गिरिराज तीर्थ पर मंदिरों की रक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों की अनुमोदना करें: हार्दिक हुंडिया
वृक्षारोपण के उद्देश्य से बनाए गए अस्थायी रास्तों को लेकर फैली भ्रांतियों पर दिया स्पष्टीकरण, श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी के कार्यों में सहयोग करने की अपील
धार्मिक संवाददाता। जैन धर्म के पवित्र तीर्थ गिरिराज की सुरक्षा और वहां स्थित प्राचीन जैन मंदिरों के संरक्षण को लेकर हार्दिक हुंडिया ने श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी के कार्यों की सराहना करते हुए समाज के लोगों से सहयोग और सहकार देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गिरिराज तीर्थ की रक्षा के लिए पेढ़ी द्वारा लंबे समय से किए जा रहे कार्य सराहनीय हैं। ऐसे में किसी भी कार्य की वास्तविकता जाने बिना उसका विरोध करना उचित नहीं है। समाज के लोगों को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले यह समझना चाहिए कि कार्य किस उद्देश्य से किया जा रहा है और इससे तीर्थ को भविष्य में क्या लाभ मिलेगा।
गिरिराज तीर्थ की सुरक्षा में पेढ़ी का महत्वपूर्ण योगदान
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी केवल गिरिराज के पर्वतीय क्षेत्र की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि अनेक जैन तीर्थों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। पेढ़ी से जुड़े ट्रस्ट मंडल के सदस्य तीर्थों पर किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तन, मन और धन से सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं।
उन्होंने श्री सवेंगभाई लालभाई, श्री सुधीरभाई मेहता, श्री श्रीपालभाई सहित ट्रस्ट मंडल के अन्य सदस्यों के योगदान की अनुमोदना करते हुए कहा कि वर्षों से निःस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले इन महानुभावों के कार्यों को समझना आवश्यक है। ऐसे सेवाभावी लोगों के प्रयासों को प्रोत्साहित करना समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि गिरिराज जैसे पवित्र तीर्थ की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी विषय सामने आने पर भावनाओं में बहकर प्रतिक्रिया देने के बजाय तथ्यों को समझना चाहिए। तीर्थों की रक्षा के लिए समर्पित संस्थाओं के कार्यों का मूल्यांकन सही जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।
वृक्षारोपण के लिए बनाए गए थे रास्ते
हार्दिक हुंडिया के अनुसार, कुछ समय पहले गिरिराज तीर्थ पर रास्ते बनाने और भारी मशीनरी के उपयोग को लेकर वीडियो और संदेश प्रसारित हुए थे। इनके माध्यम से कुछ लोगों ने आशंका जताई थी कि पर्वतीय क्षेत्र में पेड़ों को काटकर रास्ते बनाए जा रहे हैं, ताकि वहां वाहनों की आवाजाही हो सके।
उन्होंने कहा कि इस तरह की चर्चाओं के बीच यह जानने का प्रयास किया जाना चाहिए था कि रास्ते बनाने का वास्तविक उद्देश्य क्या है। किसी भी कार्य का विरोध करने से पहले संबंधित संस्था से जानकारी प्राप्त करना और उसके पक्ष को समझना आवश्यक है।
हार्दिक हुंडिया ने बताया कि श्री सवेंगभाई की ओर से 30 सितंबर 2026 को पत्र के माध्यम से यह स्पष्टीकरण दिया गया था कि गिरिराज पर रास्ते केवल वृक्षारोपण के कार्य को पूरा करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। उनके अनुसार, वृक्षारोपण का कार्य पूरा होने के बाद इन रास्तों को बंद कर दिया जाएगा।
उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि इस विषय को समझते समय संबंधित पत्र और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखा जाए, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी के कारण धार्मिक संस्थाओं के प्रति अनावश्यक विरोध की स्थिति उत्पन्न न हो।
वृक्षारोपण से भविष्य में तीर्थ को मिल सकता है लाभ
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि गिरिराज के पर्वतीय क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान मिट्टी और धूल के नीचे की ओर बहने की समस्या चिंता का विषय हो सकती है। उनके अनुसार, ऊपरी हिस्सों में पर्याप्त वृक्षों का अभाव होने पर मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है। इससे पर्वतीय क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन के साथ-साथ वहां स्थित जैन मंदिरों की सुरक्षा को लेकर भी भविष्य में चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
उन्होंने वृक्षारोपण को इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताते हुए कहा कि पौधों के विकसित होने और उनकी जड़ें मजबूत होने के बाद मिट्टी को बांधे रखने में सहायता मिल सकती है। इससे मिट्टी के कटाव को कम करने और पर्वतीय क्षेत्र के पर्यावरण संरक्षण में लाभ मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यों का उद्देश्य केवल वर्तमान परिस्थितियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि भविष्य में तीर्थ की सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी प्रयास किए जाने चाहिए। हालांकि, ऐसे कार्यों की सफलता के लिए उचित योजना, पर्यावरणीय सावधानी और पौधों की नियमित देखभाल भी आवश्यक है।

विरोध करने के बजाय तथ्यों को समझने की अपील
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी के कार्यों का विरोध करने के बजाय समाज के लोगों को संस्था के साथ मिलकर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों से अपील की, जो गिरिराज तीर्थ पर किए जा रहे कार्यों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, कि वे पहले वास्तविक स्थिति को समझें और फिर अपनी राय बनाएं।
उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि किसी कार्य को लेकर कोई शंका या आपत्ति है, तो उसका समाधान संवाद, जानकारी और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। इससे समाज में अनावश्यक विवाद से बचा जा सकता है और तीर्थ संरक्षण के प्रयासों को भी उचित दिशा मिल सकती है।
सम्मेद शिखरजी की परिस्थितियों का भी अध्ययन करने की अपील
हार्दिक हुंडिया ने अपनी प्रवर समिति से भी विनम्र निवेदन किया कि श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी के कार्यों का विरोध करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को समाज के सामने रखा जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि समिति को जैन तीर्थों की सुरक्षा और संरक्षण की इतनी चिंता है, तो उसे सम्मेद शिखरजी जाकर वहां की परिस्थितियों का अध्ययन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जैन धर्म के विभिन्न तीर्थों की समस्याओं को समझना और उनके संरक्षण के लिए ठोस प्रयास करना आवश्यक है। समाज के प्रतिनिधियों और संबंधित समितियों को ऐसे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए, जहां उनकी भागीदारी से तीर्थों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।
पेढ़ी के सेवाभावी कार्यों की अनुमोदना करें
अपने संदेश के अंत में हार्दिक हुंडिया ने जैन समाज से आग्रह किया कि गिरिराज तीर्थ के संरक्षण के लिए वर्षों से कार्य कर रही श्री आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी और उसके सेवाभावी सदस्यों के प्रयासों की अनुमोदना की जाए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के कार्यों को लेकर मतभेद होने पर भी संवाद और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए। तीर्थों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और प्राचीन मंदिरों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
हार्दिक हुंडिया ने उच्च भावनाओं के साथ पेढ़ी के कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाज से अपील की कि वह तथ्यों को समझे, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए और जैन तीर्थों के संरक्षण में अपना योगदान दे।
— हार्दिक हुंडिया, कल्याणी मित्र
