MP Cabinet Decision: इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे के किनारे बनेगा औद्योगिक कॉरिडोर, 100 करोड़ की SPV कंपनी करेगी जमीन की तलाश
मध्यप्रदेश में सड़क संपर्क को औद्योगिक विकास से जोड़ने की योजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इंदौर, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के आसपास प्रदेश का बड़ा औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी है। इस परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक पूंजी वाली स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) कंपनी बनाने का प्रस्ताव है। कंपनी एक्सप्रेस-वे के आसपास उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन और कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाशेगी।
परियोजना से जुड़े अनुमान के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने पर करीब छह लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर बन सकते हैं। यह रोजगार परियोजना के चरणों में आगे बढ़ने और उद्योगों की स्थापना पर निर्भर करेगा। अभी कंपनी के गठन, जमीन चयन और औद्योगिक क्षेत्रों की योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया अहम होगी।
करीब 600 किलोमीटर के मार्ग पर विकास की तैयारी
इंदौर-भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेस-वे की लंबाई करीब 600 किलोमीटर बताई जा रही है। प्रस्ताव है कि इस मार्ग के आसपास ऐसे स्थानों की पहचान की जाए जहां सड़क संपर्क और जमीन की उपलब्धता के आधार पर उद्योग स्थापित किए जा सकें। इससे एक्सप्रेस-वे का उपयोग केवल शहरों के बीच आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने में भी मदद मिल सकती है।
योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्रों का चयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। किन हिस्सों में उद्योग लगाए जा सकेंगे, यह जमीन, परिवहन संपर्क और अन्य आवश्यकताओं के अध्ययन के बाद तय होगा। प्रस्तावित कंपनी को इस काम के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी।
जमीन तलाशेगी नई SPV कंपनी
SPV यानी स्पेशल पर्पज व्हीकल किसी खास परियोजना के संचालन और प्रबंधन के लिए बनाई जाने वाली कंपनी होती है। इस मामले में कंपनी एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक उपयोग के योग्य जमीन की पहचान करेगी और उपलब्धता का आकलन करेगी। जमीन अधिग्रहण से जुड़े विशेष अधिकार दिए जाने पर भी विचार किया जा सकता है।
कंपनी के गठन को मंजूरी मिलने के बाद उसे संभावित स्थलों की पहचान और कनेक्टिविटी के अध्ययन का काम सौंपा जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एक वर्ष के भीतर यह तय करने की योजना है कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन स्थानों पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों में उद्योगों के लिए आवश्यक सुविधाओं और आगे की विकास योजना पर काम होगा।
धरमपुरा में 954 एकड़ का पार्क
जबलपुर और भोपाल के बीच धरमपुरा में 954 एकड़ भूमि पर मल्टी-प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना की लागत 576 करोड़ रुपये बताई गई है। मल्टी-प्रोडक्ट पार्क में अलग-अलग प्रकार के उद्योगों के लिए स्थान उपलब्ध कराने की योजना रहती है। धरमपुरा की स्थिति जबलपुर और भोपाल के बीच होने के कारण इसे प्रस्तावित औद्योगिक विकास का एक अहम केंद्र माना जा रहा है।
आष्टा में बड़े औद्योगिक क्षेत्र का प्रस्ताव
भोपाल और इंदौर के बीच सीहोर जिले के आष्टा में करीब 21 हजार एकड़ क्षेत्र में औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 6 हजार एकड़ सरकारी और औद्योगिक विकास निगम की जमीन उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त करीब 5 हजार हेक्टेयर निजी भूमि अधिग्रहित करने की योजना है। बढ़ियाखेड़ी और झीलेरा में भी औद्योगिक केंद्र विकसित करने की संभावनाएं बताई गई हैं।
इन स्थानों पर विकास की रूपरेखा जमीन की उपलब्धता, सड़क संपर्क और परियोजना की जरूरतों के आकलन के बाद तय होगी। इसलिए प्रस्तावित क्षेत्र और जमीन से जुड़े आंकड़ों को योजना के आगे बढ़ने के साथ अंतिम रूप दिया जाएगा।
निवेश और रोजगार की उम्मीद
औद्योगिक कॉरिडोर का उद्देश्य नए निवेश को आकर्षित करना और उद्योगों के लिए बेहतर परिवहन संपर्क उपलब्ध कराना है। उद्योग स्थापित होने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार, परिवहन, निर्माण और सहायक सेवाओं से जुड़े अवसर बनने की संभावना रहती है। परियोजना के शीर्षक में छह लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान बताया गया है, लेकिन यह संख्या भविष्य में उद्योगों की स्थापना और निवेश की गति पर निर्भर करेगी।
फिलहाल योजना के शुरुआती चरण में कंपनी का गठन, जमीन की पहचान और संभावित औद्योगिक स्थलों का चयन महत्वपूर्ण रहेगा। इन प्रक्रियाओं के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कॉरिडोर किन क्षेत्रों में और किस समयसीमा के भीतर विकसित होगा।
