CG Krishak Unnati Yojana: छत्तीसगढ़ के किसानों को कितनी मदद? जानें पात्रता और भुगतान का तरीका — दैनिक स्वराज वाणी
धान बेचने वाले और फसल विविधीकरण अपनाने वाले किसानों के लिए अलग-अलग सहायता; राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की कृषक उन्नति योजना खेती की लागत में राहत देने और किसानों को कृषि आदानों में निवेश के लिए सहायता प्रदान करती है। योजना के तहत धान बेचने वाले किसानों के साथ दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास उगाने वाले पात्र किसानों को भी लाभ दिया जाता है। सहायता की राशि फसल, पंजीयन और सत्यापित रकबे के आधार पर तय होती है।
छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी खरीफ 2025 के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के लिए धान की किस्म के अनुसार आदान सहायता निर्धारित की गई थी। धान कॉमन पर 731 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 15,351 रुपये प्रति एकड़ और धान ग्रेड-ए पर 711 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 14,931 रुपये प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान बताया गया। ये दरें खरीफ 2025 के दिशा-निर्देशों के अनुसार हैं; हर सीजन की राशि और शर्तें उस वर्ष जारी सरकारी आदेश से देखनी चाहिए।
दूसरी फसलों के लिए प्रति एकड़ सहायता
योजना के तहत धान के अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसलें—कोदो, कुटकी और रागी—तथा कपास उगाने वाले पात्र किसानों को खरीफ 2025 के दिशानिर्देशों में सत्यापित रकबे के आधार पर 10,000 रुपये प्रति एकड़ आदान सहायता का प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक तथा खेती की दूसरी जरूरतों में निवेश करने में मदद देना है।
इसके अलावा, ऐसे किसान जिन्होंने पिछले खरीफ मौसम में एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया था, धान की फसल ली थी और सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर धान बेचा था, उन्हें धान के स्थान पर दूसरी खरीफ फसल लेने पर सहायता का प्रावधान बताया गया है। खरीफ 2025 के लिए दूसरी फसल के मान्य और सत्यापित रकबे पर 11,000 रुपये प्रति एकड़ सहायता निर्धारित थी। इसके लिए किसान का पोर्टल पर पंजीयन और गिरदावरी में फसल तथा रकबे की पुष्टि जरूरी थी।
किन किसानों को मिल सकता है लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए किसान का एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत होना जरूरी है। धान के मामले में संबंधित किसान का खरीफ मौसम में पंजीयन होना और धान को राज्य की पात्र सहकारी समितियों अथवा निर्धारित संस्था को बेचना आवश्यक है। दूसरी फसलों के लिए पोर्टल पर फसल का पंजीयन और गिरदावरी में दर्ज रकबे का सत्यापन किया जाता है।
दिशा-निर्देशों में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों को सहायता के दायरे में रखा गया है। धान से दूसरी खरीफ फसल की ओर जाने वाले किसानों के लिए पिछले खरीफ का धान पंजीयन और सहकारी समिति में समर्थन मूल्य पर बिक्री संबंधी शर्तें भी लागू हो सकती हैं। इसलिए आवेदन या पंजीयन से पहले किसान को अपने जिले में लागू ताजा आदेश और फसल संबंधी पात्रता की जानकारी लेना जरूरी है।
योजना के तहत ट्रस्ट, मंडल, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, समिति तथा केंद्र या राज्य सरकार की संस्थाओं को पात्रता नहीं दी गई है। सहायता का भुगतान कृषि भूमि सीलिंग कानून के प्रावधानों के अधीन किया जाता है
बैंक खाते में DBT से भुगतान
कृषक उन्नति योजना की सहायता राशि किसान के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी DBT के माध्यम से भेजी जाती है। लाभ के लिए किसान का पंजीयन, फसल का विवरण और गिरदावरी में दर्ज रकबे का सत्यापन महत्वपूर्ण है। धान बेचने वाले किसानों के मामले में बिक्री की मात्रा और पात्रता संबंधी जानकारी भी भुगतान निर्धारण में शामिल होती है।
किसान अपने पंजीयन, फसल चयन और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विभाग के विकासखंड कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। सरकारी निर्देशों के अनुसार योजना का क्रियान्वयन कृषि विभाग के साथ मार्कफेड, खाद्य विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से किया जाता है।
