आचार्य कलाप्रभसागर महाराज का Mumbai खेतवाड़ी मंगल प्रवेश भव्य धार्मिक उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। बाबूलालजी तेजाजी कटारिया संघवी को अचलगच्छ गौरव पद से सम्मानित किया गया। जानिए गुरुदेव का प्रेरक संदेश और समारोह की प्रमुख झलकियां।
आचार्य कलाप्रभसागर महाराज का Mumbai खेतवाड़ी मंगल प्रवेश
Mumbai। आचार्य कलाप्रभसागर महाराज का Mumbaiखेतवाड़ी मंगल प्रवेश जैन समाज के लिए अत्यंत गौरव और आध्यात्मिक उल्लास का अवसर बन गया। महाराष्ट्र की मायानगरी मुंबई के खेतवाड़ी क्षेत्र में श्री राजस्थान अचलगच्छ जैन संघ के तत्वावधान में परम पूज्य अचलगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री कलाप्रभसागर सूरीश्वरजी महाराजा साहेब एवं श्रमण भगवंतों का भव्य मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।
सिद्धेशज्योति टावर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में भक्तों ने मंगल गीत, जयकारों और धार्मिक उत्साह के साथ गुरुदेव का स्वागत किया। श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति के बीच गुरुदेव का सामैया आयोजित किया गया। इसके पश्चात 14वीं खेतवाड़ी स्थित गोकुल देरासर में दर्शन-वंदन कर आचार्यश्री ने श्री राजेंद्रसूरी पोषधशाला में भव्य मंगल प्रवेश किया।
आचार्य कलाप्रभसागर महाराज का मुंबई खेतवाड़ी मंगल प्रवेश: गुरुदेव का प्रेरक संदेश
सकल संघ द्वारा अचलगच्छाधिपति एवं साधु भगवंतों को गुरुवंदन अर्पित किया गया। इसके बाद गुरुदेव के मुखारविंद से मांगलिक एवं प्रासंगिक प्रवचन हुआ।परम पूज्य मुनिराज श्री हेमचंद्र सागरजी म.सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि—“जिसे हम सुख समझ रहे हैं, वही दुख है।”उन्होंने बताया कि मनुष्य संसार में जिन वस्तुओं को सुख का साधन मानता है, वास्तव में वे स्थायी नहीं हैं। धन, पद, प्रतिष्ठा, परिवार और भौतिक भोग सभी परिवर्तनशील हैं। आज जो सुख का कारण दिखाई देता है, वही भविष्य में दुख का कारण बन सकता है।
सम्यक्त्व की प्राप्ति से आत्मज्ञान का जागरण
गुरुदेव ने अपने प्रवचन में सम्यक्त्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब जीव को सम्यक दर्शन प्राप्त होता है, तब उसके भीतर भेद-विज्ञान जागृत होता है।जीव समझने लगता है कि—
- मैं आत्मा हूं।
- शरीर, धन और रिश्ते मुझसे अलग हैं।
- वास्तविक सुख बाहर नहीं, भीतर है।
- आत्मा का स्वभाव ही आनंद है।
उन्होंने कहा कि सम्यक्त्वी जीव संसार में रहते हुए भी संसार से अलिप्त रहता है, ठीक वैसे ही जैसे कमल जल में रहकर भी जल से अछूता रहता है।
सम्यक्त्व से सिद्धत्व तक की आध्यात्मिक यात्रा
आचार्यश्री ने कहा कि सम्यक्त्व प्राप्त आत्मा का अंतिम लक्ष्य सिद्धत्व होता है। आत्मा अपने पुरुषार्थ, तप, संयम और ज्ञान के माध्यम से कर्मों की निर्जरा करती है।धीरे-धीरे—
- राग समाप्त होता है
- द्वेष कम होता है
- मोह नष्ट होता है
- चारित्र निर्मल बनता है
और अंततः सभी कर्मों का क्षय कर आत्मा सिद्धशिला पर विराजमान सिद्धात्मा बन जाती है।
सिद्धात्मा की विशेषताएं
- अनंत ज्ञान
- अनंत दर्शन
- अनंत सुख
- अनंत वीर्य
- जन्म-मरण से मुक्ति
- शाश्वत आनंद
गुरुदेव ने अपने संदेश में कहा—“बाहर के सुख को सुख मत मानो, भीतर झांको, सम्यक्त्व जगाओ, तभी यह जीव सिद्ध बनेगा।”
बाबूलालजी तेजाजी कटारिया संघवी बने अचलगच्छ गौरव
इस अवसर पर श्री अखिल राजस्थान अचलगच्छ (विधि पक्ष) श्वेतांबर जैन श्री संघ द्वारा मोरसीम निवासी श्री बाबूलालजी तेजाजी कटारिया संघवी को उनके समाजसेवा, धर्मनिष्ठा और संघ के प्रति समर्पण को देखते हुए “अचलगच्छ गौरव” सम्मान से अलंकृत किया गया।सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित समाजजनों ने उनका अभिनंदन किया तथा उनके सामाजिक एवं धार्मिक योगदान की सराहना की।
समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्यजन
इस भव्य आयोजन में अनेक प्रतिष्ठित समाजसेवी, उद्योगपति, धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्यजन उपस्थित रहे।प्रमुख रूप से उपस्थित रहे—
- ओसवाल रत्न अमृतलालजी कटारिया संघवी
- समाजसेवी मंगलचंदजी सेठ
- बाबूलालजी
- जबरमलजी
- गौतमजी बाड़मेर
- अरविंद भाई हरिया
- प्रकाश भाई
- तनसुख भाई
- रमेशजी मोरसीम
- ताराचंदजी
- दिलीप भाई
- संजय भाई
- विनोद भाई
- कांतिलालजी मोरसीम
- भंवरलालजी
- हिरालालजी
- चंपालालजी
- भूरचंदजी
- संजय बंदामुथा
- जीएसटी कमिश्नर श्री बाबूलालजी
- धनराजजी देवड़ा
- के. विक्रम सुराणा
सभी ने गुरुदेव के श्रीचरणों में वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
निष्कर्ष
आचार्य कलाप्रभसागर महाराज काMumbai खेतवाड़ी मंगल प्रवेश केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मजागरण, सम्यक्त्व और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देने वाला प्रेरणादायी अवसर रहा। गुरुदेव के विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण और सिद्धत्व के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।



