शिवपुरी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बीच में रुकी, जेसीबी लौट गई — दैनिक स्वराज वाणी
मामा टावर-शंकर कॉलोनी में वाहन हटवाने के बाद नहीं चला बुलडोजर; मदाखलत प्रभारी के शोरूम के अंदर बैठने पर उठे सवाल
संवाददाता: फूलचंद मालवीय, देवास, मध्य प्रदेश
शिवपुरी। शहर के मामा टावर और शंकर कॉलोनी क्षेत्र में गुरुवार दोपहर अतिक्रमण हटाने पहुंचा नगर पालिका का मदाखलत अमला बिना कार्रवाई किए लौट गया। दोपहर करीब 2:30 बजे टीम के साथ जेसीबी मशीन भी मौके पर पहुंची थी। सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटवाने के बाद लोगों को अतिक्रमण पर कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन कुछ देर बाद अभियान रुक गया। जेसीबी नाले के किनारे खड़ी रही और टीम वापस लौट गई।
इस घटनाक्रम के बाद नगर पालिका की कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने की योजना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अमले के पहुंचने पर शुरुआत में कार्रवाई की तैयारी दिखाई दे रही थी। कर्मचारियों ने सड़क पर खड़े वाहन हटवाए और जेसीबी बुलवाई। इससे क्षेत्र में हलचल बढ़ गई और लोगों को लगा कि सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण और निर्माणों पर कार्रवाई होगी।
वाहन हटवाए, फिर भी नहीं हुई तोड़फोड़
मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने पहले सड़क पर खड़े वाहनों को हटवाना शुरू किया। इसके बाद जेसीबी मशीन भी वहां लाई गई। कार्रवाई की तैयारी देखकर आसपास के दुकानदारों और रहवासियों में चर्चा शुरू हो गई कि सड़क के दोनों ओर किए गए अतिक्रमण हटाए जाएंगे। हालांकि, कुछ समय बाद अभियान आगे नहीं बढ़ा। जेसीबी मौके पर मौजूद रही, लेकिन किसी निर्माण को हटाने की कार्रवाई नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई प्रस्तावित थी, तो अमले को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए था कि किन स्थानों पर और किस आधार पर अतिक्रमण हटाया जाना है। वहीं यदि केवल वाहनों को हटवाना ही उद्देश्य था, तो जेसीबी बुलाने और अभियान जैसा माहौल बनने की वजह भी स्पष्ट होनी चाहिए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, करीब आधे घंटे तक टीम की मौजूदगी के बाद अमला बिना ठोस कार्रवाई के लौट गया।
फोन पर बातचीत के बाद बदला घटनाक्रम?
कार्रवाई रुकने को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हैं। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया कि अभियान के दौरान किसी व्यक्ति से फोन पर बातचीत हुई, जिसके बाद टीम का रुख बदल गया। हालांकि, फोन किसका था, बातचीत किससे हुई और कार्रवाई रोकने का कोई निर्देश दिया गया था या नहीं—इसकी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
ऐसे में कार्रवाई के अचानक रुकने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। नगर पालिका प्रशासन की ओर से इस घटनाक्रम पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फोन पर बातचीत को लेकर लगाए जा रहे दावों को पुष्टि के बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मदाखलत प्रभारी के शोरूम में बैठने पर चर्चा
मौके पर मदाखलत प्रभारी अशोक खरे के एक शोरूम के भीतर बैठने को लेकर भी चर्चा हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की बात थी, उसी दौरान प्रभारी शोरूम के अंदर चले गए और जेसीबी नाले के किनारे खड़ी रही। कुछ लोगों ने इस स्थिति को कार्रवाई रुकने से जोड़कर सवाल उठाए।
हालांकि, शोरूम के स्वामित्व, वहां मौजूद निर्माण की वैधानिक स्थिति और प्रभारी के वहां बैठने के कारण को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं है। इसलिए इन पहलुओं पर नगर पालिका प्रशासन का स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्रवाई किस निर्माण के लिए प्रस्तावित थी और उसे रोकने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल
घटनाक्रम के बाद शहरवासियों ने पूछा कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की तैयारी नहीं थी, तो मदाखलत अमले और जेसीबी को मौके पर क्यों भेजा गया। वहीं अगर कार्रवाई तय थी, तो उसे बीच में रोकने का कारण क्या रहा? लोगों का कहना है कि सरकारी मशीनरी और संसाधनों का उपयोग स्पष्ट योजना के तहत होना चाहिए, ताकि नागरिकों में भ्रम न फैले और प्रशासन की कार्रवाई पर भरोसा बना रहे।
शहर में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बैठकों के बीच शंकर कॉलोनी में अभियान का बिना कार्रवाई समाप्त होना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अब स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन यह स्पष्ट करे कि अभियान किस उद्देश्य से चलाया गया था, कार्रवाई क्यों रुकी और क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की आगे क्या योजना है। नगर पालिका का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।
