नए वॉलीबॉल संगठन की मान्यता पर सवाल, कार्तिकेय चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद विवाद गहराया, खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर चिंता
अधिकृत मान्यता के दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग; पहले से संचालित एमेच्योर एसोसिएशन की भूमिका अहम
Anuppur। मध्यप्रदेश वॉलीबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर कार्तिकेय चौहान के निर्वाचन के बाद नए संगठन की मान्यता और अधिकृत संबद्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 11 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद विवाद का केंद्र यह है कि क्या इस संगठन को भारतीय वॉलीबॉल फेडरेशन, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ और मध्यप्रदेश शासन के खेल विभाग से अधिकृत मान्यता प्राप्त है। यदि निर्धारित मान्यता नहीं है, तो उसके माध्यम से होने वाली खेल गतिविधियों, खिलाड़ियों के पंजीयन और प्रतियोगिताओं में भागीदारी की वैधता पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
“मान्यता का जवाब दस्तावेजों से मिले”
अनूपपुर जिला वॉलीबॉल संघ के प्रवक्ता संदीप कुमार गर्ग ने कहा कि किसी भी खेल संगठन की पहचान केवल उसके पंजीयन, पदाधिकारियों के निर्वाचन या बड़े नामों से तय नहीं होती। उनके अनुसार असली कसौटी अधिकृत मान्यता, नियमसम्मत कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों के हितों की रक्षा है। उन्होंने कहा कि नए संगठन की मान्यता को लेकर उठ रहे सवालों का उत्तर संबंधित दस्तावेजों के माध्यम से दिया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश के खिलाड़ियों और जिला इकाइयों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।
हरि सिंह चौहान ने उठाए नए संगठन की वैधता पर सवाल
वॉलीबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व कोषाध्यक्ष और मध्यप्रदेश (ए) वॉलीबॉल एसोसिएशन के पूर्व सचिव हरि सिंह चौहान ने दावा किया है कि कार्तिकेय चौहान जिस संगठन के अध्यक्ष चुने गए हैं, उसे भारतीय वॉलीबॉल फेडरेशन, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ और राज्य शासन के खेल विभाग से मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने संस्था की वैधता से संबंधित न्यायालयीन प्रकरण लंबित होने की बात भी कही।
हरि सिंह चौहान के अनुसार, फर्म्स एवं सोसायटी में संस्था का पंजीयन होना और संबंधित खेल की अधिकृत राज्य इकाई के रूप में मान्यता मिलना दो अलग-अलग विषय हैं। उनका कहना है कि नए संगठन के पदाधिकारियों को बताना चाहिए कि उनकी संस्था को किस सक्षम खेल निकाय से मान्यता मिली, संबद्धता का आधार क्या है और चुनाव किस नियमावली के तहत कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में सामने आता है कि संगठन बिना आवश्यक मान्यता के अधिकृत राज्य इकाई के रूप में काम कर रहा है, तो सक्षम प्राधिकरण को नियमानुसार कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।
एमेच्योर एसोसिएशन और संबद्ध जिला इकाइयों की स्थिति
प्रदेश में पहले से संचालित मध्यप्रदेश वॉलीबॉल एमेच्योर एसोसिएशन की भूमिका इस विवाद में विशेष महत्व रखती है। संबंधित पक्षों के अनुसार, यह एसोसिएशन लंबे समय से प्रदेश में वॉलीबॉल गतिविधियाँ संचालित कर रहा है और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है। अनूपपुर सहित जिन जिला इकाइयों की संबद्धता इस संगठन से है, उनके लिए अधिकृत संगठनात्मक व्यवस्था और खिलाड़ियों की प्रतियोगिताओं में निरंतर भागीदारी बेहद जरूरी है।
ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि प्रदेश में वॉलीबॉल की अधिकृत राज्य इकाई कौन-सी है और दोनों संगठनों की मान्यता व संबद्धता की वास्तविक स्थिति क्या है। पहले से मान्यता प्राप्त संगठन से जुड़ी जिला इकाइयों की स्थिति को केवल नए संगठन के गठन या पदाधिकारियों की घोषणा के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे विवादों का समाधान फेडरेशन और सक्षम प्राधिकरणों के आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर ही होना चाहिए, ताकि जिला संघ, प्रशिक्षक और खिलाड़ी तय कर सकें कि उन्हें किस अधिकृत व्यवस्था के तहत गतिविधियाँ जारी रखनी हैं।
राजनीतिक पहचान से अलग, दस्तावेजों पर हो बात
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान के अध्यक्ष बनने के बाद इस मामले पर चर्चा तेज हुई है। हालाँकि किसी व्यक्ति की राजनीतिक या पारिवारिक पृष्ठभूमि अपने आप में संगठन की मान्यता का प्रमाण नहीं होती। मान्यता का निर्धारण संबंधित नियमों, सक्षम संस्थाओं के निर्णयों और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही होना चाहिए।
इसलिए नए संगठन के पदाधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे मान्यता प्रमाणपत्र, अधिकृत संबद्धता के दस्तावेज, निर्वाचन प्रक्रिया के अभिलेख और संस्था की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करें। इससे तथ्यों की जांच हो सकेगी और खिलाड़ियों को किसी अपुष्ट दावे के आधार पर निर्णय लेने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
खिलाड़ियों के हितों से समझौता नहीं
वॉलीबॉल में संगठनात्मक मान्यता का सीधा संबंध खिलाड़ियों के पंजीयन, चयन प्रक्रिया, राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व से हो सकता है। अनूपपुर जैसे सीमावर्ती जिले के खिलाड़ियों के लिए यह जरूरी है कि उन्हें प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और आगे बढ़ने के अवसरों को लेकर स्पष्ट दिशा मिलती रहे।
संदीप कुमार गर्ग ने माँग की कि भारतीय वॉलीबॉल फेडरेशन, मध्यप्रदेश ओलंपिक संघ और खेल विभाग नए संगठन की मान्यता तथा चुनाव प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करें। साथ ही मध्यप्रदेश वॉलीबॉल एमेच्योर एसोसिएशन की अधिकृत स्थिति और उससे संबद्ध जिला इकाइयों के अधिकार भी आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर साफ किए जाएँ। उन्होंने कहा कि यदि जांच में नए संगठन के पास आवश्यक मान्यता न होने की पुष्टि होती है, तो सक्षम प्राधिकरण को नियमानुसार उचित कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उनके अनुसार खेल संगठनों के बीच किसी भी विवाद का असर खिलाड़ियों के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए, और इस पूरे मामले में निर्णायक भूमिका आधिकारिक दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकरणों के स्पष्ट निर्णय की ही होगी।
