अलीराजपुर में जमीन के बंटवारे को लेकर पिता की हत्या, बेटे को उम्रकैद; कोर्ट ने लगाया ₹10 हजार जुर्माना
पिता से जमीन में बराबर हिस्सा नहीं मिलने से नाराज था आरोपी; पुलिस की वैज्ञानिक जांच और प्रभावी अभियोजन के बाद 10 अगस्त 2026 को न्यायालय ने सुनाया फैसला
संवाददाता: खलील मंसूरी
अलीराजपुर, 11 अगस्त 2026। मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले में जमीन के बंटवारे को लेकर पिता की हत्या करने के मामले में न्यायालय ने आरोपी बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने पिता द्वारा जमीन का हिस्सा बराबर नहीं दिए जाने से नाराज था और इसी विवाद के चलते उसने पिता पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी।
अलीराजपुर पुलिस के मुताबिक यह मामला गंभीर एवं चिन्हित श्रेणी के प्रकरण में शामिल था। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों को वैज्ञानिक और प्रभावी तरीके से संकलित किया। गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रभावी अनुसंधान और अभियोजन की पैरवी के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
जमीन के बंटवारे को लेकर पिता-पुत्र में था विवाद
पुलिस के अनुसार मामला ग्राम रामसिंह की चौकी, झुगरिया मोवड़ा फलिया, थाना अलीराजपुर क्षेत्र का है। आरोपी की पहचान कलमसिंह पिता भारतीय रावत, उम्र 36 वर्ष के रूप में हुई है, जबकि मृतक उसका पिता भारतीय रावत, उम्र 57 वर्ष था।
पुलिस के मुताबिक आरोपी अपने पिता से जमीन में बराबर हिस्सा नहीं मिलने को लेकर नाराज था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। आरोप है कि जमीन के हिस्से को लेकर पैदा हुए विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया और आरोपी ने अपने पिता पर हमला कर दिया।
हमले में भारतीय रावत की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की।
19 नवंबर 2025 को हुई थी हत्या
पुलिस के अनुसार घटना 19 नवंबर 2025 की है। घटना की सूचना मिलने के बाद थाना अलीराजपुर में प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 500/2025 के तहत संबंधित धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस टीम ने घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को खंगाला। घटनास्थल से संबंधित साक्ष्य जुटाए गए और मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस ने गवाहों के बयान भी दर्ज किए।
जांच का उद्देश्य घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने के साथ आरोपी के खिलाफ ऐसे साक्ष्य जुटाना था, जिन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से किया अनुसंधान
अलीराजपुर पुलिस के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया गया। प्रकरण का अनुसंधान निरीक्षक सोनू सितोले द्वारा किया गया।
विवेचक ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण किया। घटना से जुड़े गवाहों के कथन दर्ज किए गए और अन्य आवश्यक साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया।
पुलिस के मुताबिक अनुसंधान के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध प्रमाणित करने योग्य सामग्री जुटाई गई। इसके बाद आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में हुई मामले की सुनवाई
मामले की सुनवाई द्वितीय अपर सत्र न्यायालय, अलीराजपुर में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा पुलिस जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी की गई। न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों का परीक्षण करने के बाद आरोपी कलमसिंह को दोषसिद्ध पाया।
इसके बाद न्यायालय ने आरोपी को कठोर सजा सुनाई।
आरोपी को आजीवन कारावास और ₹10 हजार अर्थदंड
न्यायालय ने 10 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी कलमसिंह को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। इसके साथ ही उस पर 10,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
इस फैसले को अलीराजपुर पुलिस ने गंभीर अपराधों में प्रभावी अनुसंधान और मजबूत अभियोजन का परिणाम बताया है। पुलिस के अनुसार, मामले में साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिससे आरोपी के खिलाफ दोषसिद्धि में मदद मिली।
चिन्हित श्रेणी के मामले में मिली सजा
पुलिस ने इस मामले को गंभीर और चिन्हित श्रेणी के प्रकरण के रूप में लिया था। ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा जांच की निगरानी और साक्ष्य संकलन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
अलीराजपुर पुलिस के मुताबिक इस मामले में भी जांच के दौरान साक्ष्यों को वैज्ञानिक और प्रभावी तरीके से जुटाया गया। पुलिस की ओर से प्रस्तुत अभियोग पत्र और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना।
विवेचक सोनू सितोले की भूमिका महत्वपूर्ण
मामले की जांच में निरीक्षक सोनू सितोले की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पुलिस के अनुसार उन्होंने घटना से संबंधित साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए आवश्यक जांच की।
पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों में केवल आरोपी की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि न्यायालय में दोषसिद्धि के लिए मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य जुटाना भी आवश्यक है। इस मामले में जांच टीम ने इसी दिशा में काम किया।
एसपी ने गंभीर अपराधों में सख्त कार्रवाई की बात कही
अलीराजपुर पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह भदोरिया ने कहा कि जिले में गंभीर और जघन्य अपराधों के मामलों में पुलिस द्वारा त्वरित एवं निष्पक्ष अनुसंधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को न्यायालय से कठोर सजा दिलाने के लिए पुलिस लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है।
पुलिस अधीक्षक के अनुसार, अपराध की जांच में साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन और उनका न्यायालय के समक्ष प्रभावी प्रस्तुतीकरण महत्वपूर्ण है। इसी दिशा में पुलिस द्वारा लगातार काम किया जा रहा है।
जमीन विवाद ने लिया जानलेवा रूप
इस मामले में जमीन के हिस्से को लेकर शुरू हुआ पारिवारिक विवाद अंततः हत्या जैसी गंभीर घटना में बदल गया। पुलिस के अनुसार आरोपी अपने पिता से जमीन का बराबर हिस्सा नहीं मिलने को लेकर नाराज था।
मामले में न्यायालय द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने इसे गंभीर अपराधों में प्रभावी अनुसंधान की सफलता बताया है। वहीं, यह मामला पारिवारिक संपत्ति विवादों को समय रहते सुलझाने और विवाद को हिंसक रूप लेने से रोकने की जरूरत की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है।
फिलहाल न्यायालय के आदेश के अनुसार आरोपी को आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अलीराजपुर पुलिस ने बताया कि गंभीर अपराधों के मामलों में आगे भी त्वरित जांच और प्रभावी अभियोजन के माध्यम से दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने की कार्रवाई जारी रहेगी।
