Acharya विहर्ष सागरजी महाराज के सानिध्य में शिक्षक सम्मेलन का भव्य आयोजन
Acharya पदारोहण दिवस पर गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का भावपूर्ण सम्मान
भींडर (राजस्थान)। राष्ट्रसंत दिगंबर जैन Acharya विहर्ष सागरजी महाराज के आचार्य पदारोहण दिवस के पावन अवसर पर आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में सन्मति धाम, भींडर में भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ भींडर ब्लॉक के गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मेलन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसने पूरे आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ विकास जैन (इंदौर), रमेश सोनी (कूंथवास) एवं महेंद्र स्वर्णकार द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंगलाचरण वर्षारानी जैन एवं रेखा चौबीसा ने प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। आर्यिका मौलीहर्ष माताजी ने संगीतमय भक्ति आराधना के साथ अष्टद्रव्य से गुरु पूजन संपन्न कराया। श्रद्धालुओं एवं शिक्षकों ने भक्ति भाव से गुरु वंदना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

शिक्षकों की भूमिका पर आचार्य श्री का प्रेरक संदेश
अपने आशीर्वचन में Acharya विहर्ष सागरजी महाराज ने कहा कि भारत को स्वतंत्र कराने वाले महापुरुषों को आज भी राष्ट्र श्रद्धा से स्मरण करता है। उसी प्रकार शिक्षक भी समाज निर्माण के आधार स्तंभ हैं। यदि शिक्षक पूर्ण जिम्मेदारी के साथ विद्यार्थियों को लौकिक शिक्षा के साथ नैतिक संस्कार प्रदान करें, तो विद्यार्थी भविष्य में अपने गुरु को आदर्श के रूप में स्मरण करेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान मोबाइल और तकनीकी युग में बच्चों को सही और गलत की पहचान कराना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षक यदि सजग और संस्कारित दृष्टिकोण अपनाएं, तो विद्यार्थी घर, परिवार और राष्ट्र के लिए श्रेष्ठ व्यक्तित्व बन सकते हैं।
दिगंबर संतों की तपस्या पर मुनि विजयेश सागर का प्रवचन
मुनि विजयेश सागर महाराज ने अपने प्रवचन में दिगंबर जैन संतों की कठिन तपस्या, संयम और त्यागमय जीवन का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि साधु-संतों का जीवन आत्मानुशासन और आत्मशुद्धि का आदर्श उदाहरण है, जो समाज को सदाचार और संयम की प्रेरणा देता है।
गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण शिक्षक सम्मान समारोह रहा। भींडर एवं आसपास के गांवों में संचालित गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को तिलक, उपरणा, प्रतीक चिन्ह, डायरी एवं पेन भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके शैक्षिक योगदान के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक था।
संस्था निदेशक अनिल स्वर्णकार ने कहा कि शिक्षक सम्मान समारोह शिक्षकों के मनोबल को सुदृढ़ करता है और समाज में शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है। शिक्षक ही राष्ट्र के भावी नागरिकों का निर्माण करते हैं।
पाद प्रक्षालन एवं जिनवाणी भेंट का भावपूर्ण दृश्य
धर्मसभा के दौरान आचार्य विहर्ष सागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की गई। यह क्षण अत्यंत श्रद्धामय एवं भावनात्मक रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरु भक्ति के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में स्कूल शिक्षा परिवार ब्लॉक भींडर के अध्यक्ष कुशाल सिंह शक्तावत, मांगीलाल सालवी, इंद्रदास वैष्णव, कैलाश शर्मा सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकगण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अनिल स्वर्णकार ने प्रभावशाली शैली में किया।
उल्लेखनीय है कि अनिल स्वर्णकार जैन धर्मावलंबी नहीं होते हुए भी जैन धर्म दर्शन में गहरी आस्था रखते हैं। वे रात्रि भोजन का त्याग करते हैं तथा तीर्थराज श्री सम्मेद शिखरजी की भावपूर्ण वंदना कर चुके हैं। उन्हें भारतवर्ष के अनेक जैन संतों का आशीर्वाद प्राप्त है।
आध्यात्मिकता और शिक्षा का संगम
Acharya पदारोहण दिवस के इस भव्य आयोजन ने जहां आध्यात्मिक चेतना का संचार किया, वहीं शिक्षा और संस्कारों के महत्व को भी समाज के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा और धर्म के समन्वय से ही आदर्श समाज की स्थापना संभव है।
