दशहरे पर सूरज प्रताप सिंह और गौरव बाजपेयी ने साझा किए अपने विचार, बताया क्यों खास है यह त्योहार
बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ खुद में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश, कलाकारों ने अपनी आदतों को सुधारने का लिया संकल्प
मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश, अक्टूबर 2026। दशहरा केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन करने, अपनी कमियों को पहचानने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी है। यह पर्व हमें अपनी बुरी आदतों को छोड़कर दया, प्रेम, सच्चाई और सकारात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा देता है। इसी संदेश को साझा करते हुए सन नियो के लोकप्रिय शो दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी में प्रेम की भूमिका निभा रहे सूरज प्रताप सिंह और थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान में अभिजीत का किरदार निभा रहे गौरव बाजपेयी ने बताया कि उनके लिए दशहरा क्यों खास है और इस अवसर पर वे अपनी किन आदतों को बदलना चाहते हैं।
सूरज प्रताप सिंह ने बताया गलतियों से सीखने का महत्व
शो दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी में प्रेम का किरदार निभा रहे सूरज प्रताप सिंह के लिए दशहरा अच्छाई, सच्चाई और प्रेम की शक्ति को याद करने का अवसर है। उनका मानना है कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए दया और सच्चाई जैसे गुण बेहद महत्वपूर्ण हैं।
अपने विचार साझा करते हुए सूरज प्रताप सिंह ने कहा कि बच्चों के साथ काम करने से उन्हें जीवन को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला है। बच्चों की मासूमियत, उम्मीद और उत्साह उन्हें छोटी-छोटी खुशियों का महत्व समझाते हैं। उनके अनुसार, बच्चे हर परिस्थिति में कुछ अच्छा देखने की कोशिश करते हैं, जिससे जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
इस दशहरे पर सूरज प्रताप सिंह खुद से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखने और अपनी गलतियों के लिए खुद को दोष देने की आदत छोड़ना चाहते हैं। उनका मानना है कि गलतियां जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं और उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। हर गलती हमें कुछ नया सिखाती है और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देती है। उनके लिए दशहरा आत्मस्वीकृति, सीखने और सकारात्मक बदलाव की शुरुआत करने का पर्व है।
गौरव बाजपेयी ने सकारात्मक सोच अपनाने पर दिया जोर
शो थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान में अभिजीत की भूमिका निभा रहे गौरव बाजपेयी के लिए दशहरा सकारात्मकता, पारिवारिक खुशियों और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। उन्हें अपने परिवार के साथ त्योहार मनाना, अपनों के साथ समय बिताना और खुशियां साझा करना बेहद पसंद है।
गौरव बाजपेयी ने बताया कि इस दशहरे पर वे हर बात को जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत को छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि काम को लेकर अधिक सोचने और बेवजह चिंतित रहने के कारण कई बार वर्तमान पल का आनंद लेना मुश्किल हो जाता है।
गौरव के अनुसार, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत करना जरूरी है, लेकिन अनावश्यक चिंताओं में उलझे रहना हमारी खुशियों और मानसिक शांति को प्रभावित कर सकता है। इसलिए वे इस दशहरे पर बेवजह की चिंताओं को पीछे छोड़कर सकारात्मक सोच अपनाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य जीवन में शांति, संतुलन और खुशियों को अधिक महत्व देना है।
दशहरा देता है खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा
सूरज प्रताप सिंह और गौरव बाजपेयी के विचार इस बात को रेखांकित करते हैं कि दशहरे का संदेश केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं है। यह पर्व हमें अपने भीतर झांकने, नकारात्मक आदतों को पहचानने और जीवन में अच्छे गुणों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
जहां सूरज प्रताप सिंह अपनी गलतियों को स्वीकार कर उनसे सीखने और खुद के प्रति अधिक सहज रहने का संकल्प लेते हैं, वहीं गौरव बाजपेयी अनावश्यक चिंताओं को छोड़कर वर्तमान में जीने और सकारात्मकता अपनाने पर जोर देते हैं। दोनों कलाकारों के लिए दशहरा खुद को बेहतर बनाने और जीवन में खुशियों को महत्व देने का अवसर है।
सन नियो पर देखें दोनों लोकप्रिय शो
दर्शक सूरज प्रताप सिंह को शो दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी में प्रेम की भूमिका में देख सकते हैं। यह शो हर सोमवार से शनिवार शाम 7 बजे प्रसारित होता है। वहीं, गौरव बाजपेयी अभिनीत शो थोड़ी सी उम्मीद, थोड़ा सा आसमान शाम 7:30 बजे प्रसारित होता है। दोनों शो केवल सन नियो पर देखे जा सकते हैं।
इस दशहरे पर दोनों कलाकारों का संदेश है कि सच्चा बदलाव अपने भीतर से शुरू होता है। अपनी कमियों को स्वीकार करना, दूसरों के प्रति दयालु रहना, सकारात्मक सोच अपनाना और अपनों के साथ खुशियां बांटना ही त्योहार की भावना को सार्थक बनाता है।
