आसुरी अवगुणों को त्यागकर दैवी गुण अपनाने का पर्व है नवरात्रि: ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी
ग्राम बिगनौदी पुरा में आयोजित सात दिवसीय नवरात्रि ज्ञान महोत्सव के चौथे दिन आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों और नशामुक्त जीवन का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि नवरात्रि केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि आसुरी अवगुणों को त्यागकर दैवी गुणों को जीवन में धारण करने का अवसर भी है। उन्होंने ग्रामीणों को सकारात्मक सोच अपनाने, बुराइयों से दूर रहने और श्रेष्ठ जीवन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
दीदी ने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान प्राप्त करने और उसे जीवन में उतारने वाले लोग सच्चे अर्थों में अर्जुन के समान हैं। आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को सही दिशा दिखाता है और उसे अपने भीतर की कमियों को पहचानने में मदद करता है। यदि व्यक्ति अपने विचारों और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प करे, तो वह बुरी आदतों को छोड़कर बेहतर जीवन अपना सकता है।
सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प की अहमियत
अपने उद्बोधन में भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कहा कि मनुष्य की वास्तविक शक्ति उसकी सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प में निहित है। कठिन परिस्थितियों में भी सही सोच और मजबूत इच्छाशक्ति व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि जीवन में सुधार की शुरुआत स्वयं से होती है। हर व्यक्ति को अपनी आदतों और व्यवहार पर विचार करना चाहिए तथा उन कमियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए, जो उसके और उसके परिवार के जीवन को प्रभावित करती हैं।
उन्होंने नशे को व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए नुकसानदायक बताते हुए इससे दूर रहने की अपील की। दीदी ने कहा कि नशे की बुरी आदत स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है और परिवार की सुख-शांति पर भी असर डालती है। इसका प्रभाव केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घर के अन्य सदस्यों और आसपास के सामाजिक वातावरण पर भी पड़ता है। इसलिए हर व्यक्ति को स्वयं नशामुक्त रहने के साथ दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना चाहिए।
नाटक के जरिए समझाए नशे के दुष्परिणाम
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण नशामुक्ति पर आधारित नाटक रहा। कलाकारों ने प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि नशे की लत किस तरह व्यक्ति के जीवन और परिवार की खुशियों को प्रभावित कर सकती है। नाटक में यह संदेश दिया गया कि नशे के कारण हँसते-खेलते परिवारों में तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं तथा व्यक्ति अनेक कठिनाइयों से घिर सकता है।
प्रस्तुति के माध्यम से ग्रामीणों से नशे की आदत छोड़ने और परिवार तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की गई। नाटक ने नशामुक्त जीवन के महत्व को सरल और प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि नशे से दूरी बनाकर ही परिवार की खुशहाली और सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाने में योगदान दिया जा सकता है।
संस्कारवान समाज के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
महोत्सव के माध्यम से ग्रामीणों को प्रेरित किया गया कि आध्यात्मिक ज्ञान को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन में भी अपनाएं। अच्छी सोच, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक आदतों के जरिए व्यक्ति स्वयं में बदलाव ला सकता है। नशामुक्त परिवार और संस्कारवान समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
ग्राम में चल रहे सात दिवसीय नवरात्रि ज्ञान महोत्सव के माध्यम से आध्यात्मिक जागृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक बुराइयों से मुक्ति के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन के दौरान प्रवचनकर्ता ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी का सम्मान भी किया गया।
