ईंट भट्ठों पर कार्रवाई से नागदा में रोजगार का संकट गहराने की आशंका, बोले बसंत मालपानी
बड़ी संख्या में श्रमिकों के पलायन का खतरा, पहले से कमजोर व्यापार और रोजगार की स्थिति को लेकर जताई चिंता
Nagda। नागदा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित ईंट-भट्ठों को लेकर सामने आई शिकायत और कार्रवाई की मांग के बीच अब रोजगार और श्रमिकों के संभावित पलायन का मुद्दा भी सामने आया है। कांग्रेस नेता बसंत मालपानी ने ईंट-भट्ठों पर व्यापक कार्रवाई या उन्हें बंद किए जाने की स्थिति में हजारों श्रमिकों और उनसे जुड़े परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होने की आशंका जताई है।
मालपानी का कहना है कि नागदा और आसपास के कई गांवों के लोगों को ईंट-भट्ठों के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। ऐसे में यदि इन भट्ठों को पूरी तरह बंद कर दिया जाता है या बड़े पैमाने पर कार्रवाई होती है, तो इसका असर केवल भट्ठा संचालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे श्रमिकों के साथ-साथ परिवहन, ट्रैक्टर संचालन, मिट्टी से जुड़े काम और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों की आय भी प्रभावित हो सकती है।
रोजगार के बड़े माध्यम पर संकट की आशंका
कांग्रेस नेता बसंत मालपानी ने कहा कि नागदा में पहले से ही व्यापारिक गतिविधियों की स्थिति कमजोर बनी हुई है। वहीं स्थानीय युवाओं को उद्योगों में भी उनकी अपेक्षा के अनुरूप रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
ऐसे समय में ईंट-भट्ठों पर कार्रवाई होने से रोजगार का एक और महत्वपूर्ण माध्यम प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि ईंट-भट्ठों से बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिक और आसपास के ग्रामीण परिवार जुड़े हुए हैं। यदि रोजगार का यह माध्यम भी समाप्त होता है, तो कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का सवाल
मालपानी ने कहा कि ईंट-भट्ठों के संचालन से केवल वहां काम करने वाले मजदूर ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं। इनमें ट्रैक्टर चालक, मिट्टी ढुलाई करने वाले लोग, परिवहन व्यवसाय से जुड़े कर्मचारी, लोडिंग-अनलोडिंग श्रमिक और छोटे व्यापारी शामिल हैं।
यदि भट्ठों का संचालन बंद होता है तो इन सभी गतिविधियों पर इसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। इसके चलते उन परिवारों की आय प्रभावित होने की संभावना है, जिनकी रोजी-रोटी किसी न किसी रूप में ईंट-भट्ठा उद्योग से जुड़ी हुई है।
पलायन बढ़ने की जताई आशंका
बसंत मालपानी ने कहा कि रोजगार के अवसर सीमित होने की स्थिति में बड़ी संख्या में श्रमिकों के नागदा से दूसरे शहरों या राज्यों की ओर पलायन करने की आशंका पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक अवसरों की कमी के चलते पहले से ही कई लोग रोजगार की तलाश में अन्य स्थानों पर जाते हैं। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार का एक और माध्यम बंद हो जाता है, तो पलायन की समस्या और गंभीर हो सकती है।
मालपानी ने इसे नागदा के सामाजिक और आर्थिक भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है।
शिकायत करने से पहले व्यापक प्रभाव पर विचार की अपील
कांग्रेस नेता ने ईंट-भट्ठों को लेकर शिकायत करने वाले पक्ष से भी अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत या कार्रवाई की मांग से पहले उसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि किसी व्यवस्था में नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो उस पर प्रशासन को कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन कार्रवाई का असर उन हजारों लोगों पर भी देखा जाना चाहिए, जो उससे रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
मालपानी ने कहा कि नागदा के हित और यहां के हजारों परिवारों की रोजी-रोटी को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे नियमों का पालन भी हो और लोगों का रोजगार भी पूरी तरह समाप्त न हो।
नियमों का पालन जरूरी, लेकिन रोजगार भी बचना चाहिए
बसंत मालपानी ने स्पष्ट किया कि वह नियमों के पालन के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि पर्यावरणीय और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
हालांकि, उनका सुझाव है कि यदि ईंट-भट्ठों में किसी तरह की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संचालकों को आवश्यक सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। नियमों के अनुरूप सुधार कराकर उद्योग को संचालित रखने की दिशा में भी विचार किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे पर्यावरण और कानून से जुड़े मानकों का पालन सुनिश्चित हो, लेकिन साथ ही स्थानीय रोजगार के अवसरों पर भी अनावश्यक रूप से प्रतिकूल असर न पड़े।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
ईंट-भट्ठों से जुड़े रोजगार का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। श्रमिकों की आय का एक हिस्सा स्थानीय बाजारों में खर्च होता है, जिससे छोटे दुकानदारों और अन्य कारोबारियों को भी लाभ मिलता है।
इसी तरह ट्रैक्टर, परिवहन, निर्माण सामग्री और अन्य संबंधित गतिविधियों में काम करने वाले लोगों की आय भी ईंट-भट्ठों के संचालन से जुड़ी होती है। इसलिए भट्ठों पर किसी बड़े निर्णय का प्रभाव व्यापक स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।
मालपानी ने इसी व्यापक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
Nagda के भविष्य से जुड़ा मुद्दा
बसंत मालपानी ने कहा कि यदि रोजगार के प्रमुख स्थानीय साधनों में से एक ईंट-भट्ठा उद्योग भी पूरी तरह बंद हो जाता है, तो नागदा और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार का संकट और गहरा सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में बड़ी संख्या में परिवारों को रोजगार की तलाश में दूसरे स्थानों पर जाना पड़ सकता है। उनके अनुसार यह केवल रोजगार का विषय नहीं है, बल्कि नागदा की स्थानीय अर्थव्यवस्था और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि शिकायतों की जांच और नियमों के पालन की प्रक्रिया के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका और रोजगार के संभावित प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाए।
नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।
