‘जय जोहार’ बोलने पर आदिवासी छात्रों से कथित बदसलूकी, भोपाल के टीआई रतन सिंह परिहार निलंबित
भोपाल। प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ का नारा लगाने वाले आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता के मामले में मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मामले का संज्ञान लिया। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की छात्र शाखा ने मंगलवार को आदिवासी विद्यार्थियों से जुड़ी समस्याओं को लेकर भोपाल में प्रदर्शन किया था। छात्र रोशनपुरा से मिसरोद की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद हुआ। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें छात्र ‘जय जोहार’ का नारा लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में टीआई परिहार कथित तौर पर नारे पर आपत्ति जताते और छात्रों से अभद्र भाषा में बात करते नजर आते हैं। वीडियो की परिस्थितियों और घटना के क्रम की विभागीय जांच की जा रही है।
वीडियो सामने आने के बाद आदिवासी जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों ने पुलिसकर्मी के व्यवहार पर आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की। सोशल मीडिया पर भी घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं। पुलिस विभाग ने टीआई को निलंबित कर जांच शुरू की है। फिलहाल, जांच पूरी होने से पहले आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में यदि अन्य लोग दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय जांच में घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
उमंग सिंघार ने की एफआईआर की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घटना को गंभीर और निंदनीय बताते हुए टीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ‘जोहार’ आदिवासी संस्कृति, पहचान, स्वाभिमान और सम्मान से जुड़ा अभिवादन है। सिंघार ने पुलिस की वर्दी और अधिकारों का उपयोग नागरिकों को अपमानित करने के लिए किए जाने पर सवाल उठाए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सिंघार के मुताबिक, पुलिसकर्मियों से कानून और संविधान का सम्मान करने तथा नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने की अपेक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। एफआईआर दर्ज करने की मांग फिलहाल विपक्ष की ओर से उठाई गई है; उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई की है।
जांच के निष्कर्ष के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
‘जय जोहार’ आदिवासी समुदायों में प्रचलित अभिवादन है और इसे सम्मान तथा आत्मीयता से जोड़ा जाता है। प्रदर्शन के दौरान कथित टिप्पणी को लेकर आदिवासी संगठनों ने नाराजगी जताई है। अब विभागीय जांच में वीडियो, घटना की परिस्थितियों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर तथ्य जुटाए जाएंगे।
टीआई रतन सिंह परिहार का निलंबन जांच पूरी होने तक की विभागीय कार्रवाई है। आगे की अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय होगी। फिलहाल मामला पुलिस विभाग की जांच के अधीन है और एफआईआर की मांग पर निर्णय की जानकारी सामने आना बाकी है।
