Bhinmal में बालिका शिक्षा संवर्धन महोत्सव: एडीएम डॉ. पूजा सक्सेना ने किया बेटियों का पूजन, 380 विद्यार्थियों की रही सहभागिता
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पखवाड़े के तहत गूंजा ‘बेटी है तो कल है’ का संदेश, शिक्षा, आत्मविश्वास और महिला सशक्तीकरण पर दिया जोर
Bhinmal (मुकेश सोलंकी)। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पखवाड़े के तहत निकटवर्ती राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कोरा में बालिका शिक्षा संवर्धन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड स्थानीय संघ भीनमाल तथा मीना-राजू मंच, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय वडली नाडी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 380 विद्यार्थी शामिल हुए। कार्यक्रम में बालिका शिक्षा, समान अवसर, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया गया।
डॉ. घनश्याम कुमार व्यास के मार्गदर्शन एवं संचालन में आयोजित महोत्सव का प्रमुख आकर्षण बालिकाओं का सम्मान और उनके प्रति समाज की सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने की पहल रही।
एडीएम ने किया बालिकाओं का पूजन, शिक्षा को बताया सशक्तीकरण का आधार
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अतिरिक्त जिला कलक्टर डॉ. पूजा सक्सेना ने मीना मंच की छात्राओं पूजा कुमारी, रिंकू कुमारी और शारदा कंवर के चरण पखारकर तथा उन्हें चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस प्रतीकात्मक आयोजन के माध्यम से बालिकाओं के सम्मान और समाज में उनके महत्व का संदेश दिया गया।
डॉ. सक्सेना ने कहा कि बेटी को केवल पढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे आगे बढ़ने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के अवसर भी देने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब एक बेटी शिक्षित होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। बेटियों को रोकने या उनकी राह में बाधाएं खड़ी करने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर जीवनोपयोगी कौशल, अनुभव और व्यवहारिक समझ से जोड़ने पर जोर दिया।
स्काउट-गाइड से विकसित होता है अनुशासन और नेतृत्व
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता एवं स्काउट-गाइड संरक्षक खेमराज देसाई और डॉ. भूपेन्द्र चौधरी ने कहा कि स्काउट-गाइड केवल एक वर्दी नहीं, बल्कि अनुशासन, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संकल्प है। इसके माध्यम से बालिकाओं में साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि बालिकाओं को शिक्षा के साथ सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे जीवन की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।

शिक्षा और संस्कार से बेटियां हासिल करेंगी नई ऊंचाइयां
ब्रह्माकुमारी डॉ. गीता बहिन ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक बालिका में असीम संभावनाएं हैं। शिक्षा, संस्कार और आत्मविश्वास के सहारे बेटियां जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। उन्होंने बालिकाओं को अपनी प्रतिभा पहचानने और लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के प्राचार्य सुनील कुमार विश्नोई तथा व्याख्याता पाबूराम देवासी, राजेन्द्र वैष्णव, कृष्ण कुमार चौधरी और त्रिभुवन सिंह शेखावत ने भी बालिका शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों की शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देना सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मीना मंच जैसी पहल छात्राओं में जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने में सहायक है।
कविता और प्रतियोगिताओं ने बढ़ाया उत्साह
महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। पूनम कुमारी और संजू कुमारी ने ‘मैं मीना हूं, मैं पढ़ूंगी’ शीर्षक कविता प्रस्तुत की। छात्राओं की प्रस्तुति और पत्र वाचन ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया तथा बालिका शिक्षा के संदेश को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
कार्यक्रम में पोस्टर निर्माण, निबंध लेखन, नारा लेखन और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन भी हुआ। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और बालिका शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विचार व्यक्त करने का अवसर मिला।
बालिका शिक्षा को जनआंदोलन बनाने का संदेश
महोत्सव में भेराराम जीनगर, हीराराम, फरसाराम, निकुल कुमार सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि बेटियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर उपलब्ध कराकर ही सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।
‘बेटी है तो कल है’ के संदेश के साथ आयोजित यह महोत्सव बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने और समाज को बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित करने की पहल के रूप में सामने आया।
