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झुमरीतिलैया में मुनि सुयश सागर का 17वां दीक्षा महोत्सव धूमधाम से मनाया — दैनिक स्वराज वाणी

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Published On: 14 October 2026
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झुमरीतिलैया में मुनि सुयश सागर का 17वां दीक्षा महोत्सव धूमधाम से मनाया — दैनिक स्वराज वाणी

झुमरीतिलैया। चातुर्मास कर रहे पूज्य श्रमण मुनि 108 सुयश सागरजी महाराज का 17वां दीक्षा महोत्सव स्टेशन रोड स्थित बड़ा मंदिर के भव्य पंडाल में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गुरुदेव के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचे। दुर्ग, रायपुर, रायगढ़, बलौदा बाजार, जयपुर, कोलकाता, खूंटी, हजारीबाग और गया सहित अनेक स्थानों से आए जैन समाज के भक्तों ने समारोह में सहभागिता की।

विश्व शांति धारा और पूजन

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कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः विश्व शांति मंत्रों के साथ हुई। स्वर्ण झारी से भगवान की विश्व शांति धारा की गई। इसके बाद ब्रह्मचारी संजय भैया और पंडित अभिषेक शास्त्री ने दीक्षा महोत्सव का पूजन एवं विधि-पाठ संपन्न कराया। श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

गुरुदेव के परम भक्त चंद्र प्रकाश और लता जैन, हजारीबाग ने पाद प्रक्षालन किया और जिनवाणी भेंट की। जैन समाज महिला समाज, जैन बालिका समाज और जैन युवक समिति ने संगीत और नृत्य के साथ अष्टद्रव्य से गुरुदेव की पूजा-अर्चना की। मंच संचालन आशा जैन गंगवाल और आशिका जैन कासलीवाल ने किया। प्रसिद्ध भजन गायक सुबोध जैन गंगवाल ने भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को आनंदित किया।

गुरु उपकार और आत्मकल्याण का संदेश

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दीक्षा महोत्सव पर मुनि सुयश सागरजी ने अपनी अमृतवाणी में कहा कि संसार असार है और राग से वैराग्य की ओर बढ़ना ही आत्मकल्याण तथा मोक्ष का मार्ग है। उन्होंने कहा कि गुरु बहुत उपकारी होते हैं। लक्ष्य निश्चित हो तो व्यक्ति सही मार्ग पर पहुंच सकता है।

गुरुदेव ने कहा कि जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए दीक्षा का महत्वपूर्ण स्थान है। दीक्षा के माध्यम से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की साधना की जा सकती है। तत्वों का निर्णय एकांत में संभव होता है, भीड़ में नहीं। उन्होंने कहा कि मान-सम्मान, यश और वैभव पुण्य कर्मों के उदय से मिलते हैं, जबकि वैरागी व्यक्ति आत्मकल्याण की साधना में लीन रहता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से मन, वचन और शरीर को धर्म तथा सेवा के कार्यों में लगाने का आह्वान किया। गुरुदेव ने कहा कि समय आने पर बीत जाता है, इसलिए अच्छे समय का इंतजार करने के बजाय जीवन के हर पल को आत्मकल्याण और धर्मसेवा में लगाना चाहिए।

समाजजनों ने लिया आशीर्वाद

मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी ने स्वागत भाषण दिया और अतिथियों का अभिनंदन किया। विरागोदय वर्षायोग कमेटी के संयोजक-पदाधिकारियों और जैन समाज के सदस्यों ने गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया। समाजसेवी किशोर जैन पांडया, सुशील जैन छाबड़ा, सुरेश जैन झांझरी, सहमंत्री राज जैन छाबड़ा, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र जैन काला, सरोज जैन पापड़ीवाल, ललित जैन सेठी, प्रदीप जैन छाबड़ा, रौनक जैन कासलीवाल, सिद्धांत जैन सेठी, शैलेश जैन छाबड़ा, जोंटी जैन काला, लट्टू जैन छाबड़ा और मनीष जैन गंगवाल सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।

निवर्तमान पार्षद पिंकी जैन, मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन ने भी गुरुदेव को नमन कर आशीर्वाद लिया। मीडिया प्रभारियों ने बताया कि रात्रि में समाज के बच्चे मुनि सुयश सागरजी के जीवन पर प्रस्तुति देंगे। इसके बाद णमोकार चालीसा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

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