ग्वालियर मंदिर हादसा: नो-एंट्री में कैसे पहुंचा ट्रक? Google Maps और चालक के नशे में होने के पहलू की जांच
धान से भरा ट्रक शीतला माता मंदिर के पास श्रद्धालुओं की भीड़ में घुसा; हादसे में 15 लोगों की मौत, चालक और मालिक गिरफ्तार
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे की जांच में कई अहम सवाल सामने आए हैं। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि धान से लदा ट्रक भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित रास्ते पर कैसे पहुंचा। शुरुआती जानकारी में आशंका जताई गई है कि चालक ने Google Maps पर सुझाए गए छोटे रास्ते का इस्तेमाल किया। चालक के नशे में होने की आशंका की भी जांच की जा रही है; इसे लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
हादसा रविवार तड़के करीब डेढ़ बजे चीनौर रोड पर हुआ। नवरात्र के अवसर पर शीतला माता मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान ढलान वाले रास्ते पर ट्रक बेकाबू हो गया और भीड़ में जा घुसा। हादसे में 15 लोगों की मौत हुई और 26 से अधिक लोग घायल हुए। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।
डबरा मंडी से धान लेकर जा रहा था ट्रक
पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, ट्रक डबरा मंडी से धान लेकर पंजाब की ओर जा रहा था। चालक इस क्षेत्र से परिचित नहीं था। जांच में यह आशंका सामने आई कि उसने मोबाइल पर Google Maps की मदद से रास्ता खोजा और ऐसा मार्ग चुन लिया जो मंदिर की ओर जाता था। यह रास्ता भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित बताया गया है।
हालांकि, पुलिस ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि ट्रक Google Maps के बताए रास्ते की वजह से ही नो-एंट्री क्षेत्र में पहुंचा। हादसे की जांच में ट्रक का वास्तविक मार्ग, रास्ते में लगे संकेतक और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश के हालात की पड़ताल की जा रही है।
ढलान पर बेकाबू होकर भीड़ में घुसा वाहन
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के आधार पर बताया गया कि ट्रक ढलान पर नियंत्रण से बाहर हो गया। पुलिस ब्रेक फेल होने या समय पर ब्रेक नहीं लग पाने की आशंका की भी जांच कर रही है। ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता हुआ आगे बढ़ा और मंदिर के प्रवेश द्वार तथा बाहरी दीवार से टकरा गया। टक्कर से दीवार का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और कुछ लोग मलबे में दब गए।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत-बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए। घायलों की संख्या अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में अलग बताई गई है।
चालक के नशे में होने की भी जांच
हादसे के बाद चालक की स्थिति और उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं। पुलिस यह पता लगा रही है कि दुर्घटना के समय चालक शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ के प्रभाव में तो नहीं था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, चालक हादसे के बाद घटनास्थल से चला गया था और बाद में उसे गिरफ्तार किया गया। उसके नशे में होने की बात फिलहाल जांच का विषय है, इसलिए इसे हादसे का पुष्ट कारण नहीं माना जा सकता।
जांच में चालक से यह भी पूछा जा रहा है कि उसने प्रतिबंधित मार्ग क्यों चुना, ट्रक की रफ्तार कितनी थी और वाहन के ब्रेक की स्थिति कैसी थी। ट्रक मालिक को भी गिरफ्तार किया गया है। वाहन की तकनीकी जांच से ब्रेक और दूसरे यांत्रिक पहलुओं के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
बैरिकेडिंग के बावजूद नो-एंट्री में पहुंचा ट्रक
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और मृतकों के परिजनों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मंदिर क्षेत्र में नवरात्र के दौरान वाहनों की आवाजाही सीमित थी और मार्ग पर बैरिकेडिंग तथा पुलिस चेक-प्वाइंट होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद भारी वाहन प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि ट्रक को रास्ते में रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी और चेक-प्वाइंट पर तैनात अमले ने क्या कार्रवाई की। जांच में मार्ग पर यातायात प्रबंधन, बैरिकेडिंग और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
हादसे के बाद प्रशासन ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र के सीएसपी को हटाया गया और आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जांच में दुर्घटना के कारणों, ट्रक के प्रतिबंधित मार्ग में प्रवेश और संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में Google Maps, वाहन की तकनीकी खराबी, चालक की लापरवाही या सुरक्षा व्यवस्था में चूक की कितनी भूमिका थी। फिलहाल चालक और मालिक पुलिस हिरासत में हैं तथा मामले की जांच जारी है।
