इंदौर के 22 जोन में जलसंकट की आहट, 361 ट्यूबवेल बंद; 200 नए खोदने की तैयारी
सामान्य से 14 इंच कम बारिश के बाद भूजल को लेकर बढ़ी चिंता, नगर निगम ने 100 ट्यूबवेल के लिए बुलाए टेंडर
इंदौर। गर्मी शुरू होने से पहले ही शहर में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में कुल 6,040 ट्यूबवेल हैं, जिनमें से 361 फिलहाल बंद हो चुके हैं। शहर की जरूरतों को देखते हुए करीब 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 ट्यूबवेल के लिए नगर निगम ने टेंडर आमंत्रित किए हैं।
शहर के 22 जोन में पानी की समस्या सामने आई है। कुछ इलाकों में लोग अभी से टैंकर बुलवाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। कम बारिश और बंद जलस्रोतों के कारण आने वाले महीनों में जलप्रदाय बनाए रखना नगर निगम के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में नए ट्यूबवेल की खुदाई के साथ-साथ मौजूदा जलस्रोतों को चालू रखने पर भी ध्यान देना होगा।
शहर में 361 ट्यूबवेल बंद
नगर निगम के सर्वे में शहर के ट्यूबवेलों की स्थिति का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कुल 6,040 ट्यूबवेल में से 361 बंद हैं। इनके बंद होने से संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय जलस्रोतों की संख्या कम हुई है। जिन इलाकों में ट्यूबवेलों पर निर्भरता अधिक है, वहां जलप्रदाय पर दबाव बढ़ सकता है।
बंद ट्यूबवेलों को फिर से चालू करने की संभावना और उनकी स्थिति की जांच भी जरूरी होगी। यदि किसी ट्यूबवेल की मरम्मत से उसे दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, तो इससे नए जलस्रोतों पर निर्भरता कम हो सकती है। वहीं, जिन स्रोतों को चालू करना संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी।
22 जोन में सामने आई पानी की समस्या
शहर के 22 जोन में जलसंकट से जुड़ी शिकायतें या परेशानी सामने आने की बात रिपोर्ट में बताई गई है। कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों के जरिए पानी मंगवा रहे हैं। यह स्थिति संकेत देती है कि स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता सभी जगह समान नहीं है और कुछ इलाकों में लोगों को अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।
गर्मी के दौरान पानी की मांग बढ़ने पर ऐसी परेशानी और गंभीर हो सकती है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों की जरूरत का आकलन कर वहां जलप्रदाय की योजना बनाना जरूरी होगा। टैंकरों से पानी पहुंचाना तत्काल राहत दे सकता है, लेकिन नियमित और पर्याप्त जलप्रदाय के लिए जलस्रोतों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता बनी रहेगी।
सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश
इस बार इंदौर में सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश दर्ज होने की जानकारी दी गई है। कम बारिश का असर भूजल स्तर और ट्यूबवेलों की उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में नए ट्यूबवेल खोदने की योजना के साथ यह भी देखना होगा कि संबंधित क्षेत्रों में भूजल कितना उपलब्ध है और नया स्रोत कितने समय तक पानी दे सकेगा।
कम बारिश के बाद जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने की आशंका के चलते पानी का उपयोग संभलकर करने की जरूरत भी सामने आती है। नगर निगम के सामने एक ओर प्रभावित इलाकों में पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना होगा।
100 ट्यूबवेल के लिए टेंडर आमंत्रित
शहर की जरूरतों को देखते हुए करीब 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। पहले चरण में 100 ट्यूबवेल के लिए टेंडर बुलाए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और काम शुरू होने के बाद नए जलस्रोत विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ेगा। शेष 100 ट्यूबवेल को लेकर आगे की योजना भी शहर की जरूरत, क्षेत्रवार स्थिति और उपलब्ध भूजल के आकलन पर निर्भर करेगी।
नए ट्यूबवेल खोदने के साथ बंद ट्यूबवेलों की स्थिति की समीक्षा करना भी महत्वपूर्ण रहेगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन क्षेत्रों में मरम्मत, नए स्रोत या टैंकरों के जरिए आपूर्ति की जरूरत है। स्थानीय जलप्रदाय की निगरानी और समय पर शिकायतों का निराकरण भी नागरिकों को राहत देने में सहायक हो सकता है।
जलप्रदाय बनाए रखना निगम के सामने चुनौती
आने वाले समय में शहर की जरूरत पूरी करने के लिए नगर निगम को नए और पुराने जलस्रोतों के बीच संतुलन बनाना होगा। 200 नए ट्यूबवेल की आवश्यकता का आकलन और 100 के लिए टेंडर प्रक्रिया इसी दिशा में उठाया गया कदम है। हालांकि, कम बारिश को देखते हुए भूजल की उपलब्धता पर नजर रखना भी जरूरी होगा।
शहर के जिन इलाकों में लोग अभी टैंकरों से पानी मंगवा रहे हैं, वहां नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता रहेगी। गर्मी से पहले जलस्रोतों की स्थिति, ट्यूबवेलों की कार्यक्षमता और क्षेत्रवार मांग की समीक्षा से नगर निगम को आगामी जलप्रबंधन की तैयारी करने में मदद मिल सकती है।
