एक वर्ष बाद फिर शुरू होगा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी), कुपोषित बच्चों को स्थानीय स्तर पर मिलेगा उपचार और पोषण
बीएमओ की पहल रंग लाई, पीएचसी में कमरों की व्यवस्था कर दोबारा शुरू होगा एनआरसी; ग्रामीणों में जगी नई उम्मीद
संवाददाता: नितेश वर्मा
उन्हेल। करीब एक वर्ष से बंद पड़ा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अब एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) परिसर में उपलब्ध कमरों को व्यवस्थित कर केंद्र के संचालन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार शुक्रवार से एनआरसी का संचालन दोबारा प्रारंभ किया जाएगा। इस निर्णय से उन्हेल सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के कुपोषित एवं गंभीर रूप से कमजोर बच्चों को स्थानीय स्तर पर उपचार, पौष्टिक आहार, चिकित्सकीय निगरानी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
एनआरसी के पुनः शुरू होने को क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। पिछले एक वर्ष से केंद्र बंद होने के कारण ग्रामीण परिवारों को अपने बच्चों के इलाज के लिए दूसरे शहरों और स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ रहा था। इससे आर्थिक बोझ के साथ-साथ समय और मानसिक परेशानी भी बढ़ रही थी। अब स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध होने से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
एक वर्ष से बंद था एनआरसी, बढ़ रही थीं ग्रामीणों की परेशानियां
उन्हेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र लंबे समय से क्षेत्र के कुपोषित बच्चों के उपचार का प्रमुख केंद्र था। यहां गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भर्ती कर चिकित्सकीय निगरानी में पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता था।
करीब एक वर्ष पहले जिस भवन में एनआरसी संचालित हो रहा था, उसकी स्थिति काफी जर्जर हो गई थी। भवन में सुरक्षा संबंधी जोखिम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र का संचालन बंद कर दिया था।
इसके बाद से पूरे क्षेत्र के बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर कोई एनआरसी उपलब्ध नहीं रहा। इसका सबसे अधिक असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ा, जिन्हें बच्चों के इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों तक जाना पड़ता था।
दूर-दराज अस्पतालों तक जाना बन गया था मजबूरी
एनआरसी बंद होने के बाद जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण की पहचान होती थी, उन्हें उपचार के लिए दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाता था।
ग्रामीण परिवारों के लिए यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को परिवहन, रहने और भोजन जैसी अतिरिक्त समस्याओं का सामना करना पड़ता था।
कई मामलों में दूरी और आर्थिक कठिनाइयों के कारण अभिभावक समय पर बच्चों का उपचार नहीं करा पाते थे, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती थी।
जर्जर भवन बना बंदी का सबसे बड़ा कारण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार एनआरसी जिस भवन में संचालित हो रहा था, वह समय के साथ पूरी तरह जर्जर हो चुका था।
भवन की दीवारों, छत और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की स्थिति को देखते हुए वहां बच्चों और परिजनों को रखना सुरक्षित नहीं माना गया। इसी कारण केंद्र का संचालन बंद करना पड़ा।
भवन बंद होने के बाद लंबे समय तक एनआरसी के लिए वैकल्पिक स्थान की तलाश जारी रही, लेकिन उपयुक्त व्यवस्था नहीं बन पाने के कारण संचालन शुरू नहीं हो सका।
स्थान की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
एनआरसी को दोबारा शुरू करने के लिए सबसे बड़ी समस्या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्थान की उपलब्धता थी।
पिछले एक वर्ष के दौरान कई ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर पदस्थ हुए, लेकिन कोई भी एनआरसी संचालन के लिए अलग से कमरे उपलब्ध नहीं करा पाया।
यही कारण रहा कि भवन उपलब्ध होने के बावजूद केंद्र का संचालन शुरू नहीं हो सका और क्षेत्र के हजारों परिवार इस सुविधा से वंचित रहे।
बीएमओ डॉ. संजीव कुमरावत की पहल से निकला समाधान
वर्तमान ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. संजीव कुमरावत के पदभार संभालने के बाद इस समस्या के समाधान के लिए विशेष प्रयास किए गए।
उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर का निरीक्षण कर उपलब्ध संसाधनों का आकलन किया और ऐसे कमरों की पहचान की, जिनका लंबे समय से उपयोग नहीं हो रहा था।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ कमरों में केवल अनुपयोगी सामान रखा हुआ था। इसके बाद उन कमरों को खाली कराकर एनआरसी के लिए तैयार करने की योजना बनाई गई।
अनुपयोगी सामान हटाकर तैयार किए गए नए कक्ष
बीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अनुपयोगी सामग्री को दूसरी जगह व्यवस्थित किया।
इसके बाद संबंधित कमरों की साफ-सफाई, आवश्यक मरम्मत और व्यवस्थाएं पूरी की गईं।
उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए बिना अतिरिक्त भवन निर्माण के ही एनआरसी संचालन के लिए आवश्यक स्थान तैयार कर लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह पहल सीमित संसाधनों के प्रभावी उपयोग का अच्छा उदाहरण है।
अब स्थानीय स्तर पर मिलेगा कुपोषित बच्चों को उपचार
एनआरसी दोबारा शुरू होने के बाद उन्हेल और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को अब स्थानीय स्तर पर भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
यहां बच्चों को—
- चिकित्सकीय निगरानी
- संतुलित एवं पौष्टिक आहार
- नियमित स्वास्थ्य परीक्षण
- वजन और लंबाई की निगरानी
- पोषण संबंधी परामर्श
- माताओं को उचित आहार एवं देखभाल की जानकारी
जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इससे बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाने के साथ-साथ भविष्य में कुपोषण की पुनरावृत्ति रोकने में भी मदद मिलेगी।
गरीब परिवारों को मिलेगी सबसे बड़ी राहत
एनआरसी शुरू होने का सबसे अधिक लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलेगा।
अब उन्हें अपने बच्चों के इलाज के लिए दूसरे शहरों तक नहीं जाना पड़ेगा।
इससे यात्रा खर्च, समय की बचत और उपचार में होने वाली देरी जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं बच्चों के उपचार की सफलता को भी बढ़ाती हैं।
कुपोषण मुक्ति अभियान को मिलेगी नई गति
राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग लंबे समय से कुपोषण कम करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रहे हैं।
एनआरसी इन योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
यहां गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को उपचार के साथ-साथ उनकी माताओं को पोषण, स्तनपान, स्वच्छता और संतुलित आहार के बारे में भी जानकारी दी जाती है।
एनआरसी दोबारा शुरू होने से कुपोषण मुक्त अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद है।
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
स्वास्थ्य विभाग अब क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और एएनएम के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान को और प्रभावी बनाएगा।
पहचान के बाद जरूरतमंद बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया जाएगा।
इस समन्वित व्यवस्था से समय रहते बच्चों का उपचार संभव हो सकेगा।
पीएचसी की अन्य व्यवस्थाओं में सुधार की भी उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि यदि उपलब्ध संसाधनों का इसी प्रकार बेहतर उपयोग किया जाए तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की अन्य सेवाओं में भी सुधार किया जा सकता है।
एनआरसी को दोबारा शुरू करने की पहल से लोगों में विश्वास बढ़ा है कि स्वास्थ्य विभाग अन्य व्यवस्थागत समस्याओं का भी समाधान करेगा।
स्थानीय नागरिकों ने पीएचसी में दवाइयों, उपकरणों और अन्य चिकित्सा सुविधाओं को भी मजबूत किए जाने की मांग की है।
बीएमओ बोले— उपलब्ध संसाधनों का किया बेहतर उपयोग
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. संजीव कुमरावत ने बताया कि एनआरसी को दोबारा शुरू करने के लिए उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया गया है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनुपयोगी पड़े कमरों को व्यवस्थित कर केंद्र के संचालन योग्य बनाया गया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि एनआरसी के दोबारा शुरू होने से क्षेत्र के कुपोषित बच्चों को समय पर उपचार और पोषण उपलब्ध होगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्थानीय नागरिकों का सहयोग मिलता रहा तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार किया जाएगा।
ग्रामीणों में खुशी, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ी उम्मीद
करीब एक वर्ष बाद एनआरसी दोबारा शुरू होने की खबर से पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए उन्हें अनावश्यक रूप से दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
अभिभावकों को उम्मीद है कि केंद्र का संचालन नियमित रूप से होगा और जरूरतमंद बच्चों को समय पर उपचार, पोषण तथा स्वास्थ्य संबंधी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
एनआरसी का पुनः संचालन केवल एक स्वास्थ्य सुविधा की बहाली नहीं, बल्कि क्षेत्र के बच्चों के बेहतर भविष्य, स्वस्थ बचपन और कुपोषण मुक्त समाज की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
