जीवन में शुभ कर्मों को एक्टिव करें, अशुभ कर्मों को डिलीट करें: साध्वी डॉ. अमृत रसा श्री जी महाराज
श्री राजेंद्र श्रीसूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परमपूज्य साध्वी श्री डॉ. अमृत रसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने मंगलवार को धर्मसभा में जिनवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि जीवन में शुभ कर्मों को एक्टिव करें और अशुभ कर्मों को डिलीट करें।
साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा अच्छे, सकारात्मक और धार्मिक कार्य करते रहना चाहिए। परोपकार, जरूरतमंदों की सहायता, सच्चाई, ईमानदारी और नियमित दान-पुण्य जैसे कार्यों से शुभ कर्मों का संचय होता है। उन्होंने कहा कि दूसरों के प्रति राग-द्वेष की भावना से बचना चाहिए और सकारात्मक विचारों को जीवन में अपनाना चाहिए।
उन्होंने बुरे और अशुभ कर्मों से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र ही मोक्ष का मार्ग है। इसलिए मनुष्य को जीवन में मोक्ष को ही अपना लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
साधार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि मंगलवार की साधार्मिक भक्ति प्रभावना का लाभ सुरेश चंद एवं सचिन कुमार भंडारी परिवार ने लिया। नवकार महामंत्र की आराधना के लाभार्थी स्वर्गीय श्री कुंदनमल एवं स्वर्गीय श्रीमती रेशमबाई की पूर्ण स्मृति में भंवरलाल, श्रीमती शीलाबाई, अमित कुमार, श्रीमती अंकिता एवं आयांश गांग परिवार, नागदा जंक्शन द्वारा 52 सिद्धि तप तपस्वियों की उत्कृष्ट प्रभावना का लाभ लिया गया।
सिद्धि तप तपस्वियों की प्रभावना का एक अन्य लाभ अशोक कुमार, दिलीप कुमार एवं अक्षय कुमार हिंगड़ परिवार, बड़ावदा तथा अशोक कुमार एवं धर्मेंद्र कुमार रांका परिवार, जावरा द्वारा लिया गया।

तपस्वियों के पारणे में भी सहभागिता
सिद्धि तप तपस्वियों के सुबह के पारणे का लाभ संदीप कुमार एवं वर्शील कुमार डूंगरवाल परिवार ने लिया, जबकि शाम के बियासने का लाभ अखिल भारतीय राजेंद्र जैन महिला बहू परिषद, महिदपुर रोड द्वारा लिया गया।
इस मंगलकारी अवसर पर सकल जैन श्रीसंघ सहित नागदा, बड़ावदा, जावरा सहित अनेक श्रीसंघों के श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
लाभार्थी परिवारों का जैन श्रीसंघ अध्यक्ष अजय चोरड़िया, चातुर्मास समिति अध्यक्ष परेश चत्तर एवं समिति सदस्यों ने आभार व्यक्त किया।
