Adinath गृह निर्माण संस्था में बड़ा फर्जीवाड़ा: फर्जी सदस्यों को प्लॉट आवंटन, जांच समिति गठित
इंदौर के खजराना क्षेत्र स्थित Adinath गृह निर्माण संस्था एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। संस्था पर फर्जी सदस्यों को भूखंड आवंटित करने और वरीयता सूची में गड़बड़ी कर बड़े स्तर पर अनियमितता करने के आरोप सामने आए हैं। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच समिति का गठन कर दिया है और बैंक खातों के संचालन तथा रजिस्ट्री प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
15 एकड़ जमीन पर विकसित हो रही थी कॉलोनी
जानकारी के अनुसार खजराना क्षेत्र में लगभग 15 एकड़ भूमि पर आदिनाथ गृह निर्माण संस्था की “सफा पार्क” कॉलोनी विकसित की गई है। यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में रही है, लेकिन हाल ही में कलेक्टर कार्यालय में दर्ज शिकायत के बाद मामला गंभीर रूप से सामने आया।
दो सदस्यीय जांच समिति गठित
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में संयुक्त आयुक्त डॉ. शिवेंद्र देवपांडे और सहायक आयुक्त आर.के. पाटिल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
17 बिंदुओं पर मांगा गया जवाब
जांच समिति ने संस्था अध्यक्ष को 17 बिंदुओं पर विस्तृत जवाब देने के लिए पत्र जारी किया है। इसमें निम्न प्रमुख जानकारी शामिल है:
- संस्था के सदस्यों की पूरी सूची
- हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों का रिकॉर्ड
- सीलिंग एक्ट की धारा 20 के तहत मिली छूट का विवरण
- सफा पार्क कॉलोनी के 389 भूखंडों का स्वीकृत नक्शा और विकास अनुमति
- अब तक किए गए भूखंड आवंटन का पूरा रिकॉर्ड
- जनवरी 2026 के बाद नई सदस्य भर्ती और पंजीयन की जानकारी
- 1997 से 2025 तक की वार्षिक आमसभाओं का विवरण
- 2024 की वरीयता सूची पर दावे और आपत्तियों का रिकॉर्ड
सहकारिता विभाग की जांच में गंभीर अनियमितताएं
सहकारिता विभाग द्वारा तैयार प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 26 मामलों में वरीयता क्रम का उल्लंघन करते हुए नए सदस्यों को अवैध रूप से भूखंड आवंटित किए गए। इसके साथ ही कई रजिस्ट्रियां भी नियमों के खिलाफ जाकर कराई गईं।
जांच में यह भी पाया गया कि संस्था के अध्यक्ष और संचालक मंडल द्वारा पुराने वरीयता सूची में शामिल सदस्यों को नजरअंदाज कर नए सदस्यों को प्राथमिकता दी गई।
ऑडिट रिपोर्ट में भी उठे सवाल
2022 तक की ऑडिट रिपोर्ट में भी कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार संस्था के संचालन में पारदर्शिता की कमी रही है और कई निर्णय नियमों के विपरीत लिए गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि वित्तीय लेन-देन में अपेक्षित रिकॉर्ड-कीपिंग का पालन पूरी तरह नहीं किया गया, जिससे कई स्तरों पर अस्पष्टता बनी रही। कुछ महत्वपूर्ण निर्णय बिना आवश्यक अनुमोदन प्रक्रिया के लिए जाने के भी संकेत मिले हैं, जिससे संस्था के प्रशासनिक ढांचे पर सवाल उठे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई दस्तावेजों का संधारण व्यवस्थित तरीके से नहीं किया गया, जिससे भविष्य में जांच को और जटिलता हो सकती है।
प्रशासन ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच प्रक्रिया तेज कर दी है और संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जा रहा है ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके। और दोषियों पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए सभी संबंधित अभिलेखों की पुनः समीक्षा भी की जाएगी।
बैंक खाते और रजिस्ट्री पर रोक
कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
निष्कर्ष
आदिनाथ गृह निर्माण संस्था का यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि रियल एस्टेट और हाउसिंग सोसाइटी में पारदर्शिता की कमी किस तरह बड़े घोटालों को जन्म दे सकती है। प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर निवेशकों और सदस्यों के बीच चिंता बढ़ा दी है और लोग अब भविष्य की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समय पर निगरानी और सख्त नियमन बेहद जरूरी है ताकि वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके। प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से उम्मीद है कि दोषियों की पहचान स्पष्ट होगी और पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा। साथ ही यह मामला अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए भी एक चेतावनी साबित हो सकता है कि नियमों का पालन न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
