तेज आवाज में डीजे से लोगों को परेशानी, कम आवाज में बजाने की मांग — दैनिक स्वराज वाणी
क्षेत्रीय विकास परिषद और सेवा समितियों ने त्योहारों पर दूसरों की सुविधा का ध्यान रखने की अपील की
संवाददाता: वैभव जैन मस्ताना
सिलवानी। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों पर तेज आवाज में डीजे बजाने से आम लोगों को होने वाली परेशानी को लेकर नगर में चिंता जताई गई है। क्षेत्रीय विकास परिषद, ओम साइन नाथ सेवा समिति और श्री देवनारायण सेवा समिति के सदस्यों ने आयोजकों से डीजे कम आवाज में बजाने की अपील की है। उनका कहना है कि त्योहार मनाना और खुशी जाहिर करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन इस दौरान आसपास रहने वाले लोगों की सुविधा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
समितियों के सदस्यों ने कहा कि देशभर में त्योहारों के अवसर पर डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल होता है। कई जगह तेज आवाज को लेकर विवाद की स्थिति भी बन जाती है। उत्सव मनाने के लिए डीजे बजाना गलत नहीं है, लेकिन आवाज इतनी तेज न हो कि दूसरे लोगों को परेशानी हो। उनका कहना है कि आयोजक थोड़ी सावधानी रखें और ध्वनि का स्तर सीमित रखें, तो उत्सव का आनंद भी बना रहेगा और लोगों को अनावश्यक परेशानी भी नहीं होगी।
तेज ध्वनि से बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को दिक्कत
समितियों के अनुसार, तेज आवाज का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। घरों में बुजुर्ग, छोटे बच्चे और अस्वस्थ लोग रहते हैं, जिन्हें तेज ध्वनि से असुविधा हो सकती है। कई लोगों को आराम की जरूरत होती है, जबकि विद्यार्थियों को पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी करनी होती है। ऐसे में देर तक और बहुत तेज आवाज में डीजे बजने से उनकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।
सदस्यों ने यह भी कहा कि तेज आवाज से परेशान लोग कई बार विरोध जताते हैं, जिसके कारण विवाद की स्थिति बन जाती है। आयोजक यदि पहले से आसपास के लोगों की सुविधा का ध्यान रखें और डीजे की आवाज कम रखें, तो आपसी तनाव से बचा जा सकता है। उत्सव का उद्देश्य लोगों को जोड़ना और खुशी बांटना है। इसलिए आयोजन ऐसा होना चाहिए, जिसमें मोहल्ले और क्षेत्र के अधिक से अधिक लोग सहज महसूस करें।
खुशी मनाएं, लेकिन दूसरों की परेशानी का भी रखें ध्यान
क्षेत्रीय विकास परिषद और दोनों सेवा समितियों के सदस्यों ने कहा कि त्योहार सभी के होते हैं और इन्हें मिल-जुलकर मनाना चाहिए। किसी भी आयोजन में यह ध्यान रखा जाए कि एक व्यक्ति या समूह की खुशी के कारण दूसरे लोगों को तकलीफ न हो। डीजे की आवाज कम रखकर भी उत्सव का माहौल बनाया जा सकता है। आयोजक समय, स्थान और आसपास के रहवासियों की जरूरतों का ध्यान रखें, तो कार्यक्रम अधिक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकता है।
समितियों ने नागरिकों से अपील की कि त्योहारों के समय एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें। डीजे संचालक भी आयोजकों के आग्रह पर आवाज को नियंत्रित रखें। यदि किसी आयोजन से लोगों को परेशानी महसूस हो, तो बात को विवाद का रूप देने के बजाय आपसी बातचीत से समाधान निकालने की कोशिश की जाए। उनका कहना है कि सामाजिक आयोजनों में जिम्मेदारी केवल आयोजकों की नहीं, बल्कि डीजे संचालकों और सहभागी नागरिकों की भी होती है।
सामूहिक जिम्मेदारी से बनेगा बेहतर माहौल
सदस्यों के मुताबिक, त्योहारों की रौनक तभी बढ़ती है जब आसपास के लोग भी आयोजन से जुड़ सकें और किसी को असुविधा न हो। कम आवाज में डीजे बजाने से उत्सव की खुशी कम नहीं होती, बल्कि सभी के लिए माहौल सहज बना रहता है। आयोजक अपनी खुशी के साथ यह भी सोचें कि उनके कार्यक्रम का असर आसपास रहने वाले लोगों पर कैसा पड़ रहा है।
क्षेत्रीय विकास परिषद, ओम साइन नाथ सेवा समिति और श्री देवनारायण सेवा समिति ने नागरिकों से मिल-जुलकर त्योहार मनाने और ध्वनि का स्तर कम रखने की अपील दोहराई। समितियों का कहना है कि दूसरों की सुविधा का ध्यान रखना सामाजिक जिम्मेदारी है। जब लोग एक-दूसरे की जरूरतों और भावनाओं का सम्मान करेंगे, तभी त्योहारों की खुशी पूरे नगर में साझा हो सकेगी।
