नगर में नौ दिवसीय नवपद ओलीजी आराधना का शुभारंभ
चातुर्मास हेतु विराजित साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी की निश्रा में रविवार से शुरू होगी आराधना; नौ दिन तक आयंबिल तप करेंगे श्रावक-श्राविकाएँ
महिदपुर रोड। नगर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा की पावन निश्रा में रविवार से नवपद ओली की आराधना प्रारंभ हो रही है। इसमें नगर के अनेक श्रावक-श्राविकाएँ जुड़कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
क्या है नवपद ओली और आयंबिल तप
इस आराधना में आराधक को गर्म पानी के आधार पर नौ दिन तक अलुणा, यानी बिना तेल, मिर्च और मसाले का, दिन में एक समय बैठकर भोजन करना होता है। जैन धर्म में इसे आयंबिल तप कहा जाता है।
नौ पदों की आराधना
नौ दिनों तक जप-तप के साथ विधि-विधानपूर्वक नवपद की आराधना की जाती है। ये नौ पद हैं: अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप। जैन धर्म में इस आराधना का अत्यधिक महत्व माना गया है।
श्रीपाल-मैना सुंदरी की कथा
जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि वर्षों पूर्व उज्जैन में श्रीपाल और मैना सुंदरी ने नवपद ओलीजी की आराधना की थी, जिससे श्रीपाल का कोढ़ (कुष्ठ रोग) दूर हो गया था। उन्होंने इसे अत्यंत प्रभावशाली और सर्वसिद्धिदायक आराधना बताया।
