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11 जुलाई 2026 का आखिरी विवाह मुहूर्त: 4 माह तक शुभ कार्यों पर रोक, जानें नवंबर में कब बजेगी शहनाई

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Published On: 10 July 2026
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आखिरी विवाह मुहूर्त 2026 आज 11 जुलाई को है। इसके बाद चार माह तक विवाह, गृह प्रवेश और देव प्रतिष्ठा जैसे शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। जानें गुरु अस्त, हरिशयन, श्राद्ध पक्ष, शुक्र अस्त और नवंबर-दिसंबर के नए विवाह मुहूर्त।

आखिरी विवाह मुहूर्त 2026

मुरैना। आखिरी विवाह मुहूर्त 2026 आज 11 जुलाई (शनिवार) को है। आज के बाद लगभग चार माह तक विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम रहेगा। हालांकि 22 जुलाई को भड़ली नवमी के अवसर पर लोक परंपरा के अनुसार अबूझ मुहूर्त में सीमित विवाह संपन्न होंगे।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन के अनुसार पंचांग के अनुसार आज इस सीजन का अंतिम विवाह मुहूर्त है। इसके बाद नवंबर में पुनः शुभ विवाह मुहूर्त प्रारंभ होंगे।

क्यों लगेगी चार माह तक विवाह पर रोक?

इस अवधि में कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण एक साथ आ रहे हैं, जिनके चलते विवाह सहित मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है।

गुरु तारा अस्त

16 जुलाई से गुरु तारा अस्त होंगे और 9 अगस्त को उदय होंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु अस्त होने से तीन दिन पहले तथा उदय के तीन दिन बाद तक विवाह एवं शुभ कार्य नहीं किए जाते।

हरिशयन काल

25 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाएंगे। यह अवधि 20 नवंबर तक रहेगी। इस दौरान अधिकांश स्थानों पर विवाह नहीं होते।

श्राद्ध पक्ष

26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक महालय श्राद्ध पक्ष रहेगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, देव प्रतिष्ठा सहित सभी शुभ कार्य निषिद्ध माने जाते हैं।

शुक्र तारा अस्त

14 अक्टूबर से शुक्र तारा अस्त होगा और 28 अक्टूबर को उदय होगा। शुक्र अस्त से तीन दिन पहले और उदय के तीन दिन बाद तक भी विवाह मुहूर्त नहीं रहते।

धनु मलमास

16 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक धनु मलमास रहेगा। इस दौरान भी विवाह सहित मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।

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नवंबर और दिसंबर में कब होंगे विवाह मुहूर्त?

चार माह के विराम के बाद विवाह मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे—

नवंबर 2026

  • 21 नवंबर
  • 24 नवंबर
  • 25 नवंबर
  • 26 नवंबर

दिसंबर 2026

  • 2 दिसंबर
  • 3 दिसंबर
  • 11 दिसंबर
  • 12 दिसंबर

भड़ली नवमी का अबूझ मुहूर्त

22 जुलाई को भड़ली नवमी पर पंचांग के नियमित विवाह मुहूर्त नहीं होंगे, लेकिन लोकाचार एवं परंपरा के अनुसार इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए कई स्थानों पर विवाह संपन्न होंगे।

ज्योतिषाचार्य की सलाह

डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन ने बताया कि विवाह एवं अन्य मांगलिक कार्यों की तिथि तय करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से पंचांग के अनुसार मुहूर्त अवश्य देख लेना चाहिए। इससे शुभ फल प्राप्त होने की मान्यता है।

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