महाअष्टमी और महानवमी का पूजन 19 अक्टूबर को, दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा
सप्तमी तिथि में वृद्धि के कारण नवरात्र के अंतिम दिनों की तिथियों में बदलाव, ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने दी जानकारी
Morena । शारदीय नवरात्र के अंतिम दिनों में इस वर्ष तिथियों के क्रम को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। सप्तमी तिथि में वृद्धि होने के कारण महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के पर्व अलग-अलग तिथियों पर निर्धारित किए गए हैं। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, महाअष्टमी और महानवमी का पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
19 अक्टूबर को होगा महाअष्टमी और महानवमी पूजन
डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर को सुबह 5:55 बजे शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह 8:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 19 अक्टूबर को सुबह 10:52 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात नवमी तिथि शुरू होगी।
उन्होंने बताया कि तिथियों के संयोग को देखते हुए दुर्गाष्टमी, महाअष्टमी और महानवमी के धार्मिक अनुष्ठान 19 अक्टूबर को किए जाएंगे। इसी दिन कन्या पूजन, कन्या भोज और सरस्वती विसर्जन भी किया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शास्त्रीय नियमों के तहत अष्टमी और नवमी तिथि का संधिकाल एक ही दिन पड़ने पर दोनों तिथियों का पूजन उसी दिन किया जाता है। इस वर्ष भी इसी आधार पर दोनों पर्वों के अनुष्ठान एक ही दिन संपन्न होंगे।
20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी
ज्योतिषाचार्य एवं इंजीनियर हिमांशु जैन ने बताया कि इस वर्ष विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा पर्व के निर्धारण में अपराह्न काल के दौरान दशमी तिथि की उपस्थिति और श्रवण नक्षत्र के संयोग का विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12:51 बजे शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2:21 बजे तक रहेगी। मंगलवार को अपराह्न काल में दशमी तिथि और श्रवण नक्षत्र का संयोग मिलने के कारण 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाना शास्त्रसम्मत रहेगा।
इस प्रकार श्रद्धालु 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी के पूजन तथा 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाएंगे।
रिपोर्ट: मनोज जैन नायक, मुरैना
