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Karwa Chauth 2026: शुक्र उदय के बाद पहली बार करवा चौथ व्रत रख सकती हैं महिलाएं? जानें शास्त्रीय नियम

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Published On: 27 October 2026
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करवा चौथ 2026 पर शुक्र उदय और बाल्यावस्था को लेकर संशय। पंडित तेज प्रसाद भट्ट ने बताया पहली बार व्रत रखने वाली और पहले से व्रत कर रही महिलाओं के लिए शास्त्रीय मान्यताएं।

करवा चौथ 2026: शुक्र उदय के बाद प्रथम व्रत को लेकर संशय, पंडित तेज प्रसाद भट्ट ने बताए शास्त्रीय नियम

पहले से व्रत कर रही महिलाएं परंपरा अनुसार रखें व्रत, नवविवाहिताएं प्रथम संकल्प से पहले स्थानीय पंचांग और विद्वानों से लें मार्गदर्शन

दैनिक स्वराज वाणी | ताल।

करवा चौथ व्रत को लेकर शुक्र के अस्त, उदय और बाल्यावस्था संबंधी शास्त्रीय मान्यताओं पर महिलाओं के बीच उत्पन्न संशय को लेकर पंडित तेज प्रसाद भट्ट, ताल ने धार्मिक परंपराओं के आधार पर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि नए व्रत का प्रथम संकल्प और पहले से किए जा रहे व्रत की निरंतरता को अलग-अलग समझना आवश्यक है।

पंडित भट्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में 29 अक्टूबर को शुक्र उदित रहने की ज्योतिषीय गणना बताई जा रही है। हालांकि, शुक्र की बाल्यावस्था और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत संबंधी निर्णय लेना उचित होगा।

नवविवाहिताएं प्रथम व्रत से पहले समझें नियम

पंडित भट्ट ने बताया कि कुछ धर्मशास्त्रीय एवं मुहूर्त ग्रंथों में शुक्र के अस्त तथा बाल्य और वृद्धावस्था के दौरान नए काम्य व्रत के आरंभ एवं उद्यापन से बचने का उल्लेख मिलता है।

ऐसे में पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को स्थानीय पंचांग, पारिवारिक परंपरा और योग्य धर्मविद् के मार्गदर्शन के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।

पहले से व्रत कर रही महिलाओं के लिए क्या है विधान?

पंडित भट्ट के अनुसार, जो महिलाएं वर्षों से करवा चौथ का व्रत करती आ रही हैं, उनके लिए व्रत की निरंतरता का अलग महत्व है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पहले से आरंभ किए गए व्रत को केवल शुक्र के पूर्व अस्त होने के कारण छोड़ना आवश्यक नहीं माना जाता। महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना एवं चंद्र दर्शन कर सकती हैं।

शुक्र की बाल्यावस्था का भी रखें ध्यान

पंडित भट्ट ने बताया कि शुक्र के उदय के साथ उसकी बाल्यावस्था का विचार भी कुछ मुहूर्त ग्रंथों में किया जाता है। इसलिए केवल शुक्र उदय की जानकारी के आधार पर प्रथम व्रत का निर्णय लेने के बजाय प्रमाणित पंचांग से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि अधूरी जानकारी के कारण भ्रमित न हों और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए अपने नगर के चंद्रोदय समय के अनुसार पूजन करें।

 

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