राजयोग अभ्यास से तन-मन की स्थिरता: बिना पलक झपकाए मूर्ति रूप में प्रकट होती चैतन्य देवियाँ बनीं आकर्षण का केंद्र
Bhilai में ब्रह्माकुमारी राजयोग भवन की झांकी का शुभारंभ; 22 अक्टूबर से 10 दिवसीय राजयोग शिविर
Bhilai , छत्तीसगढ़, 16 अक्टूबर 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, सेक्टर 7 राजयोग भवन द्वारा शारदीय नवरात्रि के अवसर पर ध्वनि और प्रकाश के सुंदर समायोजन के साथ चैतन्य देवियों की झांकी का शुभारंभ किया गया। शिव शक्ति स्वरूपा ब्रह्माकुमारी दीदियों ने दीप प्रज्वलन कर विधिवत उद्घाटन किया।
पर्वत श्रृंखला से प्रकट होती चैतन्य देवियाँ
विशाल पर्वत श्रृंखला में बनी गुफाओं और पहाड़ों के बीच से एक के बाद एक जड़ मूर्ति रूप में चैतन्य देवियाँ प्रकट होकर भक्तों को दर्शन देती हैं, जो अलौकिक और दिव्य अनुभूति कराता है।
चैतन्य देवियों के रूप में विराजित ब्रह्माकुमारी बहनें प्रतिदिन राजयोग के अभ्यास से तन और मन की स्थिरता के कारण बिना पलक झपकाए जड़ मूर्ति जैसी प्रतीत होती हैं। इसे देखकर दर्शनार्थियों को यकीन नहीं होता कि ये चैतन्य देवियाँ हैं।

झांकी का संदेश
आंतरिक शक्तियों के दर्शन और स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करती यह झांकी अंदर की अशांति मिटाकर ज्ञान का प्रकाश देने का संदेश देती है। अष्ट भुजाधारी माँ दुर्गा की अष्ट शक्तियाँ हम सभी में विद्यमान हैं, जिन्हें भारत के प्राचीन राजयोग ध्यान द्वारा जागृत कर व्यवहार में लाना है।
झांकी में बताया गया कि जैसे बचपन की शुद्धता और नदी का उद्गम स्थल शुद्ध और पवित्र होता है, वैसे ही शिव की शक्तियों को स्वयं में धारण करने के लिए बुराइयों, अशुद्धियों, नकारात्मकता, व्यसन और ईर्ष्या-द्वेष को छोड़ना होगा। यही झांकी का मूल संदेश है।
22 अक्टूबर से राजयोग शिविर
इस अवसर पर 10 दिवसीय “अपनी शक्तियों से करें मुलाकात” राजयोग शिविर 22 अक्टूबर से शुरू होगा। शिविर के समय:
- प्रातः 7 से 8 बजे
- संध्या 5:30 से 6:30 बजे
- संध्या 7:30 से 8:30 बजे
इनमें से किसी भी एक समय शिविर का लाभ लिया जा सकता है।
प्रेषक: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, राजयोग भवन, सेक्टर 7, भिलाई, छत्तीसगढ़
