आध्यात्मिकता का महत्व बताते हुए श्रुत संवेगी महाश्रमण आदित्य सागर जी महाराज ने इंदौर में कहा कि जिसके जीवन में अध्यात्म नहीं उसका जीवन शून्य है।
आध्यात्मिकता का महत्व: जिसके जीवन में अध्यात्म नहीं उसका जीवन शून्य है
आध्यात्मिकता का महत्व बताते हुए श्रुत संवेगी महाश्रमण मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि जिसके जीवन में आध्यात्मिकता नहीं उसका जीवन शून्य है। उन्होंने कहा कि दुनिया स्वार्थी है, कोई किसी का नहीं होता और जिसे आप अपना मानते हो वह भी वास्तव में आपका नहीं होता।दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री ने समाज को जीवन, अध्यात्म, धर्म और सच्चाई का गहरा संदेश दिया। बड़ी संख्या में समाजजन इस अवसर पर उपस्थित रहे।
जीवन में आध्यात्मिकता का महत्व समझाया
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि आज अधिकांश लोग केवल दिखावे के लिए कार्य कर रहे हैं। समाज में व्यक्ति की पहचान उसके कपड़ों, गाड़ियों और बाहरी प्रदर्शन से की जाने लगी है, जबकि वास्तविक शांति केवल अध्यात्म में है।उन्होंने कहा:
“आज महंगाई नहीं बढ़ी है, लोगों के शौक बढ़ गए हैं।”
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य जीवनभर धन, संपत्ति और रिश्तों को जोड़ने में लगा रहता है, लेकिन अंत समय में इनमें से कोई भी साथ नहीं जाता।
दिखावे और स्वार्थ पर मुनिश्री का बड़ा संदेश
आध्यात्मिकता का महत्व समझाते हुए मुनि आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया स्वार्थ से चलती है। जो व्यक्ति बुरे समय में साथ खड़ा रहे वही सच्चा साथी होता है।उन्होंने कहा:
- धन स्थायी नहीं है
- रिश्ते हमेशा साथ नहीं रहते
- केवल अच्छे कर्म ही मनुष्य के साथ जाते हैं
- जो किया है वही लौटकर आएगा
मुनिश्री ने समाज को संदेश दिया कि जीवन में धर्म और अध्यात्म को अपनाकर ही वास्तविक सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है।
मृत्यु के समय न धन काम आता है न रिश्तेदार
धर्मसभा में मुनिश्री ने जीवन के अंतिम सत्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब मृत्यु आती है तब न धन काम आता है और न रिश्तेदार।उन्होंने कहा:
“जो बुरे वक्त में काम आए वही सच्चा साथी है।”
मुनिश्री ने समाज को आह्वान किया कि केवल भौतिक सुखों के पीछे भागने की बजाय आत्मिक शांति की ओर ध्यान देना चाहिए।
समाज के बीच रहकर धर्म और अध्यात्म के साथ जीवन जीने का संदेश
मुनिश्री ने कहा कि आध्यात्मिकता केवल जंगल या पहाड़ों में जाकर नहीं मिलती, बल्कि समाज के बीच रहकर भी धर्ममय जीवन जिया जा सकता है।उन्होंने कहा कि:
- परिवार में रहकर भी संयम अपनाया जा सकता है
- धर्म जीवन को संतुलित बनाता है
- अध्यात्म व्यक्ति को मानसिक शांति देता है
- अच्छे संस्कार समाज को मजबूत बनाते हैं
जनगणना में जैन धर्म लिखने का किया आह्वान
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनिश्री ने देश में होने जा रही जनगणना को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया।मुनिश्री ने कहा कि:
“देश में जैनों की संख्या आज भी चार करोड़ से कम नहीं है, लेकिन सरकारी आंकड़े केवल 40 लाख बताते हैं जो सही नहीं हैं।”
उन्होंने समाज से अपील की कि जनगणना फॉर्म भरते समय अपने नाम के साथ धर्म के कॉलम में केवल और केवल “जैन” ही लिखें, ताकि सरकारी रिकॉर्ड में जैन समाज की सही संख्या दर्ज हो सके।
धर्मसभा का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ
प्रारंभ में तुकोगंज दिगंबर जैन समाज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री लुहाडिया एवं गौरव अध्यक्ष श्री हंसमुख गांधी, सीए श्री अशोक खासगीवाला, विकास जैन आदि ने आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के चित्र का अनावरण एवं चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर धर्मसभा का शुभारंभ किया।
आचार्य श्री का पूजन इन समाजजनों ने किया
आचार्य श्री का पूजन:
- श्री अतुल जैन
- नीलेश जैन
- जिनेश जैन सुपारी वालों
द्वारा किया गया।
बड़ी संख्या में समाजश्रेष्ठी रहे उपस्थित
इस अवसर पर:
- डॉ जैनेंद्र जैन
- डॉ वीसी जैन
- देवेंद्र सोगानी
- ऋषभ पाटनी
- राहुल स्पोर्ट्स अशोक अजमेरा
- सुरेश पड़ोसी
- डी एल जैन
- अखिलेश सोधिया
आदि समाजश्रेष्ठी उपस्थित थे।धर्मसभा का संचालन ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने किया।
आध्यात्मिकता का महत्व आज क्यों बढ़ गया है
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में:
- तनाव
- प्रतिस्पर्धा
- दिखावा
- भौतिक सुखों की दौड़
इन सबने व्यक्ति को मानसिक रूप से कमजोर बना दिया है। ऐसे समय में अध्यात्म ही मनुष्य को अंदर से मजबूत बनाता है।विशेषज्ञों के अनुसार:
- अध्यात्म तनाव कम करता है
- सकारात्मक सोच बढ़ाता है
- मानसिक शांति देता है
- रिश्तों में मधुरता लाता है
