राजवाड़ा के नरसिंगपुरा लाल मंदिर में दसलक्षण पर्व पर भव्य आरती, देर रात तक जुटे समाजजन
535 वर्ष पुरानी मूलनायक भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की हुई प्रथम आरती; इसके बाद पार्श्वनाथ भगवान और मानभद्र बाबा की आरती की गई
रिपोर्ट: विदर्भ जैन
इंदौर। दसलक्षण पर्व के तहत राजवाड़ा स्थित दिगम्बर जैन नरसिंगपुरा लाल मंदिर में भव्य आरती का आयोजन किया गया। पट्टाचार्य श्री 108 सुनिल सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिश्री संप्रभ सागर जी महाराज और मुनिश्री शातनु सागर जी महाराज के आशीर्वाद से आयोजित इस कार्यक्रम में नरसिंगपुरा जैन समाज के सदस्य शामिल हुए। रात 10 बजे शुरू हुई आरती करीब 11:30 बजे तक चली। इस दौरान मंदिर में भगवान आदिनाथ, पार्श्वनाथ भगवान और मानभद्र बाबा की क्रमशः आरती की गई।
भगवान आदिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के समक्ष हुई पहली आरती
मंदिर के प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने बताया कि आरती की शुरुआत मूलनायक भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के समक्ष की गई। उनके अनुसार, मंदिर में विराजमान यह प्रतिमा 535 वर्ष पुरानी है। पहली आरती के बाद पार्श्वनाथ भगवान की आरती उतारी गई। आयोजन की तीसरी आरती मानभद्र बाबा की हुई। प्रवीण जैन ने बताया कि मानभद्र बाबा के प्रति इंदौर के श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है।
तीनों आरतियां एक निर्धारित क्रम में हुईं। आरती में आए समाजजन भगवान आदिनाथ की प्रतिमा के समक्ष हुए पहले आयोजन में शामिल हुए और इसके बाद पार्श्वनाथ भगवान तथा मानभद्र बाबा की आरती में भी सम्मिलित रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चले कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने मंदिर में दर्शन कर धर्म आराधना की।
वर्ष में एक बार होता है विशेष आयोजन
प्रचार प्रमुख के अनुसार, नरसिंगपुरा समाज की ओर से इन तीनों आरतियों का सामूहिक आयोजन वर्ष में इसी दिन किया जाता है। इस वार्षिक परंपरा के चलते दसलक्षण पर्व का यह अवसर समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। आयोजन में भाग लेने के लिए समाजजन रात में मंदिर पहुंचे। उन्होंने क्रम से हुई आरतियों में सहभागिता की और भगवान के दर्शन किए।
दसलक्षण पर्व के दौरान जैन समाज में धर्म के दस गुणों पर चिंतन किया जाता है। पर्व से जुड़े धार्मिक आयोजनों में समाजजन पूजा और आराधना के लिए जिनालयों में एकत्र होते हैं। राजवाड़ा के लाल मंदिर में आयोजित आरती भी इसी क्रम में हुई। इस अवसर पर समाज के सदस्यों को एक साथ आराधना करने और मंदिर की वार्षिक परंपरा में शामिल होने का अवसर मिला।
रात साढ़े ग्यारह बजे तक चली आरती
रात 10 बजे आरती शुरू होने के बाद मंदिर में क्रमशः तीनों आरतियां संपन्न की गईं। पहली आरती भगवान आदिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के समक्ष होने के कारण आयोजन में उसकी विशेष भूमिका रही। इसके बाद पार्श्वनाथ भगवान की आरती की गई। अंत में मानभद्र बाबा की आरती के साथ आराधना का क्रम पूरा हुआ। कार्यक्रम रात करीब 11:30 बजे संपन्न हुआ।
प्रवीण जैन ने बताया कि इस दिन नरसिंगपुरा समाज की ओर से सभी आरतियां की जाती हैं। साल में एक बार होने वाले इस आयोजन में समाज के सदस्यों की सामूहिक भागीदारी रहती है। देर रात तक चले कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने दसलक्षण पर्व के अवसर पर भगवान के दर्शन किए।
समाज के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित
आरती में सामाजिक संसद से जुड़े हर्ष जैन और आनंद-नवीन गोधा, नरसिंगपुरा समाज के अध्यक्ष मुकेश जैन, मनीष जैन, प्रवीण मारवाड़ी, शैलेश शाह, सनत जैन, पवन जैन, संजय जैन, सुरेश कुलथाना और राजमल जैन सहित अन्य समाजजन शामिल हुए। सभी ने आरती में भाग लेकर आयोजन की वार्षिक परंपरा निभाई।
राजवाड़ा स्थित दिगम्बर जैन नरसिंगपुरा लाल मंदिर में हुए इस कार्यक्रम का केंद्र भगवान आदिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के साथ पार्श्वनाथ भगवान और मानभद्र बाबा की आरती रही। दसलक्षण पर्व के अवसर पर आयोजित आरती ने समाज के सदस्यों को एक साथ धर्म आराधना का अवसर दिया। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे आरती संपन्न होने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
