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Silwani की जानकी बाई बनीं आत्मनिर्भर, उन्नत खेती और मछली पालन से परिवार की आय में इजाफा

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Published On: 14 October 2026
Silwani

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सरकारी योजनाओं और उन्नत खेती से बदली जानकी बाई की जिंदगी, आमदनी तीन से चार गुना बढ़ी

लोकेशन सिलवानी
ब्यूरो चीफ रायसेन उमेश चौबे

Silwani के बेगवाकला की महिला किसान ने खेती के साथ मत्स्य पालन, डेयरी और बागवानी को बनाया आय का जरिया; मछली पालन से सालाना करीब डेढ़ लाख रुपये की कमाई

Silwani, रायसेन। सरकार की किसान हितैषी योजनाओं, कृषि प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए आय बढ़ाने के नए रास्ते खोले हैं। इसका उदाहरण रायसेन जिले के सिलवानी विकासखंड के ग्राम बेगवाकला की निवासी जानकी बाई कुशवाह हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन और बागवानी को अपनाया। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वर्ष 2020 की तुलना में उनकी आमदनी तीन से चार गुना बढ़ गई है।

तीन एकड़ जमीन से शुरू किया बदलाव

जानकी बाई ने बताया कि उनके परिवार के पास तीन एकड़ कृषि भूमि है। पहले वह अपने पति के साथ पारंपरिक तरीके से खेती करती थीं, लेकिन इससे होने वाली आमदनी से परिवार का जीवनयापन मुश्किल से हो पाता था। इसी दौरान गांव में आयोजित शिविर के माध्यम से उन्हें सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी मिली।

इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग के विकासखंड कार्यालय से संपर्क किया। आत्मा परियोजना के बीटीएम रघुवीर सिंह कुशवाह ने उन्हें उन्नत खेती और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। जानकी बाई और उनके पति ने कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा तथा बनखेड़ी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सब्जियों की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय में वृद्धि होने लगी।

बेटे ने भी लिया उन्नत कृषि का प्रशिक्षण

जानकी बाई के बेटे रामकिशोर भी खेती-किसानी में रुचि रखते हैं। उन्होंने सरकारी योजना के तहत करनाल में उन्नत कृषि का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा झांसी में मत्स्य पालन और डेयरी संचालन का प्रशिक्षण भी लिया। परिवार ने इन प्रशिक्षणों से मिली जानकारी का उपयोग खेती के साथ अन्य गतिविधियों को आगे बढ़ाने में किया।

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मछली पालन से सालाना डेढ़ लाख रुपये की आय

जानकी बाई ने बताया कि वर्ष 2023 में बलराम तालाब योजना के अंतर्गत उन्होंने एक एकड़ क्षेत्र में तालाब का निर्माण कराया और उसमें मछली पालन शुरू किया। इससे उन्हें हर साल लगभग डेढ़ लाख रुपये की आय हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने नेट हाउस तैयार कर उसमें सब्जियों की खेती भी शुरू की है।

परिवार के पास वर्तमान में नौ दुधारू पशु हैं, जिनसे पशुपालन के जरिए भी आमदनी होती है। इसके अलावा खेत में आम, कटहल और सीताफल के पेड़ लगाए गए हैं। इस तरह परिवार ने खेती के साथ कई गतिविधियों को अपनाकर आय के अलग-अलग स्रोत विकसित किए हैं।

आधुनिक खेती से परिवार के जीवन स्तर में सुधार

जानकी बाई का कहना है कि पारंपरिक खेती के बजाय उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। कृषि प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से मिली सहायता ने उनके परिवार को आगे बढ़ने का अवसर दिया। बढ़ी हुई आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवन स्तर में भी सुधार आया है।

उन्होंने इस बदलाव के लिए सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार जताया। उनके खेत का जिला कृषि अधिकारी और आत्मा परियोजना के संचालक द्वारा भ्रमण भी किया गया है।

जानकी बाई की यह कहानी बताती है कि उचित प्रशिक्षण, योजनाओं की जानकारी और खेती में विविधता अपनाकर किसान परिवार अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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