MP बिजली संकट: कहीं 8 से 10 घंटे बिजली गुल, कई जिलों में चक्काजाम और प्रदर्शन
भोपाल मध्यप्रदेश के कई जिलों में अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान हैं। कहीं 8 से 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायत है, तो कहीं रातभर गांव अंधेरे में डूबे रहते हैं। भोपाल, सीहोर, राजगढ़, बैतूल, विदिशा और नर्मदापुरम समेत कई जिलों में किसानों और ग्रामीणों ने कटौती के विरोध में चक्काजाम, धरना और बिजली कंपनी के कार्यालयों का घेराव किया।
ग्रामीणों का कहना है कि नियमित बिजली नहीं मिलने से खेती की सिंचाई प्रभावित हो रही है। दिन में छह से सात घंटे ही बिजली मिलने के आरोप हैं। बिजली पर निर्भर घरेलू कामकाज, बच्चों की पढ़ाई और त्योहारों की तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बाद भी राहत नहीं मिलने पर लोग सड़कों पर उतरकर विरोध जता रहे हैं।
सीहोर में इंदौर-भोपाल हाईवे पर चक्काजाम
सीहोर जिले के कोठरी में बिजली कटौती से नाराज ग्रामीणों ने मंगलवार रात इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे पर चक्काजाम किया। ग्रामीणों का आरोप था कि क्षेत्र में 8 से 10 घंटे तक बिजली नहीं मिल रही। रात करीब 8.30 बजे शुरू हुए प्रदर्शन के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं। कुछ समय के लिए करीब दो-दो किलोमीटर तक जाम की स्थिति बनी। ग्रामीणों ने नियमित बिजली आपूर्ति की मांग उठाई।
बैतूल-आमला मार्ग पर ग्रामीणों का विरोध
बैतूल जिले के मोरडोंगरी में भी बिजली कटौती को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सामने आया। मंगलवार रात ग्रामीणों ने बैतूल-आमला मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बिजली की अनियमित आपूर्ति से गांवों में रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। किसानों के लिए खेतों में सिंचाई करना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने बिजली कंपनी से व्यवस्था सुधारने और बिना सूचना कटौती बंद करने की मांग की।
राजगढ़ में ढाबला जोड़ पर रोका रास्ता
राजगढ़ जिले में अघोषित कटौती के विरोध में ग्रामीणों ने ढाबला जोड़ पर चक्काजाम किया। सेमली कलां, भोजपुर, चिब्बड़, करकरी और ढाबली सहित आसपास के गांवों के लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लोड शेडिंग के नाम पर बिना पूर्व सूचना बिजली बंद की जा रही है। प्रदर्शन के दौरान बिजली विभाग के अधिकारी से ग्रामीणों की चर्चा भी हुई। ग्रामीणों ने कहा कि कटौती का असर विद्यार्थियों, किसानों और छोटे-बड़े व्यापारियों पर पड़ रहा है।
विदिशा और नर्मदापुरम में धरना-घेराव
विदिशा जिले के नटेरन में भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने बिजली कंपनी के कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली देने की मांग उठाई। सिरोंज में ग्रामीणों ने चक्काजाम किया, जबकि कुरवाई में ज्ञापन सौंपकर आपूर्ति सुधारने की मांग की गई।
नर्मदापुरम जिले के आरी गांव में किसानों ने मंगलवार रात बिजली उपकेंद्र पर एक घंटे से अधिक समय तक धरना दिया। किसानों का कहना है कि बार-बार बिजली बंद होने से खेती का काम तय समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। अलग-अलग स्थानों पर ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मिलकर नियमित आपूर्ति की मांग रखी।
सिंचाई और घरेलू कामकाज पर असर
किसानों के मुताबिक, खेती के लिए निर्धारित समय पर पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से सिंचाई का काम प्रभावित होता है। खेतों में पानी पहुंचाने के लिए कई बार रात में इंतजार करना पड़ता है। बिजली कटौती का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। रात में आपूर्ति बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम बाधित होते हैं। त्योहारों के दौरान भी बिजली गुल रहने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है।
बिजली कंपनी ने दिया अपना पक्ष
बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान शहरी क्षेत्रों में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए जबलपुर से निर्देश मिले थे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इसकी कीमत लंबी कटौती के रूप में चुकानी पड़ रही है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने मांग की कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति का संतुलन रखा जाए और कटौती की स्थिति में पहले से सूचना दी जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे आगे भी विरोध जारी रखेंगे। फिलहाल अलग-अलग जिलों में किसानों और बिजली कंपनी के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। ग्रामीणों को इंतजार है कि आश्वासन के बाद बिजली आपूर्ति में वास्तविक सुधार कब दिखाई देगा।
