नागदा में “परिसर-परिसर वंदे मातरम्” अभियान: राष्ट्रभक्ति का जागरण
अभियान का आयोजन और पृष्ठभूमि
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की नागदा इकाई, उज्जैन ग्रामीण द्वारा राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक विशेष राष्ट्रभक्ति अभियान “परिसर-परिसर वंदे मातरम्” का आयोजन किया गया। यह अभियान 5 अप्रैल से 13 अप्रैल 2026 तक निरंतर संचालित किया गया, जिसमें नगर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में जाकर विद्यार्थियों को राष्ट्रगीत के महत्व से अवगत कराया गया और सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन कराया गया।
यह अभियान केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक व्यापक जनजागरूकता पहल थी, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक मूल्यों और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ना था।
विद्यालयों में पहुंचा राष्ट्रगीत का स्वर
अभियान के दौरान ABVP के कार्यकर्ताओं ने नागदा नगर के विभिन्न विद्यालयों का दौरा किया। हर विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच पहुंचकर उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सरल भाषा में समझाया। इसके बाद विद्यार्थियों के साथ सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत का गायन किया गया।
जब सैकड़ों विद्यार्थियों की आवाज एक साथ “वंदे मातरम्” के स्वर में गूंजी, तो पूरे वातावरण में देशभक्ति और ऊर्जा का अद्भुत संचार हुआ। यह दृश्य न केवल प्रेरणादायक था, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी था कि आज की युवा पीढ़ी अपने राष्ट्र के प्रति गहरा सम्मान रखती है।
1170 विद्यार्थियों की ऐतिहासिक भागीदारी
इस अभियान में कुल 1170 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जो इस कार्यक्रम की व्यापकता और सफलता को दर्शाता है। विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह, अनुशासन और गर्व के साथ इस अभियान में सहभागिता की।
कई विद्यालयों में विद्यार्थियों ने स्वयं आगे बढ़कर राष्ट्रगीत का नेतृत्व किया, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि हुई। इस प्रकार यह अभियान केवल राष्ट्रभक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का भी माध्यम बना।

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत की स्वतंत्रता का प्रतीक और आत्मसम्मान का स्वर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने लाखों भारतीयों को एकजुट किया और उनमें देश के लिए बलिदान देने की प्रेरणा जगाई।
जब भी क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी इस गीत का उच्चारण करते थे, तो उनके भीतर नई ऊर्जा और साहस का संचार होता था। यह गीत आज भी भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।
युवाओं में राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदारी का भाव
अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि राष्ट्रप्रेम केवल शब्दों या नारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन में भी उतारना आवश्यक है।
विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार नागरिक बनने, समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने और देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया। यह समझाया गया कि राष्ट्र की प्रगति में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
विद्यालयों में उत्साह और सकारात्मक माहौल
इस अभियान के दौरान विद्यालयों में अत्यंत उत्साहपूर्ण और सकारात्मक वातावरण देखने को मिला। विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन ने भी इस पहल की सराहना की।
कई शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के भीतर छिपी देशभक्ति की भावना को जागृत करते हैं और उन्हें अपने इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाते हैं।
सांस्कृतिक जागरूकता और मूल्य शिक्षा
यह अभियान केवल राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विद्यार्थियों के लिए एक मूल्य शिक्षा का माध्यम भी बना।
कार्यकर्ताओं ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत की संस्कृति और परंपराएं हमारी पहचान हैं, और इन्हें संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। वंदे मातरम् जैसे गीत हमें हमारे इतिहास और मूल्यों की याद दिलाते हैं।
ABVP का राष्ट्रनिर्माण का संकल्प
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, नागदा इकाई ने इस अवसर पर यह संकल्प व्यक्त किया कि भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रनिर्माणकारी कार्यक्रमों का आयोजन लगातार किया जाएगा।
संगठन का मानना है कि यदि युवाओं को सही दिशा और प्रेरणा मिले, तो वे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस प्रकार के अभियान युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं और उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं।
नेतृत्व और संगठन क्षमता का विकास
इस अभियान ने विद्यार्थियों और कार्यकर्ताओं दोनों के लिए नेतृत्व और संगठन क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान किया।
कार्यकर्ताओं ने विद्यालयों में जाकर कार्यक्रमों का आयोजन किया, विद्यार्थियों को जोड़ने का कार्य किया और पूरे अभियान को सफल बनाया। वहीं विद्यार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी के माध्यम से अपनी प्रतिभा और नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन किया।

समाज में सकारात्मक संदेश
इस अभियान ने नागदा नगर में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया कि आज भी युवा पीढ़ी अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित है।
यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि समाज और संगठन मिलकर कार्य करें, तो युवाओं को सही दिशा देकर एक बेहतर और सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
निष्कर्ष: राष्ट्रभक्ति का जीवंत उदाहरण
“परिसर-परिसर वंदे मातरम्” अभियान नागदा में राष्ट्रभक्ति, एकता और जागरूकता का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। 1170 विद्यार्थियों की सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि वंदे मातरम् की भावना आज भी युवाओं के दिलों में जीवंत है।
यह अभियान न केवल एक आयोजन था, बल्कि यह एक विचार, एक प्रेरणा और एक संकल्प था—देश के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी को जीवन का हिस्सा बनाने का।
आने वाले समय में भी इस प्रकार के अभियान युवाओं को प्रेरित करते रहेंगे और राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
