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प्रयागराज में जमीन विवाद में वकील की गोली मारकर हत्या, भाजपा नेता समेत चार पर एफआईआर; पत्नी ने की एनकाउंटर की मांग — दैनिक स्वराज वाणी

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Published On: 16 October 2026
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प्रयागराज में जमीन विवाद में वकील की गोली मारकर हत्या, भाजपा नेता समेत चार पर एफआईआर; पत्नी ने की एनकाउंटर की मांग — दैनिक स्वराज वाणी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जमीन विवाद को लेकर 52 वर्षीय वकील सतीश कुमार श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना गुरुवार को सोलाती इलाके में हुई। जानकारी के अनुसार, विवादित नजूल भूमि पर कब्जे को लेकर दो पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक हो गई। आरोप है कि एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट (एजीए) देवेंद्र नाथ मिश्रा ने अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से सतीश कुमार पर गोली चला दी। गोली उनके पेट में लगी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में भाजपा नेता समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आई है। मृतक की पत्नी ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग की है।

नजूल भूमि पर कब्जे को लेकर हुआ विवाद

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना की पृष्ठभूमि में विवादित नजूल भूमि पर कब्जे का मामला बताया जा रहा है। इसी जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनातनी और कहासुनी हुई। विवाद किस बात से शुरू हुआ और मौके पर मौजूद लोगों के बीच पहले क्या बातचीत हुई, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, जमीन को लेकर बना तनाव इतना बढ़ गया कि मामला गोली चलने तक पहुंच गया।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गोली लगने से घायल सतीश कुमार को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिवार और परिचितों में शोक है। जमीन विवाद जैसे मामले में हुई इस हिंसक घटना ने इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा किया है।

एजीए पर गोली चलाने का आरोप

मामले में आरोप है कि एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट देवेंद्र नाथ मिश्रा ने अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर से सतीश कुमार को गोली मारी। गोली उनके पेट में लगी थी। इस आरोप की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। फिलहाल, घटना के कारणों और उस समय मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस जांच की जरूरत है।

सतीश कुमार की मौत के बाद जमीन विवाद से जुड़े पहलुओं की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। विवादित भूमि पर किसका दावा था, कब्जे को लेकर पक्षों के बीच पहले से कोई विवाद या कानूनी प्रक्रिया चल रही थी या नहीं, और घटना के समय वहां कौन-कौन मौजूद था—इन सवालों के जवाब जांच के दौरान सामने आ सकते हैं। उपलब्ध जानकारी में इन पहलुओं का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

भाजपा नेता समेत चार लोगों पर एफआईआर

घटना के बाद भाजपा नेता समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। एफआईआर में किन-किन लोगों के नाम शामिल हैं और सभी पर क्या आरोप लगाए गए हैं, इसका पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है। नामजद व्यक्तियों पर लगाए गए आरोपों को जांच के बाद ही सही या गलत ठहराया जा सकेगा। एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध होना नहीं है; मामले में आगे की कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।

मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की है या नहीं और घटना से जुड़े किसी हथियार अथवा अन्य साक्ष्य को जब्त किया गया है या नहीं। घटना की निष्पक्ष जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि विवाद किस तरह बढ़ा और गोली चलने की परिस्थितियां क्या थीं। फिलहाल उपलब्ध विवरण में गिरफ्तारी या पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर पुष्टि नहीं की गई है।

पत्नी ने आरोपियों के एनकाउंटर की मांग की

सतीश कुमार की पत्नी ने घटना के बाद आरोपियों के एनकाउंटर की मांग की है। यह मांग परिवार के गहरे दुख और आक्रोश के बीच सामने आई है। हत्या के बाद परिजन आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं। हालांकि, आरोपियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी। पत्नी की मांग मामले में परिवार की प्रतिक्रिया है; इसे पुलिस की कार्रवाई या किसी निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जांच में सामने आएंगे घटना के अहम पहलू

इस मामले में विवादित नजूल भूमि का दस्तावेजी और कानूनी विवरण, दोनों पक्षों के बीच हुए विवाद का क्रम, गोली चलने की परिस्थितियां तथा घटनास्थल पर मौजूद लोगों के बयान अहम हो सकते हैं। इन सभी पहलुओं की जांच से घटना की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सतीश कुमार श्रीवास्तव की मौत गोली लगने के बाद अस्पताल में हुई और जमीन विवाद को घटना की वजह बताया जा रहा है।

पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी और एफआईआर में दर्ज आरोपों के समर्थन में कौन-से साक्ष्य सामने आते हैं। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी भी आरोपी को दोषी मानना उचित नहीं होगा। मामले की आगे की जानकारी आधिकारिक पुष्टि के बाद सामने आने की उम्मीद है।

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