर बताया था कि कुछ लोग उसके घर आए थे और उसे ‘डाकन’ बताते हुए विवाद और मारपीट की थी।
इस जानकारी के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों की भूमिका की जांच तेज की। गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों को भी आपस में जोड़कर देखा गया।
आरोपी को भाई की मौत को लेकर था संदेह: पुलिस
पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार आरोपी अजय हटीला की मां की करीब पांच से छह महीने पहले मृत्यु हुई थी। इसके बाद घटना से करीब पांच से सात दिन पहले उसके भाई संजय की भी मृत्यु हो गई थी।
पुलिस का कहना है कि अजय को अपने भाई की मृत्यु को लेकर कालीबहन पर संदेह था। इसी संदेह के चलते महिला को कथित तौर पर ‘डाकन’ बताकर उसके साथ विवाद किया गया था।
पुलिस इसी कथित अंधविश्वास और संदेह को वारदात के पीछे प्रमुख कारणों में से एक मानकर मामले की जांच कर रही है।
सोते समय सिर पर हमला करने का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात के समय कालीबहन अपने घर में सो रही थी। आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने उसके सिर पर किसी भारी और भोथरी वस्तु से हमला किया।
हमले से महिला गंभीर रूप से घायल हुई और उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सिर पर गंभीर चोट और मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव को मौत का कारण पाया गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस का संदेह हत्या की ओर मजबूत हुआ।
कंबल में लपेटकर बोरे में रखा शव
पुलिस का आरोप है कि हत्या के बाद आरोपियों ने वारदात को छिपाने की योजना बनाई। महिला के शव को पहले कंबल में लपेटा गया और इसके बाद बोरे में भरकर बांध दिया गया।
पुलिस जांच के अनुसार शव को ठिकाने लगाने के लिए टेम्पो का इस्तेमाल किया गया। शव को टेम्पो के जरिए सेजावाड़ा तालाब की ओर ले जाया गया।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति टेम्पो से आगे चलकर रास्ते की रेकी कर रहा था, ताकि शव ले जाते समय किसी व्यक्ति की नजर उन पर न पड़े।
इसके बाद शव को सेजावाड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित तालाब में फेंक दिया गया।
हत्या छिपाने के लिए तालाब में शव फेंकने का आरोप
पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने शव को तालाब में इसलिए फेंका, ताकि हत्या की घटना छिपाई जा सके और शव का पता न चले।
हालांकि 15 अगस्त को तालाब में कंबल में लिपटी पोटली दिखाई देने के बाद पूरा मामला सामने आ गया। शव की पहचान होने के बाद पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच शुरू की।
परिजनों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने बाद में इसे हत्या का मामला माना।
BNS की धारा 103(1) सहित अन्य धाराओं में केस
पुलिस के मुताबिक उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के कथनों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर महिला की हत्या किए जाने के तथ्य सामने आए।
इसके बाद थाना चंद्रशेखर आजादनगर में अपराध क्रमांक 354/2026 दर्ज किया गया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है।
पुलिस अब वारदात में इस्तेमाल कथित हथियार, वाहन और अन्य साक्ष्यों के संबंध में भी जांच आगे बढ़ा रही है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए गठित की गई टीम
हत्या का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह भदौरिया के निर्देशन में आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास शुरू किए गए।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अलीराजपुर ज्योति उमठ बघेल और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जोबट आशुतोष के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी आजादनगर के अधीन एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने संदिग्धों की तलाश और उनसे जुड़े संभावित ठिकानों पर जानकारी जुटाई। पुलिस के मुताबिक लगातार प्रयासों के बाद 17 अगस्त को चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इन चार आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अजय हटीला पिता नानिया हटीला, राजेश हटीला पिता मंगा हटीला, मुकेश मावी पिता सारेसा मावी और नरू मावी पिता रामू मावी शामिल हैं। सभी ग्राम सेजावाड़ा चौकी फलिया क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ वारदात से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित भूमिकाओं की जांच कर रही है।
मृतका की बेटी के बयान में एक अन्य व्यक्ति का नाम भी सामने आने की बात पुलिस प्रेस नोट में कही गई है। ऐसे में विवेचना के दौरान उसकी भूमिका सहित सभी तथ्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस और साइबर टीम की रही भूमिका

आरोपियों की गिरफ्तारी में थाना प्रभारी निरीक्षक शिवराम तरोले, चौकी प्रभारी सेजावाड़ा सहायक उपनिरीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया, सहायक उपनिरीक्षक मंजित, प्रधान आरक्षक दिलीप, प्रधान आरक्षक राकेश सिंगाड़, आरक्षक विशाल, आरक्षक विजय और आरक्षक भारत की भूमिका रही।
पुलिस के अनुसार मामले की जांच और आरोपियों तक पहुंचने में साइबर पुलिस टीम ने भी सहयोग किया।
अंधविश्वास से जुड़ा गंभीर मामला
प्रारंभिक पुलिस जांच में हत्या के पीछे कथित ‘डाकन’ होने का संदेह सामने आने के कारण यह मामला अंधविश्वास से जुड़ी हिंसा का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। किसी व्यक्ति को जादू-टोना या अन्य अंधविश्वास के आधार पर दोषी मानकर हिंसा करना कानूनन अपराध है।
फिलहाल पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की विस्तृत विवेचना जारी है। पुलिस गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तकनीकी साक्ष्यों और वारदात से जुड़ी अन्य परिस्थितियों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
