—Advertisement—

नवकार महामंत्र आराधना के तृतीय दिवस आचार्य भगवंत के 36 गुणों का विशेष वर्णन

Author Picture
Published On: 22 August 2026

—Advertisement—

नवकार महामंत्र आराधना के तृतीय दिवस आचार्य भगवंत के 36 गुणों का विशेष वर्णन

देव-गुरु-धर्म की कृपा से ही होता है आत्मा का उद्धार — साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब

महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब के सान्निध्य में चल रही श्री नवकार महामंत्र आराधना के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। इस अवसर पर साध्वीश्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य भगवंत के महत्व, उनके 36 गुणों, गुरु की आज्ञा, गुरु कृपा और आत्मकल्याण के मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला।

धर्मसभा में बड़ी संख्या में सकल जैन श्रीसंघ के समाजजन उपस्थित हुए और साध्वीश्री की मंगलवाणी का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। आराधना के दौरान साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य के आध्यात्मिक जीवन में देव, गुरु और धर्म का विशेष महत्व है। इनके प्रति सच्ची श्रद्धा, समर्पण और आज्ञापालन के माध्यम से व्यक्ति आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

36 गुणों से परिपूर्ण होते हैं आचार्य भगवंत

साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने आचार्य पद की महत्ता बताते हुए कहा कि जैन धर्म परंपरा में आचार्य भगवंत का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। आचार्य भगवंत 36 गुणों के धारक होते हैं और वे संघ के नायक के रूप में धर्म की प्रभावना तथा साधकों के मार्गदर्शन का दायित्व निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि आचार्य भगवंत स्वयं संयम और साधना का जीवन जीते हुए अन्य साधकों को भी धर्म के वास्तविक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। संघ के संचालन से लेकर साधु-साध्वियों के मार्गदर्शन तक आचार्य भगवंत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

साध्वीश्री ने कहा कि आचार्य पद केवल सम्मान या नेतृत्व का पद नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, संयम, ज्ञान और धर्म के प्रति समर्पण से जुड़ा अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण पद है।

‘परमात्मा और गुरु की आज्ञा से आत्मा का कल्याण’

धर्मसभा में साध्वीश्री ने कहा कि परमात्मा एवं गुरु की आज्ञा का पालन करके ही मनुष्य अपनी आत्मा के कल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण के महत्व को समझाते हुए कहा कि धार्मिक जीवन में गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है।

साध्वीश्री ने कहा, “परमात्मा की आज्ञा अगर लाख की है तो गुरु की आज्ञा सवा लाख की है।”

उन्होंने समझाया कि गुरु व्यक्ति को धर्म के सिद्धांतों का केवल ज्ञान ही नहीं कराते, बल्कि जीवन में उन सिद्धांतों को व्यवहार और आचरण में उतारने का मार्ग भी बताते हैं। गुरु के मार्गदर्शन में साधक अपनी कमियों को पहचानकर आत्मसुधार की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

‘गुरु के दिल में स्थान होना बड़े सौभाग्य की बात’

साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने गुरु और शिष्य के संबंध पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के हृदय में गुरु का स्थान होना स्वाभाविक है, लेकिन गुरु के हृदय में शिष्य का स्थान बनना अत्यंत सौभाग्य की बात है।

उन्होंने कहा, “आपके दिल में गुरु का स्थान होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन गुरु के दिल में आपका स्थान होना बहुत बड़ी और सौभाग्य की बात है।”

साध्वीश्री के अनुसार गुरु कृपा साधक के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करती है। गुरु के प्रति विनय, श्रद्धा और समर्पण का भाव व्यक्ति को धर्ममार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलना और उनकी आज्ञा को जीवन में स्थान देना ही वास्तविक गुरु भक्ति का स्वरूप है।

‘गुरु कृपा से प्राप्त होती है प्रभु कृपा’

धर्मसभा में साध्वीश्री ने कहा कि गुरु की कृपा से ही साधक प्रभु कृपा की अनुभूति की दिशा में आगे बढ़ता है। गुरु व्यक्ति को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाले पथ प्रदर्शक होते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन में व्यक्ति अनेक प्रकार की परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे समय में गुरु द्वारा प्रदान किया गया ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक मार्गदर्शन उसे सही निर्णय लेने तथा धर्ममार्ग पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य के जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गुरु ही ज्ञान और साधना का सही मार्ग बताते हैं।

संघ के नायक और धर्म के मार्गदर्शक हैं आचार्य

आचार्य भगवंत की भूमिका का उल्लेख करते हुए साध्वीश्री ने कहा कि आचार्य संघ के नायक होते हैं। वे धर्म संघ का संचालन करते हुए साधु-साध्वियों और श्रावक-श्राविकाओं को धर्म की दिशा प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि आचार्य भगवंत दीक्षा प्रदान करने के साथ साधकों को संयम, तप और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उनके जीवन में विद्यमान 36 गुण साधकों के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं।

आचार्य स्वयं अपने आचरण से धर्म का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसलिए उनके प्रति श्रद्धा के साथ उनके बताए सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का प्रयास भी होना चाहिए।

‘गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति कठिन’

साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने कहा कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं मानी गई है। जीवन की शुरुआत से ही व्यक्ति किसी न किसी रूप में गुरु से ज्ञान और संस्कार प्राप्त करता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में गुरु का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि गुरु साधक को आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझने और अपने जीवन को संयमित बनाने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने समाजजनों से आह्वान किया कि गुरु के प्रति केवल श्रद्धा रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके द्वारा बताए गए धर्ममार्ग को अपने आचरण में उतारने का प्रयास करना चाहिए।

बरडिया परिवार ने लिया संपूर्ण दिवस का लाभ

जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि नवकार महामंत्र आराधना के तृतीय दिवस की धार्मिक भक्ति प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ प्रकाशचंद्र, आलोक कुमार, अरविंद कुमार बरडिया परिवार द्वारा लिया गया।

वहीं प्रवचन प्रभावना का लाभ मांगीलाल-संजय कुमार सिसोदिया परिवार, ताल द्वारा लिया गया। धर्मसभा में उपस्थित समाजजनों ने नवकार महामंत्र की आराधना के साथ साध्वीश्री की मंगलवाणी का श्रवण किया।

सोमवार को ढोल-नगाड़ों के साथ निकलेगा जाजम का जुलूस


आगामी धार्मिक कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया गया कि सोमवार सुबह 8 बजे पिस्ताबाई-सिरेमल चोरडिया परिवार के निवास स्थान से ढोल-नगाड़ों के साथ जाजम का जुलूस निकाला जाएगा।

जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर पहुंचेगा, जहां यह धर्मसभा में परिवर्तित होगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक चढ़ावे भी संपन्न कराए जाएंगे।

आयोजकों ने सकल जैन श्रीसंघ के समाजजनों से धार्मिक कार्यक्रम में उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।

सकल जैन श्रीसंघ ने प्राप्त किया धर्मलाभ

श्री नवकार महामंत्र आराधना के तृतीय दिवस आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। पूरे आयोजन के दौरान श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब ने श्रद्धालुओं को गुरु के प्रति श्रद्धा, आचार्य भगवंत के गुणों और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जीवन को सही दिशा देने के लिए देव, गुरु और धर्म के प्रति समर्पण आवश्यक है। धर्मसभा के माध्यम से समाजजनों को आत्मचिंतन, गुरु भक्ति और आत्मकल्याण का संदेश दिया गया।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp