बरुआखार प्राथमिक शाला में मध्याह्न भोजन देर से परोसने का आरोप, जांच के निर्देश
दोपहर 1 बजे के निर्धारित समय के बजाय 3:30 बजे बच्चों को भोजन मिलने की शिकायत; जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षिका से जवाब मांगने की बात कही
शमशाबाद। बरखेड़ा जागीर के पास स्थित गांव बरुआखार की शासकीय प्राथमिक शाला में विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन देर से परोसे जाने का मामला सामने आया है। यह विद्यालय संकुल शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शमशाबाद के अंतर्गत आता है। शिकायत के अनुसार, विद्यार्थियों को दोपहर 1 बजे भोजन देने के निर्धारित समय के बजाय अपराह्न करीब 3:30 बजे भोजन परोसा गया। मामले को लेकर अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है और शिक्षा विभाग से जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
भोजन के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की शिकायत
स्थानीय लोगों के अनुसार, शाला में पढ़ने वाले छोटे बच्चों को भोजन के लिए निर्धारित समय पर व्यवस्था नहीं मिली। शिकायत में कहा गया है कि बच्चे दोपहर 1 बजे के बाद भी भोजन का इंतजार करते रहे और उन्हें करीब 3:30 बजे खाना दिया गया। इससे विद्यार्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन समय पर परोसने की व्यवस्था की निगरानी किस स्तर पर की जाती है और भोजन देर से मिलने की स्थिति क्यों बनी।
मध्याह्न भोजन विद्यार्थियों के लिए विद्यालय की दैनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को समय पर भोजन मिलना चाहिए और भोजन वितरण में देरी होने पर विद्यालय प्रबंधन को उसका कारण स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा विभाग से विद्यालय की भोजन व्यवस्था और उस दिन की उपस्थिति तथा भोजन वितरण संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
शिक्षिका से बातचीत को लेकर भी आपत्ति
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि जब पत्रकारों ने विद्यालय की शिक्षिका श्रीमती शिल्पा से भोजन देर से परोसे जाने के संबंध में सवाल किया, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “आपको जो खबर लगाना है लगा दीजिए, जो करना है कर लीजिए” और यह भी कहा कि उनके पति पत्रकार हैं। शिकायत में बातचीत के दौरान अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच के बाद ही बातचीत की परिस्थितियों और भोजन वितरण में देरी के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शिक्षा विभाग से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि वह संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करे।
ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग की
घटना की जानकारी के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे लंबे समय तक भूखे न रहें, इसके लिए विद्यालय में भोजन वितरण की व्यवस्था नियमित और समयबद्ध होनी चाहिए। ग्रामीणों ने अधिकारियों से यह जांचने की मांग की है कि भोजन देर से परोसे जाने के पीछे कोई प्रशासनिक कारण था या विद्यालय स्तर पर लापरवाही हुई।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि यदि भोजन वितरण में किसी कारण से देरी होती है, तो इसकी जानकारी अभिभावकों और संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए। उन्होंने विद्यालय में नियमित निरीक्षण और मध्याह्न भोजन व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने की मांग की है, ताकि ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति न हो।
जिला शिक्षा अधिकारी ने जवाब तलब करने की बात कही
जिला शिक्षा अधिकारी विदिशा एन.के. अहिरवार ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि संबंधित शिक्षिका श्रीमती शिल्पा से जवाब मांगा जाएगा और इस संबंध में तत्काल पत्र जारी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीआरसी को जांच के लिए संबंधित शिक्षिका को पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बीआरसी ने जांच का आश्वासन दिया
बीआरसी नटेरन ईश्वरी प्रसाद शर्मा ने भी मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार संबंधित शिक्षिका को पत्र जारी किया जा रहा है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। जांच में भोजन वितरण के समय, विद्यालय की व्यवस्था और संबंधित कर्मचारियों के पक्ष को शामिल किया जाएगा।
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से जवाब तलब करने और जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विद्यार्थियों को भोजन देर से मिलने के पीछे क्या कारण था और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। स्थानीय अभिभावकों ने उम्मीद जताई है कि विभाग मामले की जल्द जांच कर बच्चों के हित में आवश्यक कदम उठाएगा।
