मानवता की मिसाल: सड़क हादसे में जान गंवाने वाली बिलाश ने जाते-जाते 3 लोगों को दी नई जिंदगी
एम्स भोपाल में इस वर्ष का पाँचवाँ और कुल सातवाँ सफल अंगदान; मजदूर परिवार ने दुख की घड़ी में दान कीं दो किडनी और लिवर
Bhopal , संदीप सिंह, जिला संवाददाता। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में अंगदान की एक भावुक और प्रेरक मिसाल सामने आई है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होकर ‘ब्रेन-स्टेम डेड’ घोषित की गईं 24 वर्षीय बिलाश टांटी शर्मा (उर्फ शिवानी) के परिजनों ने असहनीय दुख के बीच साहसिक निर्णय लेते हुए उनके अंग दान कर दिए। इससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला है। एम्स भोपाल में यह सातवाँ और इस वर्ष का पाँचवाँ सफल अंगदान है।
दर्शन के लिए निकली थीं, रास्ते में हुआ हादसा
नर्मदापुरम जिले की बनखेड़ी तहसील के ग्राम खापा खुर्द की निवासी बिलाश 10 अक्टूबर को नवरात्र के अवसर पर परिवार के साथ सलकनपुर स्थित विजयासन देवी के दर्शन के लिए निकली थीं। रास्ते में हुए सड़क हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। परिजन उन्हें गंभीर हालत में एम्स भोपाल लेकर पहुँचे। चिकित्सकों की टीम ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार 14 अक्टूबर 2026 को चिकित्सकों के पैनल ने उन्हें ‘ब्रेन-स्टेम डेड’ घोषित कर दिया।
साधारण ग्रामीण परिवार ने दिखाया बड़ा दिल
अस्पताल की ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेशन टीम ने परिजनों की काउंसलिंग कर अंगदान का महत्व समझाया। परिवार की बेटी/बहू को हमेशा के लिए खोने के दर्द के बीच इस साधारण ग्रामीण और मजदूर परिवार ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान के लिए लिखित सहमति दी। परिजनों का कहना था कि उनकी बेटी तो नहीं रही, लेकिन उसके जरिए अगर किसी और का जीवन बच सके, तो इससे बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता।

तीन मरीजों को मिला नया जीवन
सभी कानूनी और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल पूरे करने के बाद 15 अक्टूबर को अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी हुई। बिलाश की एक किडनी एम्स भोपाल में भर्ती जरूरतमंद मरीज को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित की गई। दूसरी किडनी और लिवर को प्राथमिकता के आधार पर भोपाल के बंसल अस्पताल भेजा गया, जहाँ दो अन्य मरीजों में उनका सफल प्रत्यारोपण हुआ।
गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई
प्रक्रिया पूरी होने के बाद एम्स भोपाल के वरिष्ठ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, ट्रांसप्लांट टीम और सुरक्षाकर्मियों ने बिलाश के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर मौन रखकर अंतिम विदाई दी। एम्स प्रबंधन ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके साहसिक निर्णय के लिए आभार जताया। बिलाश अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन तीन जिंदगियों की धड़कनों में वे हमेशा जीवित रहेंगी।
