Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि में अर्गला स्तोत्र के पाठ का महत्व, जानें पूजा का पारंपरिक क्रम
धर्म डेस्क। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के लिए व्रत और पूजा के साथ भक्त विभिन्न मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ करते हैं। इन्हीं में अर्गला स्तोत्र को दुर्गा सप्तशती के महत्वपूर्ण अंगों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और एकाग्रता से इसका पाठ करने पर भक्त मां से शक्ति, विजय, यश और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। नवरात्रि 11 से 19 अक्टूबर तक मनाई जा रही है।
दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण अंग
अर्गला स्तोत्र देवी माहात्म्य या दुर्गा सप्तशती की पाठ परंपरा से जुड़ा स्तोत्र है। इसके श्लोकों में देवी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी विजय का स्मरण करते हुए उनसे कृपा की प्रार्थना की जाती है। स्तोत्र में भक्त देवी से जीवन में शुभता, साहस और सफलता देने तथा शत्रुता और बाधाओं को दूर करने की विनती करते हैं। यह धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ा पाठ है; इसके फल को भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देखते हैं।
अर्गला स्तोत्र को कई पाठ-पुस्तकों में दुर्गा सप्तशती के मुख्य अध्यायों से पहले पढ़े जाने वाले अंगों में शामिल किया गया है। प्रचलित क्रम में पहले देवी कवच, फिर अर्गला स्तोत्र और उसके बाद कीलक स्तोत्र का पाठ किया जाता है। इसके बाद दुर्गा सप्तशती के अध्याय पढ़े जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और पाठ-विधियों में क्रम के कुछ अंतर मिल सकते हैं। इसलिए संपूर्ण पाठ करने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा या गुरु के निर्देशों का पालन कर सकते हैं।
नवरात्रि में कैसे करें पाठ?
भक्त नवरात्रि में सुबह या शाम की पूजा के समय अर्गला स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। पूजा-स्थल को स्वच्छ कर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन और ध्यान करके स्तोत्र का पाठ करें। यदि दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ किया जा रहा हो, तो उसके साथ प्रचलित पाठ-विधि और क्रम का ध्यान रखा जाता है।
संस्कृत पाठ में उच्चारण और श्लोकों के क्रम को लेकर संदेह हो, तो किसी विश्वसनीय पाठ-पुस्तक, जानकार पुरोहित या गुरु से मार्गदर्शन लिया जा सकता है। पाठ करते समय जल्दबाजी के बजाय शांत मन और एकाग्रता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। जो श्रद्धालु पूरा स्तोत्र नहीं पढ़ पाते, वे अपनी क्षमता और समय के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
स्तोत्र में देवी से की जाती है प्रार्थना
अर्गला स्तोत्र के भाव में भक्त देवी से सौंदर्य, विजय, यश और विरोध से रक्षा की याचना करते हैं। यहां विजय को केवल बाहरी सफलता तक सीमित न मानकर आत्मबल और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति के रूप में भी देखा जाता है। भक्त प्रार्थना करते हैं कि मां उनके जीवन से नकारात्मकता और बाधाएं दूर करें तथा उन्हें धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दें। यह व्याख्या धार्मिक परंपरा पर आधारित है।
नवरात्रि आत्मचिंतन, साधना और भक्ति का पर्व है। ऐसे में स्तोत्र-पाठ के साथ संयम, सद्भाव और सेवा जैसे व्यवहारों को अपनाने का संकल्प भी लिया जा सकता है। भक्तों के लिए अर्गला स्तोत्र मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनसे आशीर्वाद की कामना करने का एक पारंपरिक माध्यम है।
